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260 पहियों पर 6 महीने चलकर कुंभी पहुंची विशाल मशीन

बेल्जियम से चली ये मशीन अब लखीमपुर खीरी के कुंभी में गन्ने से प्लास्टिक बनाएगी — कैसे? आगे की स्लाइड्स में पूरी कहानी।

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पारादीप से कुंभी तक 1300 किमी का सफर

समुद्र के रास्ते ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पहुंची मशीन को 260 पहियों वाले ट्रेलर पर लादा गया, फिर 4 राज्यों और उत्तर प्रदेश के 7 जिलों से होते हुए कुंभी लाया गया।

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रफ्तार सिर्फ 10-12 किमी रोज, खर्च 15 करोड़

संकरी सड़कें, ऊपर से गुजरते बिजली के तार और पुलों की कम ऊंचाई ने रफ्तार रोक रखी; मुंबई की कंपनी के करीब 35 प्रशिक्षित कर्मी हर कदम साथ चले।

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20 फीट ऊंची, 147 फीट लंबी — प्लांट का दिल

ये साइक्लाइजेशन रिएक्टर ही वो इकाई है जो गन्ने से बनी चीनी को लैक्टिक एसिड और फिर PLA बायोप्लास्टिक में बदलेगी। कुंभी इकाई के मुख्य महाप्रबंधक सुनील कुमार यादव के मुताबिक कंपनी 6 महीने से इसका इंतजार कर रही थी।

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3080 करोड़ का प्लांट, नवंबर से उत्पादन की उम्मीद

एक ही परिसर में गन्ना पिसेगा, चीनी बनेगी और उसी से कप-प्लेट, पैकेजिंग, कपड़ा और 3डी प्रिंटिंग तक का सामान बनेगा। सालाना 80,000 टन PLA की क्षमता प्रस्तावित है; गन्ना मूल्य SAP से ही तय होगा, 2026-27 के SAP की घोषणा अभी बाकी है। गन्ने की हर नई खबर GannaUP पर पाएं।

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