गन्ना किसानों के लिए ₹493 करोड़ राहत: 8-10 दिन में खाते तक पहुंचाने का दावा

पेराई सीजन सिर पर है। कई खेतों में ओलावृष्टि और जलभराव से गिरा गन्ना अब भी पड़ा है। ऐसे में सोमवार को गोरखपुर से आई खबर किसानों के लिए राहत की तरह आई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 9,18,091 किसानों के बैंक खातों में ₹493 करोड़ की राशि सीधे डीबीटी से भेज दी है। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, इनमें वे किसान हैं जिनकी फसल बाढ़, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि और चक्रवात से खराब हुई।
गोरखपुर में हुआ कार्यक्रम, बटन दबाते ही खातों में पैसा
कार्यक्रम गोरखपुर के योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में हुआ। मुख्यमंत्री ने यहीं से डीबीटी का बटन दबाया और राशि किसानों के खातों में पहुंच गई। राहत आयुक्त कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक, चालू वित्तीय वर्ष की शुरुआत से 9 अक्टूबर तक आपदा से फसल क्षति वाले 9 लाख 18 हजार 91 किसान चिह्नित किए गए थे। इन्हीं को कृषि निवेश अनुदान के रूप में यह राशि दी गई है।
मुख्यमंत्री का कहना है कि मदद जिला स्तर से मिली डिजिटल फसल सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर तय हुई। उनकी यह भी घोषणा रही कि किसान का पैसा बिचौलिए के बिना, सीधे खाते में जाए। यह इस पूरे भुगतान का सबसे बड़ा दावा है।
सितंबर के आखिरी हफ्ते की तबाही, जिसके निशान अभी बाकी हैं
यह राहत हवा में नहीं आई। सितंबर के अंतिम सप्ताह में आए चक्रवात के साथ हुई अतिवृष्टि और बाढ़ से प्रदेश के कई जिलों में फसलों को व्यापक नुकसान हुआ। खेतों में पानी भरने से धान समेत अन्य फसलें डूबीं। कई जगह जनहानि और पशुहानि की भी खबरें आईं।
गन्ना किसानों के लिए दर्द दोहरा था। ओलावृष्टि में पिटा गन्ना और जलभराव में डूबे खेत। ऐसे नुकसान की भरपाई का रास्ता अक्सर सालों लंबा होता था। सरकार का दावा है कि इस बार आपदा के 8 से 10 दिन के भीतर राहत पहुंचा दी गई। इसकी परख तभी होगी जब आखिरी किसान के खाते में पैसा दिखेगा।
सिर्फ फसल नहीं — घर और हादसे पर भी मदद, पर अलग मद से
₹493 करोड़ के इस भुगतान के अलावा सरकार ने तीन और राहतें घोषित की हैं। बाढ़, चक्रवात या अतिवृष्टि से जिनके मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए, उन्हें मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत ₹1.20 लाख की अतिरिक्त सहायता दी जा रही है। अधिकारियों को निर्देश हैं कि पूरी तरह नष्ट मकानों वालों को तत्काल आवास मुहैया कराया जाए। आंशिक क्षतिग्रस्त मकानों के लिए नियमानुसार मुआवजा मिलेगा।
प्राकृतिक आपदा में किसी व्यक्ति की मृत्यु पर पीड़ित परिवार को 24 घंटे के भीतर ₹4 लाख देने की व्यवस्था की गई है। पशुहानि के मामलों में भी तुरंत सहायता का ऐलान हुआ है। एक अहम सफाई: ये ₹1.20 लाख और ₹4 लाख की मदद ₹493 करोड़ वाली फसल-राहत से अलग मद में है। इसके अलावा मुख्यमंत्री के मुताबिक, इस बरसात के सीजन में अब तक आपदा प्रभावित किसानों और नागरिकों को लगभग ₹1,000 करोड़ की सहायता दी जा चुकी है।
15 अक्टूबर से खरीद केंद्र: पेराई से पहले नकदी का रास्ता
इस राहत का असली फायदा गन्ना किसानों को एक और घोषणा से जुड़ता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अतिवृष्टि और जलभराव से प्रभावित जिलों में 15 अक्टूबर से धान और मोटे अनाज के खरीद केंद्र खुलेंगे। इन केंद्रों पर धान, ज्वार, बाजरा और मक्का की खरीद होगी। खरीफ की उपज की खरीद से किसानों के पास नकदी आएगी, जो पेराई सीजन में गन्ने की कटाई, ढुलाई और रबी की बुवाई के खर्च में काम आएगी।
यानी दो तरफा राहत है: सीधी डीबीटी और खरीद के जरिए नकदी का प्रवाह। गन्ना बेल्ट के किसानों के लिए दूसरा रास्ता ज्यादा मतलब का है, क्योंकि परची का पैसा मिलने में अभी वक्त लगेगा।
गन्ना किसान अब क्या करें: राहत पाने की व्यावहारिक शर्तें
राहत की पूरी व्यवस्था एक ही कड़ी पर टिकी है: डिजिटल फसल सर्वे। अगर आपके गन्ने का नुकसान सर्वे में दर्ज नहीं है, तो पैसा अटक सकता है। ध्यान देने वाली बातें:
- नुकसान सर्वे में दर्ज कराएं: लेखपाल या कृषि विभाग के डिजिटल फसल सर्वे में अपनी फसल क्षति का रिकॉर्ड जरूर करवाएं। राहत इसी रिकॉर्ड पर तय होती है।
- खाता-आधार लिंक रखें: बैंक खाता, आधार और जमीन के अभिलेख जुड़े हों। डीबीटी अटके तो आमतौर पर यहीं से अटकती है।
- नुकसान का फोटो-रिकॉर्ड: खेत में हुए नुकसान की तस्वीरें और तारीख संभालकर रखें। वेरिफिकेशन के समय यही सबसे मजबूत सबूत बनता है।
- शिकायत हो तो हेल्पलाइन: गन्ना विभाग की टोल-फ्री किसान हेल्पलाइन 1800-121-3203 पर संपर्क करें।
एक सावधानी: राहत या भुगतान से जुड़ी किसी भी खबर पर गन्ना विभाग की ताजा अधिसूचना या आधिकारिक घोषणा ही आखिरी सच मानें।
आगे क्या देखना होगा
15 अक्टूबर से खरीद केंद्र खुलेंगे। फिर असली परीक्षा होगी। राहत और खरीद, दोनों का पैसा अंतिम छोर के किसान तक कितनी तेजी से पहुंचता है। गन्ना किसान एक काम जरूर करें: नुकसान का सर्वे-रिकॉर्ड दुरुस्त रखें, क्योंकि पूरी व्यवस्था उसी रिकॉर्ड पर चलती है।
मुख्य बातें
- गोरखपुर से CM योगी ने 9,18,091 आपदा प्रभावित किसानों को ₹493 करोड़ कृषि निवेश अनुदान DBT से भेजा।
- सरकार का दावा: आपदा के 8-10 दिन में सर्वे पूरा कर राहत पहुंचाई; इस बरसात में कुल करीब ₹1,000 करोड़ की मदद दी गई।
- गन्ना किसानों के लिए राहत की शर्त डिजिटल फसल सर्वे में नुकसान का दर्ज होना है; हेल्पलाइन 1800-121-3203।
स्रोत: दैनिक जागरण (गोरखपुर, 12 अक्टूबर 2026), किसान तक, हिंदुस्तान टाइम्स, टाइम्स ऑफ इंडिया (12-13 अक्टूबर 2026 की रिपोर्टें)
