तौल-रिकवरी विवाद पर दिल्ली में बड़ा फैसला: 1 हफ्ते में समिति, चीनी 31 से 50 रुपए की मांग

सोमवार की देर शाम नई दिल्ली के पूसा परिसर में दो केंद्रीय मंत्रियों के सामने करीब 90 किसान बैठे थे। तीन घंटे की बहस के बाद रात को ऐलान आया: चीनी मिलों के रिकवरी आंकड़ों, तौल में कटौती और भुगतान के विवादों को हमेशा के लिए सुलझाने के लिए केंद्र एक हफ्ते के अंदर उच्चस्तरीय समिति बनाएगा। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने खुद किसानों के प्रतिनिधिमंडल से यह वादा किया।
यह खबर महाराष्ट्र और कर्नाटक के किसानों के लिए आई है। लेकिन अगर आप यूपी में गन्ना बोते हैं तो इसे हल्के में मत लीजिए। यूपी की चीनी मिलों में भी तौल और रिकवरी की शिकायतें हर साल आती हैं। समिति जो मानक बनाएगी, वह पूरे देश पर लागू होगा।
तीन घंटे की बैठक में तीन पुराने दर्द उठे
भाषा (पीटीआई, 12 अक्टूबर 2026) के मुताबिक बैठक में किसानों ने मिलों पर तीन सीधे आरोप दोहराए। पहला: मिलें जो रिकवरी दर बताती हैं और असल रिकवरी में फर्क होता है, और इसका नुकसान किसान के भुगतान में होता है। दूसरा: तौल के समय वजन में कटौती। तीसरा: प्रयोगशाला जांच की प्रक्रिया पर भरोसे की कमी।
चौहान ने इन आरोपों को बेहद संवेदनशील मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि रिकवरी दर में विसंगतियां, वजन में कटौती और असल रिकवरी के आंकड़े छिपाना बर्दाश्त नहीं होगा। उनका बयान साफ था: अन्नदाता किसानों का किसी भी परिस्थिति में शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बैठक में कर्नाटक के मंत्री लक्ष्मण सावदी, नरेंद्र स्वामी और रुद्रप्पा मनप्पा लमानी के साथ पूर्व सांसद राजू शेट्टी समेत किसान नेता और अधिकारी भी दिल्ली आए थे।
समिति में कौन-कौन होगा और क्या जांचेगी
सरकारी बयान के मुताबिक यह संयुक्त समिति पांच पक्षों को जोड़ेगी: केंद्र सरकार, कर्नाटक और महाराष्ट्र की राज्य सरकारें, किसान संगठन, चीनी मिलें और वैज्ञानिक व विषय विशेषज्ञ। मतलब किसान के आरोप पर फैसला अब मिल और अफसर अकेले नहीं करेंगे, वैज्ञानिक भी टेबल पर होंगे।
समिति चार तकनीकी चीजों की जांच करेगी: गन्ने की कटाई के तकनीकी पहलू, रिकवरी मापने के वैज्ञानिक मानक, प्रयोगशाला परीक्षण की प्रणालियां और तौल व्यवस्था की सटीकता। किसान का गन्ना कितनी चीनी देगा, यह नापने का पैमाना अब वैज्ञानिक होगा। दोनों मंत्रियों ने कहा कि सरकार का मकसद विवादों का अस्थायी हल नहीं, बल्कि पारदर्शी व्यवस्था खड़ी करना है ताकि भविष्य में कोई मिल किसानों के अधिकारों का उल्लंघन न कर सके।
पांच मांगें जिन पर समिति को फैसला देना है
बैठक में किसानों ने जो मांगें रखीं, समिति इन्हीं पर सुझाव देगी।
