यूपी में पेराई सत्र शुरू: 9 मिलें चलीं, 33 ने जारी किए इंडेंट, जानें आपकी मिल कब चलेगी

तीन नवंबर को लखनऊ से जारी सरकारी बयान ने वह तस्वीर बदल दी, जिसका किसान पिछले कई दिनों से इंतजार कर रहे थे। उत्तर प्रदेश में पेराई सत्र 2026-27 विधिवत शुरू हो गया है। गन्ना विकास विभाग के मुताबिक प्रदेश की 9 चीनी मिलों में गन्ने की पेराई चल रही है, और 33 मिलों ने गन्ना खरीद के लिए इंडेंट जारी कर दिए हैं।
कहां-कहां चल पड़ीं मिलें
पेराई शुरू करने वाली 9 मिलों में एक सहकारी क्षेत्र की मिल है और 8 निजी क्षेत्र की मिलें हैं। परिक्षेत्र के हिसाब से देखें तो सहारनपुर परिक्षेत्र की 3, मेरठ परिक्षेत्र की एक, मुरादाबाद परिक्षेत्र की 2 और लखनऊ परिक्षेत्र की 3 मिलों ने पेराई शुरू कर दी है।
शुरुआत सिर्फ पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रही, लखनऊ परिक्षेत्र की 3 मिलों का चलना मध्य उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए भी राहत है। कुछ दिन पहले तक हालत अलग थी। उद्योग संगठन की 31 अक्टूबर तक की रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश में सिर्फ 3 मिलों के चलने की बात सामने आई थी। 3 नवंबर के बयान के बाद यह संख्या 9 तक पहुंच गई है।
इंडेंट का मतलब किसान के लिए क्या है
इंडेंट शब्द सुनकर कई किसान उलझन में पड़ जाते हैं। सीधी भाषा में कहें तो इंडेंट मिल की ओर से गन्ना खरीद का आदेश है। जब कोई मिल इंडेंट जारी करती है, तो वह अपने आवंटित क्रय केंद्रों से गन्ना मंगाने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर देती है।
33 मिलों के इंडेंट जारी करने का मतलब यह है कि इन मिलों के क्रय केंद्रों पर गन्ना लाने का रास्ता खुल गया है। विभाग ने यह भी बताया है कि 24 मिलों में दीपावली से पहले पेराई शुरू होने का प्रस्ताव है। बाकी मिलें दीपावली के त्योहार के बाद अपना सत्र शुरू करेंगी।
इंडेंट जारी होना और मिल का चल पड़ना एक ही बात नहीं है। इंडेंट तैयारी का चरण है, पेराई उसका अगला चरण। इसलिए अपने केंद्र पर पूछताछ करते रहें और पर्ची की सूचना पर नजर रखें।
केंद्रों पर व्यवस्था के निर्देश
विभाग ने सभी मिलों को निर्देश दिया है कि वे अपने आवंटित क्रय केंद्रों पर तौल, पर्ची और गन्ना उतारने की व्यवस्था जल्द पूरी करें और समय से संचालन सुनिश्चित करें।
किसान के नजरिए से यह निर्देश सबसे ज्यादा मायने रखता है। केंद्र पर अव्यवस्था रही तो ट्रॉली घंटों खड़ी रहती है, गन्ना सूखता है और वजन घटने का नुकसान सीधे किसान को होता है। इसलिए केंद्र पर पहुंचने से पहले तौल और पर्ची की बारी की स्थिति जान लेना फायदेमंद रहेगा।
पेराई समय से शुरू होने का फायदा खेत से भी जुड़ा है। गन्ना कटने के बाद खेत खाली होता है, तभी गेहूं की समय से बुवाई हो पाती है। देर हुई तो गेहूं की बुवाई पीछे खिसक जाती है, और पेड़ी वाले खेतों में यह हिसाब और भी जरूरी हो जाता है।
भाव का सवाल: 2026-27 SAP की घोषणा अभी बाकी है
पेराई शुरू हो गई है, पर एक सवाल अब भी खुला हुआ है। पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ने के राज्य परामर्शित मूल्य, यानी SAP, की घोषणा अभी बाकी है। खबरों के मुताबिक सरकार इस सत्र के लिए SAP में 10 से 20 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी पर विचार कर रही है, लेकिन इस पर अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है।
पुराने भाव को नए सत्र का भाव समझने की गलती न करें। पेराई सत्र 2025-26 के लिए अगेती का SAP 400 रुपये और सामान्य का SAP 390 रुपये प्रति क्विंटल था। नए सत्र की पर्ची पर अंतिम भाव वही होगा जो सरकार घोषित करेगी।
किसान संगठन लागत बढ़ने का हवाला देते हुए 450 से 500 रुपये प्रति क्विंटल तक की मांग कर चुके हैं, जबकि मिल मालिकों का कहना है कि पिछले साल ही बड़ी बढ़ोतरी हो चुकी है। जब तक घोषणा नहीं होती, किसी भी बढ़ोतरी की खबर को पक्का भाव मानकर हिसाब नहीं लगाना चाहिए।
किसान अब क्या करें
जिन मिलों में पेराई शुरू हो गई है, वहां के किसान क्रय केंद्र से पर्ची और तौल की ताजा स्थिति पूछ लें, और सट्टा व समिति से जुड़ा कागज पहले से दुरुस्त रखें ताकि केंद्र पर ट्रॉली न अटके।
जिन मिलों ने इंडेंट जारी किया है पर पेराई अभी शुरू नहीं हुई है, वहां कटाई की योजना अभी से बना लें, ताकि मिल चलते ही आपूर्ति में देर न हो। और जिन इलाकों की मिलें दीपावली के बाद चलेंगी, वहां कोल्हू पर गन्ना बेचने की जल्दबाजी से बचें, क्योंकि पिछले दिनों कोल्हू पर भाव घटने की खबरें आई थीं।
उत्तर प्रदेश में कुल 122 चीनी मिलें हैं। इनमें से 9 का चल पड़ना और 33 का इंडेंट जारी करना सत्र की शुरुआत का संकेत है, पूरा सत्र नहीं। किसान के लिए सबसे काम की खबर यही रहेगी कि उसकी अपनी मिल किस दिन से गन्ना लेने लगेगी।
मुख्य बातें
- पेराई सत्र 2026-27 शुरू: प्रदेश की 9 चीनी मिलों में पेराई चल रही है, जिनमें एक सहकारी और 8 निजी क्षेत्र की मिलें हैं।
- 33 मिलों ने गन्ना खरीद के इंडेंट जारी किए हैं; 24 मिलों में दीपावली से पहले और बाकी में त्योहार के बाद पेराई शुरू होने का प्रस्ताव है।
- 2026-27 SAP की घोषणा अभी बाकी है; 2025-26 का SAP अगेती के लिए 400 रुपये और सामान्य के लिए 390 रुपये प्रति क्विंटल था।
स्रोत: आईबीसी24 (भाषा), 3 नवंबर 2026; गांव जंक्शन, 3 नवंबर 2026; दैनिक संवाद, 3 नवंबर 2026।
