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यूपी में चीनी उत्पादन 6 साल में 37 लाख टन घटा, गन्ना भाव पर क्या होगा असर?

✍️ Aamir Raza · 🗓 28 Sep 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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यूपी में चीनी उत्पादन 6 साल में 37 लाख टन घटा, गन्ना भाव पर क्या होगा असर?

यूपी में गुड़ इस समय करीब 90 रुपये किलो बिक रहा है. दुकान पर गुड़ महंगा होना रसोई की खबर लगती है, लेकिन असल में ये खेत की खबर है. गुड़ इसलिए महंगा है क्योंकि उत्तर प्रदेश का चीनी उत्पादन पिछले छह साल में बुरी तरह लुढ़क गया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक 2019-20 में यूपी ने 126.4 लाख टन चीनी बनाई थी. 2025-26 में ये घटकर सिर्फ 89.5 लाख टन रह गई. यानी छह साल में करीब 37 लाख टन चीनी का नुकसान. राज्य की लगभग 120 चीनी मिलों ने जितना गन्ना पेरा, उसकी मात्रा भी छह साल में पांचवें हिस्से से ज्यादा घट गई.

इतनी बड़ी गिरावट की वजह क्या है

सबसे बड़ी वजह है लाल सड़न रोग, यानी रेड रॉट. यूपी के ज्यादातर खेतों में लगी गन्ने की किस्म Co-0238, जिसे करन-4 भी कहते हैं, इस फफूंद रोग के सामने टिक नहीं पाई. रोग लगते ही गन्ने की उपज गिरती है और उसमें से निकलने वाली चीनी की मात्रा भी कम हो जाती है. एक ही किस्म पर पूरे प्रदेश का दारोमदार था, सो नुकसान भी पूरे प्रदेश को झेलना पड़ा. गन्ने का कुल उत्पादन भी 2023-24 के 2494 लाख मीट्रिक टन से घटकर 2025-26 में 2362 लाख मीट्रिक टन रह गया.

Co-0238 किस्म विकसित करने वाले गन्ना प्रजनक बख्शी राम का कहना है कि इस सीजन में औसत गन्ना उत्पादन में कम से कम 10 प्रतिशत सुधार हो सकता है. लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि इस फायदे को पूरी तरह पाने के लिए चीनी मिलों को आदर्श रूप से नवंबर से पेराई शुरू करनी चाहिए. जल्दी पेराई से चीनी की रिकवरी घट जाती है.

गन्ने का रकबा भी घटा: 47,000 हेक्टेयर कम

मुसीबत सिर्फ रोग की नहीं है. गन्ना विभाग के ताजा सर्वे (जून से अगस्त के बीच) के मुताबिक 2026-27 पेराई सीजन के लिए गन्ने का रकबा 28.61 लाख हेक्टेयर से घटकर 28.14 लाख हेक्टेयर रह गया है. यानी करीब 47,000 हेक्टेयर की सीधी गिरावट. किसानों का कहना है कि लागत, मजदूरी और सिंचाई महंगी हो गई है, मिलें भुगतान में देरी करती हैं और गन्ने की फसल का चक्र लंबा है. इसलिए कई किसान जल्दी रिटर्न देने वाली फसलों की ओर जा रहे हैं.

प्रदेश के 11 प्रमुख चीनी उत्पादक जिलों, अमरोहा, बिजनौर, बुलंदशहर, हरदोई, लखीमपुर खीरी, मेरठ, मुजफ्फरनगर, पीलीभीत, सहारनपुर, शाहजहांपुर और सीतापुर में रकबा 1.6 प्रतिशत घटकर 17.14 लाख हेक्टेयर रह गया है. इन जिलों में प्रदेश की शीर्ष 20 मिलें हैं, जिन्होंने मौजूदा सीजन में 32.11 लाख टन चीनी बनाई. ये राज्य के कुल 89.52 लाख टन उत्पादन का करीब 68 प्रतिशत है. राहत की बात सिर्फ इतनी है कि बिजनौर और लखीमपुर खीरी में रकबा बढ़ा है, बाकी नौ जिलों में गिरावट है.

किसान के भाव पर इसका सीधा असर

अब सवाल ये है कि उत्पादन घटने से किसान को फायदा होगा या नुकसान. जवाब दोनों तरफ है.

पहली बात, गन्ना कम है और मिलों को गन्ना चाहिए. सरकार मिलों पर जल्दी पेराई शुरू करने का जोर दे रही है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि जल्दी पेराई से चीनी की रिकवरी घटेगी. दूसरी तरफ स्थानीय कोल्हू अक्टूबर में किसानों को तय मूल्य से ज्यादा दाम देने को तैयार हैं, क्योंकि गुड़ के भाव ऊंचे हैं. किसान नेताओं का कहना है कि कोल्हुओं ने बिना किसी सरकारी सहारे के किसानों को तय मूल्य से ज्यादा भुगतान किया है.

तीसरी बात, बाजार में चीनी के दाम बढ़ रहे हैं और फरवरी-मार्च 2027 में यूपी में विधानसभा चुनाव होने हैं. गन्ना भाव हमेशा से चुनावी मुद्दा रहा है, इसलिए किसान इस समय अपनी मांग को लेकर सबसे मजबूत स्थिति में हैं.

नई उम्मीद: करन-20 कब आएगा किसानों के खेत तक

उद्योग अब नई किस्म Co-20016, यानी करन-20 पर नजरें गड़ाए है. इसे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के कोयंबटूर स्थित गन्ना प्रजनन संस्थान ने विकसित किया है. 27 मई को गन्ने पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना की समिति ने इसे Co-0238 के विकल्प के तौर पर चुना. अब अक्टूबर में केंद्रीय किस्म जारी समिति की बैठक में इसे रखा जाएगा, और मंजूरी मिलते ही किसान इसे अगली बुवाई में लगा सकेंगे. लाल सड़न से जूझ रहे खेतों के लिए ये सबसे बड़ी उम्मीद है.

इस सीजन में किसान क्या करें

जिस खेत में लाल सड़न के लक्षण दिखें, उसकी सूचना तुरंत गन्ना विभाग या मिल को दें. Co-0238 की नई बुवाई से बचें और बीज का उपचार जरूर करें. अगर मिलें जल्दी पेराई शुरू करती हैं तो कच्चा गन्ना भेजने की जल्दबाजी न करें. और हां, कोल्हुओं से मिल रहे भाव को भी ध्यान में रखें, लेकिन पर्ची और भुगतान की सुरक्षा मिल के साथ ही ज्यादा पक्की होती है. इस बार गन्ना कम है, इसलिए किसान की सौदेबाजी की ताकत ज्यादा है. इसका फायदा उठाएं.

मुख्य बातें

  • यूपी का चीनी उत्पादन 2019-20 के 126.4 लाख टन से घटकर 2025-26 में 89.5 लाख टन रह गया; मुख्य वजह Co-0238 किस्म में लाल सड़न रोग.
  • 2026-27 सीजन के लिए गन्ना रकबा 47,000 हेक्टेयर घटा; 11 बड़े जिलों में 1.6% की गिरावट, सिर्फ बिजनौर और लखीमपुर खीरी में बढ़त.
  • गुड़ ~90 रुपये किलो, कोल्हू तय मूल्य से ज्यादा दाम को तैयार; नई किस्म करन-20 की मंजूरी अक्टूबर में संभावित.

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस, द टाइम्स ऑफ इंडिया, चिनीमंडी (द हिंदू बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के आधार पर)

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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