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पेराई शुरू, भाव अब भी अटका: 7 नवंबर तक चलेंगी वेस्ट यूपी की ज्यादातर मिलें

✍️ Aamir Raza · 🗓 31 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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पेराई शुरू, भाव अब भी अटका: 7 नवंबर तक चलेंगी वेस्ट यूपी की ज्यादातर मिलें

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए सत्र की सबसे बड़ी खबर आ गई है, और उसके साथ सबसे बड़ा सवाल भी। बागपत की मलकपुर चीनी मिल से पेराई सत्र 2026-27 की शुरुआत हो चुकी है। मोदीनगर की मोदी शुगर मिल 31 अक्टूबर से चल रही है। नवंबर के पहले सप्ताह में वेस्ट यूपी की ज्यादातर मिलें एक के बाद एक चालू हो जाएंगी। मगर गन्ने का भाव क्या होगा, यह अब तक तय नहीं हुआ है। 2026-27 के SAP की घोषणा अभी बाकी है, और किसान बिना भाव जाने ही गन्ना मिलों को देने की तैयारी में है।

कौन सी मिल कब चलेगी

गन्ना विभाग के कार्यक्रम के मुताबिक 1 नवंबर को बुलंदशहर और साबितगढ़ की मिलों के साथ गंगा किसान सहकारी चीनी मिल (मोरना) में पेराई शुरू होगी। 2 नवंबर को मवाना, दौराला, नंगला मल, रमाला, अनामिका और धामपुर की मिलें चलेंगी। सकौती (आईपीएल) में 4 नवंबर और किनौनी में 5 नवंबर से पेराई शुरू होनी है। मोहिउद्दीनपुर और टिकौला 7 नवंबर, यानी छोटी दीपावली से सत्र शुरू करेंगी। बुढ़ाना, खतौली, मंसूरपुर और तितावी के भी नवंबर के पहले सप्ताह में चालू होने की संभावना है। सहारनपुर की शेरमऊ और खाईखेड़ी मिलों में शुक्रवार से ही पेराई शुरू हो गई है।

तारीखों को लेकर एक चेतावनी भी है। अक्टूबर के आखिर में हुई बेमौसम बारिश ने कई जगह कटाई का काम करीब एक सप्ताह पीछे धकेल दिया है। खेतों में पानी भरने से गन्ना काटना मुश्किल हुआ है, और कुछ मिलों का कार्यक्रम खिसक सकता है। इसलिए किसान अपनी मिल की ताजा तारीख पर्ची और इंडेंट से ही मिलान करके चलें, सिर्फ पुराने कार्यक्रम के भरोसे ट्रैक्टर-ट्रॉली न भरें।

भाव का पेंच: पिछले साल 400, इस साल अभी खामोश

पिछले पेराई सत्र 2025-26 में अगेती का SAP 400 रुपये और पछेती का 390 रुपये प्रति क्विंटल था। इस साल किसान 500 से 600 रुपये तक की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क सीधा है। मजदूरी, डीजल और खाद की लागत बढ़ी है, और पेराई शुरू होने से पहले भाव घोषित होना चाहिए ताकि किसान हिसाब लगाकर गन्ना दे सके। चर्चा यह भी है कि चुनावी साल में सरकार 28 से 40 रुपये तक की बढ़ोतरी कर सकती है, और दीपावली के आसपास ऐलान संभव है। मगर यह अभी अटकल ही है, सरकारी घोषणा नहीं।

पड़ोसी राज्य हरियाणा ने इस मामले में बढ़त ले ली है। वहां 2026-27 के लिए SAP 430 रुपये प्रति क्विंटल घोषित हो चुका है, जो पिछले सत्र के 415 रुपये से 15 रुपये ज्यादा है, और 2027-28 के लिए 450 रुपये का ऐलान भी साथ कर दिया गया है। यूपी के किसान इसी तुलना को उठा रहे हैं कि जब पड़ोसी राज्य भाव तय करके सत्र शुरू कर सकता है, तो यहां घोषणा क्यों अटकी है।

