अमेरिका की रिपोर्ट: 2026-27 में चीनी उत्पादन सिर्फ 2.95 करोड़ टन, गन्ना दाम पर असर तय

मिलें 20 अक्टूबर से पेराई शुरू करने की तैयारी कर रही हैं और ठीक इसी वक्त अमेरिका से आई एक रिपोर्ट ने चीनी बाज़ार में हलचल मचा दी है। इस साल चीनी कम बनेगी तो क्या गन्ने के दाम बढ़ेंगे और क्या मिलों से भुगतान समय पर मिलेगा? इन सवालों के जवाब जानना हर किसान के लिए जरूरी है।
रिपोर्ट में क्या कहा गया है
अमेरिकी कृषि विभाग (यूएसडीए) की विदेशी कृषि सेवा की नई दिल्ली इकाई ने 8 अक्टूबर को 2026-27 सीजन (अक्टूबर से सितंबर) के लिए नया अनुमान जारी किया है। रॉयटर्स और एग्रीइनसाइट के मुताबिक मुख्य आंकड़े ये हैं:
- भारत का चीनी उत्पादन 3.36 करोड़ टन के पुराने अनुमान से घटकर 2.95 करोड़ टन रह सकता है। यानी करीब 41 लाख टन, लगभग 12 प्रतिशत की कटौती।
- गन्ने का कुल उत्पादन 45.5 करोड़ टन के बजाय 43.4 करोड़ टन रहने का अनुमान है।
- गन्ने में शुगर की मात्रा घटने से पेराई लायक असली क्षेत्रफल भी कम हुआ है।
गौरतलब है कि इसी साल अप्रैल में यूएसडीए ने उत्पादन 3.36 करोड़ टन रहने का अनुमान लगाया था। चिनीमंडी और द हिंदू बिज़नेसलाइन ने तब ये आंकड़े छापे थे। सिर्फ छह महीने में अनुमान पलट गया है।
उत्पादन घटने की वजह क्या है
रिपोर्ट में वजह साफ बताई गई है। 2026 में बारिश की भारी कमी से गन्ने में शुगर (सुक्रोज) की मात्रा घटी है। बारिश कम होने से गन्ना पतला और कम मीठा हुआ, जिससे चीनी की रिकवरी पर सीधा असर पड़ा। इसके अलावा पानी की बढ़ती कमी 2027 की शुरुआत में मिलों के संचालन के लिए गंभीर जोखिम बन सकती है। रिपोर्ट में ये चेतावनी साफ शब्दों में दी गई है।
यूपी के लिए ये रिपोर्ट क्यों खास है
उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा चीनी उत्पादक राज्य है और इस रिपोर्ट का सीधा असर यहीं के किसानों और मिलों पर पड़ेगा। कुछ ठोस तथ्य:
- यूपी में 122 चीनी मिलें हैं, जिनमें 71 से अधिक सिर्फ पश्चिमी यूपी में हैं। द टाइम्स ऑफ इंडिया और चिनीमंडी के मुताबिक मिलें इस बार करीब 10 दिन पहले, 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू करने की तैयारी कर रही हैं।
- गन्ना विभाग के सर्वे के मुताबिक इस साल यूपी में गन्ने का क्षेत्रफल 28.87 लाख हेक्टेयर से घटकर 28.4 लाख हेक्टेयर रह गया है। 47,000 हेक्टेयर की कमी दर्ज हुई है।
चीनी कम बनने का मतलब है कि बाज़ार में चीनी के दाम मजबूत बने रह सकते हैं। दाम मजबूत रहेंगे तो मिलों की कमाई बेहतर होगी और भुगतान की स्थिति भी सुधरने की उम्मीद बढ़ेगी। लेकिन सरकार मासिक रिलीज व्यवस्था के जरिए दामों पर नियंत्रण रखती है, इसलिए बेलगाम बढ़त की उम्मीद करना सही नहीं होगा।
भाव की स्थिति: क्या तय है, क्या नहीं
सबसे पहले केंद्र सरकार का तय भाव। मई 2026 में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने चीनी सत्र 2026-27 के लिए गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था, जो 10.25 प्रतिशत चीनी रिकवरी पर आधारित है। द हिंदू और द हिंदू बिज़नेसलाइन के मुताबिक अगर किसी मिल की रिकवरी 9.5 प्रतिशत से कम रही तो भी किसान को 338.3 रुपये प्रति क्विंटल से कम नहीं मिलेगा। ये भाव 1 अक्टूबर से लागू है।
लेकिन यूपी का अपना राज्य परामर्शित मूल्य (एसएपी) अभी तक घोषित नहीं हुआ है। चिनीमंडी की सितंबर की खबर के मुताबिक अमरोहा में किसान महापंचायत ने 2026-27 के लिए गन्ने का भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल तय करने की मांग की थी और 20 अक्टूबर तक घोषणा न होने पर 25 अक्टूबर को आंदोलन की चेतावनी दी थी। यानी भाव को लेकर किसान और सरकार के बीच खींचतान जारी है।
पेराई से पहले किसानों के लिए जरूरी काम
रिपोर्ट और हालात को देखते हुए पेराई शुरू होने से पहले कुछ काम निपटा लेना समझदारी होगी:
सर्वे रिकॉर्ड का मिलान करा लें। द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक अधिकारियों ने किसानों को सलाह दी है कि वे गन्ना समिति में अपने क्षेत्रफल और किस्म का रिकॉर्ड मिलवा लें, ताकि पर्ची में कोई दिक्कत न आए।
बैंक खाता तैयार रखें। भुगतान सीधे खाते में आता है। खाता सक्रिय हो और आधार से जुड़ा हो, वरना पैसा अटक सकता है।
कम उत्पादन का मतलब मिलों के बीच होड़। चीनी कम बनने की स्थिति में मिलें गन्ना हासिल करने के लिए पहले से ज्यादा सजग रहेंगी। अपनी पर्ची, तौल और भुगतान का पूरा रिकॉर्ड संभालकर रखें। किसी तरह की शिकायत हो तो गन्ना विकास विभाग का टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-121-3203 पर संपर्क करें।
पका और साफ गन्ना दें। बारिश की कमी से गन्ने में शुगर पहले से कम है। ऐसे में ताजा, साफ और रोगमुक्त गन्ना देने वाले किसानों को मिलों में प्राथमिकता मिलने की संभावना ज्यादा है।
किसानों के लिए संदेश साफ है। उत्पादन कम रहने की खबर चीनी के दामों को सहारा देगी, लेकिन अंतिम भाव सरकार की घोषणा और बाज़ार की चाल पर निर्भर करेगा। पेराई शुरू होने से पहले अपने कागज दुरुस्त कर लें और भाव की घोषणा पर नजर रखें।
मुख्य बातें
- यूएसडीए ने 2026-27 में भारत का चीनी उत्पादन अनुमान 3.36 से घटाकर 2.95 करोड़ टन किया; गन्ना उत्पादन 43.4 करोड़ टन रहने का अनुमान।
- बारिश की कमी से गन्ने में शुगर घटी; 2027 की शुरुआत में मिलों के संचालन पर पानी की कमी का खतरा।
- यूपी की 122 मिलें 20 अक्टूबर से पेराई की तैयारी में; गन्ना क्षेत्रफल घटकर 28.4 लाख हेक्टेयर; एसएपी की घोषणा अभी बाकी।
स्रोत: रॉयटर्स (8 अक्टूबर 2026), एग्रीइनसाइट (8 अक्टूबर 2026), द हिंदू बिज़नेसलाइन, चिनीमंडी, द टाइम्स ऑफ इंडिया
