ताज़ा ख़बर

गन्ने के दाम पर किसान-मिल टकराव क्यों? 31 से 50 रुपये वाली मांग के पीछे का गणित

✍️ Aamir Raza · 🗓 27 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

Google पर हमें फ़ॉलो करें
गन्ने के दाम पर किसान-मिल टकराव क्यों? 31 से 50 रुपये वाली मांग के पीछे का गणित

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मिलों में गन्ने की पेराई शुरू हो चुकी है, ट्रालियां भी चल पड़ी हैं। पर एक सवाल हर किसान के मन में अब भी अटका है। इस साल के गन्ने का दाम क्या होगा? 2026-27 के लिए उत्तर प्रदेश के राज्य परामर्श मूल्य (SAP) की घोषणा अभी बाकी है। किसान गन्ना तो मिल को दे रहा है, पर उसे यह नहीं पता कि प्रति क्विंटल कितने रुपये मिलेंगे।

इसी उलझन की जड़ में एक पुराना टकराव है। किसान लागत बढ़ने का हवाला देकर दाम बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। मिल मालिक इसके उल्टे पक्ष में खड़े हैं। उनका कहना है कि SAP बढ़ाना उनके बस में नहीं है, क्योंकि चीनी बनाने का खर्च ही इतना बढ़ गया है कि मौजूदा भाव पर भी धंधा घाटे की ओर जा रहा है।

मिलों का गणित: एक क्विंटल चीनी पर 4,300 रुपये तक खर्च

मिल पक्ष के हिसाब से गन्ने की ढुलाई पर ही प्रति क्विंटल करीब 20 रुपये तक खर्च आता है। कर्मचारियों का वेतन और चीनी बनाने की प्रक्रिया पर अलग से 50 से 55 रुपये प्रति क्विंटल जुड़ जाते हैं। इन सब मदों को जोड़ने पर एक क्विंटल चीनी की उत्पादन लागत 4,200 से 4,300 रुपये तक पहुंच जाती है।

इस गणित का दूसरा पहलू भी समझना जरूरी है। एक क्विंटल गन्ने से औसतन 10 से 11 किलोग्राम चीनी मिलती है। इसके साथ करीब पांच किलोग्राम सी-हैवी शीरा और लगभग इतनी ही खोई निकलती है। शीरे का बाजार भाव करीब 1,300 रुपये प्रति क्विंटल बताया जाता है, पर पूरी मात्रा इसी दर पर नहीं बिकती। सरकार मिलों से 30 प्रतिशत तक शीरा 152 रुपये प्रति क्विंटल की दर से लेती है।

31 रुपये पर अटका चीनी का न्यूनतम मूल्य

मिल संचालकों की सबसे बड़ी मांग चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) को लेकर है। फरवरी 2019 के बाद से यह 31 रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर है। मिलें इसे बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक करने की मांग कर रही हैं। किसान संगठनों ने भी इसी मांग का समर्थन किया है, क्योंकि उनका तर्क है कि मिल की आर्थिक हालत खराब होने पर गन्ने का भुगतान भी अटकता है।

तुलना करने पर यह असंतुलन और साफ दिखता है। पिछले सात वर्षों में गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) में 26 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2020-21 में गन्ने का FRP 2,850 रुपये प्रति टन था, जो 2026-27 के सत्र के लिए बढ़कर 3,650 रुपये प्रति टन हो गया है। इसके उल्टे चीनी का MSP 3,100 रुपये प्रति क्विंटल पर ही रुका हुआ है।

एथेनॉल वाला फैसला और बढ़ा दबाव

इस सत्र में मिलों पर एक और दबाव आया है। सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए 2026-27 के एथेनॉल आपूर्ति वर्ष में गन्ने के रस, चीनी के सिरप और बी-हैवी शीरे से बने एथेनॉल की खरीद न करने का निर्देश दिया है। सरकारी तेल कंपनियों ने नवंबर 2026 से शुरू होने वाले आपूर्ति वर्ष के लिए करीब 1,100 करोड़ लीटर एथेनॉल खरीदने का टेंडर जारी किया है, जिसमें इन स्रोतों से बना एथेनॉल शामिल नहीं है।

सी-हैवी शीरे से बने एथेनॉल की खरीद पर रोक नहीं लगाई गई है, पर मिलें बी-हैवी शीरे या सीधे गन्ने के रस से एथेनॉल नहीं बना पाएंगी। मिल संचालकों का कहना है कि इससे उनकी आय का गणित और बिगड़ सकता है। इसी वजह से वे सी-हैवी शीरे से बनने वाले एथेनॉल की कीमत बढ़ाने की मांग भी कर रहे हैं।