बागपत और मोदीनगर से दो ठोस संकेत

बागपत जिले में प्रशासन ने पेराई से पहले ही सख्ती दिखा दी है। जिला गन्ना अधिकारी ने बकाया भुगतान न करने वाली मिलों को नोटिस जारी करके सत्र शुरू होने से पहले भुगतान के निर्देश दिए हैं। जिले में करीब 85 हजार हेक्टेयर में गन्ने की खेती होती है, और मलकपुर, बागपत और रमाला मिलों में पेराई की तैयारियां पूरी हैं। किसानों को पर्ची, मिल चलने से दो दिन पहले जारी करने की व्यवस्था बताई गई है।

मोदीनगर की मोदी मिल से भी साफ आंकड़े सामने आए हैं। इस बार मिल से 28,500 किसान जुड़े हैं, जो पिछले साल के 28,000 से 500 ज्यादा हैं। दूसरी ओर गन्ने का रकबा करीब 500 हेक्टेयर घटकर लगभग 21,000 हेक्टेयर रह गया है। यानी किसान बढ़े हैं, रकबा घटा है। मिल प्रबंधन ने मेंटेनेंस पूरी करके पर्ची वितरण शुरू कर दिया है, ताकि पहले दिन से तौल और आवक बिना रुकावट चले।

किसान के लिए इस सत्र में क्या करना जरूरी है

सत्र शुरू होते ही सबसे पहला काम पर्ची की जांच है। पर्ची पर क्रय केंद्र, तारीख और किसान का नाम-सट्टा विवरण सही है या नहीं, यह मिलान कर लें। गड़बड़ दिखे तो भीड़ बढ़ने से पहले समिति या मिल के कर्मचारी से सुधार करा लें। कटा हुआ गन्ना ज्यादा दिन खेत में पड़ा रहे तो वजन घटता है, इसलिए पर्ची के क्रम के हिसाब से ही कटाई कराना समझदारी है।

भुगतान का नियम भी याद रखना चाहिए। नियमानुसार मिलों को गन्ना आपूर्ति के 14 दिनों के भीतर भुगतान करना होता है। पर्ची, तौल और भुगतान की जानकारी ई-गन्ना मोबाइल ऐप पर भी देखी जा सकती है। अगर भुगतान अटकता है तो पर्ची और तौल की रसीद ही किसान का सबसे मजबूत कागज है, इसलिए इनकी फोटो मोबाइल में संभालकर रखें।

देर से शुरू हुआ यूपी, देश में 107 मिलें पहले ही चल पड़ीं

चीनी उद्योग संगठन इस्मा के मुताबिक 26 अक्टूबर तक देशभर में 107 चीनी मिलों ने पेराई शुरू कर दी थी। इनमें महाराष्ट्र की 87 मिलें थीं, जबकि उत्तर प्रदेश की तब केवल दो मिलें ही चालू हो पाई थीं। अब वेस्ट यूपी की मिलें तेजी से चालू हो रही हैं, लेकिन शुरुआत में हुई देरी बताती है कि बारिश और तैयारी दोनों ने इस बार सत्र को पीछे धकेला है। पेराई चल पड़ी है, ट्रैक्टर-ट्रॉली सड़कों पर आ गए हैं, और अब हर किसान यह जानना चाहता है कि जिस गन्ने को वह मिल तक पहुंचा रहा है, उसकी कीमत आखिर कितनी तय होगी।

मुख्य बातें

  • वेस्ट यूपी में पेराई सत्र 2026-27 शुरू: मलकपुर और मोदी मिल चल पड़ीं, 7 नवंबर तक ज्यादातर मिलें चालू हो जाएंगी।
  • 2026-27 का SAP अभी घोषित नहीं हुआ है; पिछले सत्र में अगेती का भाव 400 और पछेती का 390 रुपये प्रति क्विंटल था।
  • किसान 500 से 600 रुपये की मांग कर रहे हैं, जबकि हरियाणा ने 2026-27 के लिए 430 रुपये का SAP पहले ही घोषित कर दिया है।

स्रोत: नवभारत टाइम्स (30 अक्टूबर 2026), अमर उजाला (गाजियाबाद और बागपत, अक्टूबर 2026), रूरल वॉयस (31 अक्टूबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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