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12 अक्टूबर तक फसल क्षति का डिजिटल सर्वे

अब नुकसान सिर्फ लेखपाल की रिपोर्ट पर नहीं टिकेगा — डीएम-एडीएम खुद खेत उतरेंगे। जिसका नुकसान सर्वे में दर्ज नहीं होगा, उसे राहत नहीं मिलेगी। डेडलाइन बेहद नजदीक है।

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राहत आयुक्त ने जारी किया सख्त आदेश

6 अक्टूबर को लखनऊ में समीक्षा बैठक के बाद राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने निर्देश दिया — राहत पोर्टल पर डिजिटल क्रॉप सर्वे के अनुसार फसल क्षति की फीडिंग हर हाल में 12 अक्टूबर तक पूरी होनी चाहिए। देरी का कोई बहाना नहीं चलेगा।

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अफसर खुद खेत में उतरेंगे

इस बार आकलन सिर्फ लेखपाल-कानूनगो की रिपोर्ट पर नहीं होगा। जिलाधिकारी और अपर जिलाधिकारी स्वयं क्षेत्र में जाकर सर्वे की गुणवत्ता और पारदर्शिता जांचेंगे, और उप जिलाधिकारी-तहसीलदार डिजिटल सर्वे का क्रॉस-वेरिफिकेशन करेंगे। यानी कागज़ी रिपोर्ट के दम पर कोई खेल नहीं होगा।

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अब बारिश का झूठा हिसाब नहीं चलेगा

आईएमडी और एडब्ल्यूएस-एआरजी मौसम स्टेशनों के असली वर्षा आंकड़ों से मिलान करके ही नुकसान तय होगा। बाढ़ के साथ-साथ भारी बारिश और आंधी-तूफान से हुआ नुकसान भी दर्ज होगा। हर जिले की प्रगति रोजाना गूगल शीट और पोर्टल पर चढ़ानी होगी।

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गन्ना किसान अभी ये दो काम कर लें

खेत के नुकसान की फोटो-वीडियो अपने मोबाइल में सहेजकर रखें और खसरा रिकॉर्ड दुरुस्त कराएं। सर्वे के बाद पात्र किसानों को नियमानुसार सहायता सीधे मिलेगी। राहत शिकायत के लिए टोल-फ्री 1800-121-3203 पर कॉल करें। GannaUP पर गन्ना भुगतान और पर्ची की ताज़ा जानकारी पाएं।

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