29-30 अक्टूबर को भारी बारिश का अलर्ट: यूपी में पेराई अटकी तो नवंबर में चीनी पर दबाव

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिन किसानों ने 20 अक्टूबर के आसपास मिल चलने की उम्मीद बांध रखी थी, उनका इंतजार लंबा हो गया है। बारिश ने खेत गीले कर दिए, कटाई रुक गई, और मिलें भी नमी वाला गन्ना लेने से हिचक रही हैं। अब मौसम विभाग का नया अनुमान इस चिंता को और बढ़ा रहा है। 29 और 30 अक्टूबर को पूर्वी उत्तर प्रदेश में भारी बारिश की चेतावनी जारी हुई है।
इसका सीधा असर नवंबर की चीनी आपूर्ति पर पड़ेगा। देश में चीनी का स्टॉक पहले से पतला है, और नवंबर की मांग नई पेराई से ही पूरी होगी।
29-30 अक्टूबर: कहां कितनी बारिश का अनुमान
मौसम विभाग के भारत फोरकास्ट सिस्टम के अनुसार 30 अक्टूबर को पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश के कई जिलों में 20 मिलीमीटर तक बारिश हो सकती है, जबकि पूर्वी हिस्से के कुछ जिलों में 40 मिलीमीटर तक बारिश का अनुमान है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश में 29 और 30 अक्टूबर के दौरान अलग-अलग जगहों पर बहुत भारी बारिश के साथ व्यापक वर्षा की संभावना है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 29 से 31 अक्टूबर के बीच छिटपुट बारिश का अनुमान है। यानी अगले तीन दिन खेत सूखने का पूरा मौका नहीं मिलेगा।
पेराई पहले ही अटकी: 20 अक्टूबर की योजना बारिश में धुली
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कई मिलों ने 20 अक्टूबर से पेराई शुरू करने की योजना बनाई थी। बारिश के कारण यह योजना पटरी से उतर गई। किसान गन्ना काट नहीं पाए, और मिलों ने ज्यादा नमी वाला गन्ना खरीदने में दिलचस्पी नहीं दिखाई, क्योंकि नमी ज्यादा होने पर चीनी की रिकवरी घट जाती है।
प्रख्यात गन्ना प्रजनक बख्शी राम का कहना है कि भारी बारिश होने पर पेराई में देरी तय है। खासकर पूर्वी उत्तर प्रदेश के निचले इलाकों में किसानों को पानी सूखने तक कटाई रोकनी पड़ती है, और मिलें कम रिकवरी वाला गन्ना पेरना पसंद नहीं करतीं।
देश भर में अब तक 107 मिलों ने पेराई शुरू की है, जिनमें महाराष्ट्र की 87 मिलें हैं। उत्तर प्रदेश में अभी सिर्फ दो मिलों ने पेराई शुरू की है। पश्चिमी यूपी में अगले तीन-चार दिन में और मिलें चलने की उम्मीद थी, लेकिन बारिश का नया दौर इस रफ्तार को धीमा कर सकता है।
नवंबर का गणित: मांग 23 लाख टन, बचा स्टॉक सिर्फ 15 लाख टन
नवंबर में देश में चीनी की मांग करीब 23 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि अक्टूबर के अंत तक बचा स्टॉक सिर्फ 15 लाख टन के आसपास होगा। अक्टूबर के लिए सरकार ने मिलों को घरेलू बिक्री के लिए 27 लाख टन का कोटा दिया था, जो त्योहारी मांग के चलते लगभग पूरा बिक जाने की उम्मीद है।
अक्टूबर में अब तक करीब 4 लाख टन चीनी बनी है, जो पिछले साल इसी समय के 0.6 लाख टन से काफी ज्यादा है। महीने के अंत तक करीब 2 लाख टन और उत्पादन होने का अनुमान है, यानी अक्टूबर का कुल उत्पादन करीब 6 लाख टन तक पहुंच सकता है। फिर भी नवंबर की मांग नवंबर की पेराई से ही पूरी होगी।
सरकार ने दो रिफाइनरों को 2.65 लाख टन आयातित चीनी बेचने की अनुमति दी थी, लेकिन 60 हजार टन से भी कम बिक पाई, क्योंकि आयात की लागत ज्यादा थी। कीमतें अब चढ़ रही हैं, इसलिए आयातित चीनी की बिक्री कुछ बढ़ सकती है। सरकार ने 31 दिसंबर तक 10 लाख टन तक शुल्क-मुक्त कच्ची चीनी आयात की खिड़की भी बढ़ाई है।
मुजफ्फरनगर में चीनी भाव चढ़ा: किसान के लिए क्या मतलब
27 अक्टूबर को मुजफ्फरनगर में एम-ग्रेड चीनी का भाव 5,300 से 5,450 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रहा। भाव चढ़ने से मिलों की कमाई का दबाव कुछ कम होगा, लेकिन इसका फायदा किसान तक तभी पहुंचेगा जब पेराई समय पर चले और भुगतान अटके नहीं।
2026-27 सीजन के लिए गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) 365 रुपये प्रति क्विंटल तय है, जो 10.25 प्रतिशत बेसिक रिकवरी पर लागू होगा। यह किसान का कानूनी हक है, मिल इससे कम पर गन्ना नहीं खरीद सकती।
बारिश के दिनों में किसान क्या करें
पहली बात, गीले खेत में जबरन कटाई से बचें। नमी वाला गन्ना मिल लेने से हिचकेगी, और खेत में पड़ा गन्ना सूखकर वजन भी खो देता है। पानी भरे निचले खेतों में पानी निकलने का इंतजार करें।
दूसरी बात, अपनी मिल का पेराई कार्यक्रम और इंडेंट ई-गन्ना ऐप पर देखते रहें। बारिश के कारण मिलों के कार्यक्रम बदल सकते हैं, इसलिए पर्ची मिलने के बाद ही कटाई का सही समय तय होगा।
तीसरी बात, गेहूं की बुवाई का भी ध्यान रखें। पेराई में देरी का मतलब है खेत देर से खाली होगा। नवंबर में गेहूं बोने वाले किसान कटाई और बुवाई के बीच का समय पहले से तय करके रखें।
चौथी बात, भुगतान पर नजर रखें। पहली पर्चियों का भुगतान समय पर आ रहा है या नहीं, यह ई-गन्ना ऐप और समिति से जांचते रहें। देरी दिखे तो जिला गन्ना अधिकारी से शिकायत करें। गन्ना विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 और 1800-180-5129 पर भी मदद मिलती है, और एसएमएस के लिए 51969 नंबर है।
बारिश का यह दौर गुजर जाएगा, लेकिन पेराई की रफ्तार ही तय करेगी कि नवंबर में चीनी की आपूर्ति कितनी सहज रहेगी और किसानों का भुगतान कितना समय पर मिलेगा।
मुख्य बातें
- 29-30 अक्टूबर को पूर्वी यूपी में भारी बारिश का अनुमान, पश्चिमी यूपी में 29-31 अक्टूबर तक छिटपुट बारिश।
- पश्चिमी यूपी की कई मिलों की 20 अक्टूबर से शुरू होने वाली पेराई बारिश से पहले ही अटक चुकी है।
- नवंबर में चीनी की मांग करीब 23 लाख टन, जबकि अक्टूबर से बचा स्टॉक सिर्फ 15 लाख टन के आसपास।
स्रोत: The Hindu BusinessLine (27 अक्टूबर 2026), ChiniMandi (27 अक्टूबर 2026), Business Today/ISMA (26 अक्टूबर 2026)
