₹603 करोड़ का तोहफा: तमिलनाडु में गन्ना ₹4000/टन, यूपी में ₹600 की मांग तेज

क्या कोई राज्य सरकार अपने खजाने से गन्ने का भाव बढ़ा सकती है? तमिलनाडु ने इसका जवाब दे दिया है। 8 अक्टूबर 2026 को राज्य सरकार ने 2025-26 पेराई सत्र के दौरान चीनी मिलों को गन्ना देने वाले करीब 90,000 किसानों के लिए ₹603.34 करोड़ के विशेष प्रोत्साहन को मंजूरी दे दी। यह फैसला मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के निर्देश पर राज्य के खजाने से लागू किया गया, जिसकी घोषणा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से की गई।
प्रोत्साहन की रकम किसानों के आधार-लिंक्ड बैंक खातों में सीधे भेजी जाएगी। सरकारी आदेश के मुताबिक दीपावली के आसपास भुगतान शुरू करने की व्यवस्था बनाई गई है, यानी त्योहार से पहले किसानों के खातों में अतिरिक्त राशि पहुंचाने की तैयारी है।
₹709.50 प्रति टन अतिरिक्त: पूरा हिसाब समझिए
केंद्र सरकार ने 2025-26 सत्र के लिए गन्ने का न्यूनतम मूल्य (FRP) ₹3,290.50 प्रति टन तय किया था। यह दर 9.5 प्रतिशत चीनी रिकवरी वाले गन्ने पर लागू होती है। तमिलनाडु सरकार ने इसके ऊपर ₹709.50 प्रति टन का विशेष प्रोत्साहन जोड़ दिया। दोनों को मिलाकर 9.5 प्रतिशत रिकवरी वाले गन्ने का प्रभावी मूल्य ₹4,000 प्रति टन हो गया।
रिकवरी से मतलब है गन्ने में चीनी की मात्रा। जिन किसानों के गन्ने की रिकवरी 9.5 प्रतिशत से ऊपर रही, उन्हें तय सूत्र के हिसाब से ₹4,000 से भी ज्यादा प्रति टन मिलेगा। यानी खेत का गन्ना जितना मीठा, यानी चीनी जितनी ज्यादा, कीमत उतनी ऊंची। कम रिकवरी वाले गन्ने पर भुगतान कम होता है, यही हर राज्य का नियम है।
कौन पाएगा यह पैसा, कैसे मिलेगा
यह प्रोत्साहन उन्हीं किसानों को मिलेगा जिन्होंने 2025-26 पेराई सत्र (1 अक्टूबर 2025 से 30 सितंबर 2026) के दौरान गन्ना चीनी मिलों को दिया था। उस सत्र में तमिलनाडु की 29 चीनी मिलों ने पेराई की थी, जिनमें 12 सहकारी मिलें, 2 सार्वजनिक क्षेत्र की मिलें और 15 निजी मिलें शामिल थीं।
सरकार ने किसानों का ब्योरा पहले ही जुटा लिया है: किसने कितना गन्ना दिया, आधार नंबर और बैंक खाते की जानकारी। पात्रता जिला कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समितियों की सिफारिश और गन्ना निदेशालय की जांच के बाद तय होगी। सरकार का कहना है कि यह फैसला किसानों की लंबे समय से चली आ रही ज्यादा मूल्य की मांग पर लिया गया है।
यूपी से जुड़ा बड़ा सवाल: हमारा भाव कब
तमिलनाडु का यह मॉडल यूपी के गन्ना किसानों के बीच खास चर्चा का विषय बन गया है। राज्य ने केंद्र के FRP के ऊपर अपने खजाने से ₹709.50 प्रति टन डाला और कुल मूल्य ₹4,000 प्रति टन तक पहुंचा दिया। उधर उत्तर प्रदेश में किसान संगठन 2026-27 सत्र के लिए ₹600 प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य की मांग कर रहे हैं। गणित बिल्कुल सीधा है: ₹600 प्रति क्विंटल यानी ₹6,000 प्रति टन।
7 अक्टूबर को लखनऊ स्थित गन्ना आयुक्त कार्यालय में 2026-27 के गन्ना मूल्य निर्धारण पर उपसमिति की बैठक हुई। इसमें बलरामपुर सहकारी गन्ना विकास समिति के अध्यक्ष प्रतिनिधि रणवीर सिंह रन्नू ने किसानों की ओर से ₹600 प्रति क्विंटल की मांग प्रमुखता से रखी। उन्होंने बढ़ती कृषि लागत और किसानों की मेहनत का हवाला देते हुए उचित और लाभकारी मूल्य तय करने पर जोर दिया। बैठक में गन्ना विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और चीनी मिल प्रतिनिधियों के साथ मूल्य पर चर्चा और विचार-विमर्श हुआ।
अमरोहा में भारतीय किसान यूनियन की महापंचायत में भी ₹600 प्रति क्विंटल की मांग उठी थी, और किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि पेराई सत्र शुरू होने से पहले भाव घोषित न हुआ तो आंदोलन तेज होगा।
एक बात साफ रहे: तुलना को समझिए
यहां एक ईमानदार तुलना जरूरी है। तमिलनाडु का ₹4,000 प्रति टन, यूपी के मौजूदा SAP से ज्यादा नहीं है। 2025-26 में यूपी का SAP अगेती किस्म के लिए ₹400 प्रति क्विंटल था, यानी वही ₹4,000 प्रति टन। फर्क सिर्फ इतना है कि तमिलनाडु में केंद्र के FRP (₹3,290.50) के ऊपर राज्य ने खुद खजाने से ₹709.50 प्रति टन डालकर अंतर पाटा और पैसा सीधे किसानों के खातों में जाएगा।
यूपी के किसानों के लिए असल मुद्दा यही है: 2026-27 के SAP की घोषणा का इंतजार है। किसान संगठन ₹600 प्रति क्विंटल मांग रहे हैं, और तमिलनाडु जैसा मॉडल उनके लिए एक मजबूत तर्क बन गया है कि राज्य सरकार चाहे तो केंद्र के भाव के ऊपर अपने खजाने से अतिरिक्त भुगतान कर सकती है। पेराई सत्र सिर पर है, और भाव की घोषणा जितनी देर से होगी, किसानों की बेचैनी उतनी बढ़ेगी।
मुख्य बातें
- तमिलनाडु सरकार ने 2025-26 पेराई सत्र के गन्ना किसानों के लिए ₹603.34 करोड़ का विशेष प्रोत्साहन मंजूर किया; FRP ₹3,290.50 + राज्य का ₹709.50 = प्रभावी मूल्य ₹4,000 प्रति टन (9.5% रिकवरी पर)।
- करीब 90,000 किसानों को आधार-लिंक्ड बैंक खातों में सीधे भुगतान मिलेगा, दीपावली के आसपास वितरण शुरू होने की व्यवस्था; पात्रता की जांच जिला कलेक्टर समितियों और गन्ना निदेशालय से होगी।
- यूपी में 2026-27 के लिए ₹600/क्विंटल SAP की मांग तेज है; 7 अक्टूबर को लखनऊ की उपसमिति बैठक में औपचारिक मांग रखी गई, जबकि SAP घोषणा का अभी इंतजार है (2025-26 में SAP अगेती ₹400/क्विंटल था)।
स्रोत: DT Next (8 अक्टूबर 2026), News Today (8 अक्टूबर 2026), IANS (Punjab Kesari, 8 अक्टूबर 2026), The Hindu BusinessLine (8 अक्टूबर 2026); यूपी SAP मांग: Hindustan/LiveHindustan और ChiniMandi (अक्टूबर 2026)।