यूपी में SAP पर क्या चल रहा है

नए पेराई सत्र की शुरुआत से पहले सरकार पर 2026-27 के लिए SAP घोषित करने का दबाव बढ़ रहा है। गन्ना विकास विभाग के सूत्रों के मुताबिक सरकारी अधिकारियों और चीनी मिल प्रतिनिधियों के बीच हाल में हुई बैठक में मूल्य में बदलाव की संभावना पर चर्चा हुई।

किसान संगठन लागत बढ़ने के आधार पर मूल्य वृद्धि चाहते हैं, जबकि मिल मालिकों ने SAP नहीं बढ़ाने का आग्रह किया है। गन्ना विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक विधानसभा चुनाव से पहले SAP में बदलाव की संभावना है और मूल्य वृद्धि से इनकार नहीं किया जा सकता। यह अधिकारी का आकलन है, सरकार का घोषित फैसला नहीं।

किसान के लिए इसका मतलब क्या है

इस पूरी खींचतान का सीधा असर किसान की जेब पर पड़ता है। अगर SAP बढ़ता है तो प्रति क्विंटल आमदनी बढ़ेगी। अगर नहीं बढ़ता तो बढ़ी हुई लागत, डीजल, खाद और मजदूरी का बोझ किसान को ही उठाना होगा।

ऐसे में किसान को दो काम जरूर करने चाहिए। गन्ना देते समय तौल पर्ची संभालकर रखें। भुगतान में देरी हो तो पहले अपनी गन्ना समिति से संपर्क करें। गन्ना विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

मुख्य बातें

  • 2026-27 के लिए यूपी के SAP की घोषणा अभी बाकी है, किसान पिछले सत्र के भाव को इस सत्र का भाव न मानें।
  • मिलों का दावा है कि एक क्विंटल चीनी की उत्पादन लागत 4,200 से 4,300 रुपये तक पहुंच गई है, जबकि चीनी का MSP फरवरी 2019 से 31 रुपये प्रति किलो पर अटका है।
  • मिलें और किसान संगठन चीनी का MSP 31 से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलो करने की मांग कर रहे हैं, और सरकार ने इस सत्र में गन्ने के रस व बी-हैवी शीरे से एथेनॉल बनाने पर रोक लगा दी है।

स्रोत: इंडिया टुडे हिंदी (27 अक्टूबर 2026), बिज़नेस स्टैंडर्ड हिंदी, आजतक।

#गन्ना #गन्ना भाव #SAP #चीनी मिल #MSP #एथेनॉल

Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

और पढ़ें

बिना कर्ज लिए 20 हजार किसान दिवालिया की कगार पर, सिंभावली का 148 करोड़ वाला सच ताज़ा ख़बर बिना कर्ज लिए 20 हजार किसान दिवालिया की कगार पर, सिंभावली का 148 करोड़ वाला सच हापुड़ की सिंभावली शुगर मिल से जुड़े किसानों पर 148.59 करोड़ के पुराने कर्ज का बोझ बढ़कर 300 करोड़ से ज्यादा हो गया है। सीबीआई जांच के बाद भी मामला हाईकोर्ट में लंबित है और 20 हजार से ज्यादा किसान डिफॉल्टर माने जाने की कगार पर हैं। मेरठ के 2.22 लाख किसानों के लिए खुशखबरी: 1 नवंबर से चलेंगी 6 चीनी मिलें ताज़ा ख़बर मेरठ के 2.22 लाख किसानों के लिए खुशखबरी: 1 नवंबर से चलेंगी 6 चीनी मिलें मेरठ जिले की छह चीनी मिलें 1 से 4 नवंबर के बीच पेराई सत्र 2026-27 शुरू करेंगी। किनौनी मिल 1 नवंबर को चलेगी, मवाना, नंगलामल और दौराला 2 नवंबर को, मोहिउद्दीनपुर और सकौती 4 नवंबर को। बेलगावी बैठक बेनतीजा: ₹5500 की मांग अटकी, 29 अक्टूबर को दिल्ली की समिति तय करेगी रास्ता ताज़ा ख़बर बेलगावी बैठक बेनतीजा: ₹5500 की मांग अटकी, 29 अक्टूबर को दिल्ली की समिति तय करेगी रास्ता कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की बेलगावी में किसान नेताओं और मिल मालिकों से हुई बैठक बिना फैसले के खत्म हुई। गन्ने के ₹5500 प्रति टन दाम की मांग अब 29 अक्टूबर को आने वाली केंद्रीय समिति के सामने रखी जाएगी।