एफआरपी में बढ़ोतरी: खेती की लागत बढ़ने का हवाला देकर किसानों ने केंद्र का उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) बढ़ाने की मांग की। जोशी ने एफआरपी तय करने की वैज्ञानिक प्रक्रिया और लागत-आकलन के तरीके भी बैठक में समझाए।
चीनी का एमएसपी 31 से 50 रुपए: चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य को 31 रुपए से बढ़ाकर 50 रुपए प्रति किलो करने की मांग। 1 अक्टूबर से 2026-27 का चीनी सत्र शुरू हो चुका है और मिलों ने पेराई शुरू कर दी है। चीनी का भाव बढ़ा तो मिलों की कमाई बढ़ेगी और बकाया भुगतान में राहत मिलेगी।
रिकवरी और तौल की पारदर्शिता: समिति सीधे इस आरोप की जांच करेगी कि क्या कुछ मिलें असल रिकवरी कम दिखाकर भुगतान में कटौती करती हैं। तौल व्यवस्था की सटीकता और लैब टेस्टिंग की विश्वसनीयता की भी जांच होगी। यही मुद्दा यूपी के क्रय केंद्रों पर भी हर साल उठता है।
बर्बादी, फसल बीमा और एथेनॉल: कटाई-ढुलाई में बर्बादी, फसल बीमा और एथेनॉल के दाम पर भी चर्चा हुई। जोशी ने एमएसपी और एफआरपी के बीच का अंतर समझाया और राज्य द्वारा तय कीमत (एसएपी) पर भी बात हुई।
यूपी के किसान के लिए इसका मतलब
यह फैसला भले कर्नाटक-महाराष्ट्र के नाम पर हुआ हो, इसके तीन असर यूपी पर सीधे पड़ेंगे।
एफआरपी बढ़ा तो यूपी पर भी दबाव: यूपी में किसान को एसएपी मिलता है जो केंद्र के एफआरपी के ऊपर राज्य तय करता है। 2025-26 में एसएपी अगेती किस्म के लिए 400 रुपए और सामान्य के लिए 390 रुपए प्रति क्विंटल रहा था। 2026-27 के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। केंद्र ने एफआरपी बढ़ाया तो यूपी में एसएपी बढ़ाने की मांग तेज होगी।
चीनी का एमएसपी बढ़ा तो बकाया घटेगा: चीनी का एमएसपी बढ़ा तो यूपी की 122 चीनी मिलों की कमाई बढ़ेगी, जिनमें कई पर करोड़ों का बकाया है। मिलों की सेहत सुधरी तो 14 दिन में भुगतान का नियम लागू कराना आसान होगा।
तौल के राष्ट्रीय मानक: समिति अगर तौल और लैब टेस्टिंग के राष्ट्रीय मानक सुझाती है तो यूपी के क्रय केंद्रों पर वजन कटौती की पुरानी शिकायत से राहत मिलेगी।
एक बात साफ रहे: अभी गन्ने का भाव नहीं बढ़ा है। बैठक में मांगें रखी गई हैं, समिति सिफारिश करेगी और फिर केंद्र फैसला लेगा।
अगर आपकी भी तौल, रिकवरी या बकाया की शिकायत है तो यूपी गन्ना विभाग की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 पर शिकायत दर्ज कराएं। एसएमएस सेवा के लिए 51969 नंबर उपलब्ध है।
मुख्य बातें
- 12 अक्टूबर को दिल्ली में 3 घंटे की बैठक के बाद केंद्र ने 1 हफ्ते में उच्चस्तरीय समिति बनाने का ऐलान किया।
- समिति रिकवरी, तौल, लैब जांच और भुगतान विवादों की वैज्ञानिक जांच करेगी; इसमें केंद्र, राज्य, किसान संगठन, मिलें और विशेषज्ञ होंगे।
- चीनी का एमएसपी 31 से 50 रुपए करने और एफआरपी बढ़ाने की मांग समिति के सामने; अभी भाव नहीं बढ़ा है।
स्रोत: द प्रिंट हिंदी (भाषा/पीटीआई, 12 अक्टूबर 2026); भास्कर हिंदी (आईएएनएस, 12 अक्टूबर 2026)
