सिंभावली के केंद्र दूसरी मिलों को मिले, 7,000 किसानों को समय पर भुगतान की उम्मीद

हापुड़ के सिंभावली क्षेत्र के किसान का गन्ना इस बार किस मिल में जाएगा, यह सवाल अब धीरे-धीरे सुलझ रहा है। गन्ना विभाग ने सिंभावली और ब्रजनाथपुर चीनी मिल से 184 गन्ना क्रय केंद्र हटाकर दूसरी मिलों को दे दिए हैं। दैनिक जागरण की 30 अक्टूबर की खबर के अनुसार इस फैसले के बाद किसानों में समय पर भुगतान की उम्मीद जगी है, क्योंकि नई मिलों से पैसा अटकने का डर कम है।
184 केंद्र क्यों हटाए गए
कहानी बकाया भुगतान से जुड़ी है। अमर उजाला की 25 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार सिंभावली और ब्रजनाथपुर मिल पर किसानों का करीब 160 करोड़ रुपये का गन्ना भुगतान बकाया है। भुगतान में लगातार देरी और नोटिस के बाद भी रकम न मिलने पर गन्ना आयुक्त के आदेश से दोनों मिलों के 184 केंद्र हटा दिए गए। विभागीय जानकारी के हवाले से एक अन्य रिपोर्ट में सिंभावली मिल पर अकेले करीब 109 करोड़ रुपये बकाया होने का दावा किया गया है।
हटाए गए केंद्र मेरठ, गाजियाबाद और बुलंदशहर की मिलों को दिए गए हैं। अमर उजाला के अनुसार इनमें नंगलामल, चंदनपुर, साबितगढ़, मवाना, असमौली, चौंगीपुर, अनामिका, वीनस, अगवानपुर, टिकौला और दौराला मिल शामिल हैं।
बचे केंद्रों पर अब भी 7,000 किसान
केंद्र बदलने का काम पूरा नहीं हुआ है। जागरण की 30 अक्टूबर की खबर के अनुसार सिंभावली मिल पर गेट द्वार के साथ गंदूनंगला/नगलाबढ़, दत्तियाना, दरियापुर/कुराना, ढाना, खैय्या और माधापुर प्रथम केंद्र बचे हैं। इन केंद्रों से 7,848 हेक्टेयर रकबा और 66.47 लाख क्विंटल गन्ना उत्पादन जुड़ा है, और करीब सात हजार किसान अब भी इसी मिल से बंधे हैं।
मिल की हालत ही इस देरी की वजह बनी हुई है। खबर के अनुसार गन्ना कम रह जाने से मिल की पेराई क्षमता के लिहाज से आधी स्थिति रह गई है, और इसी वजह से प्रबंधन मिल चलाने का फैसला नहीं ले पा रहा है।
शेष केंद्रों के लिए लखनऊ तक पहुंची मांग
बचे केंद्रों को भी दूसरी मिलों को देने की मांग अब लखनऊ तक पहुंच गई है। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के जिलाध्यक्ष पवन हूण के नेतृत्व में किसानों का प्रतिनिधिमंडल गन्ना प्रमुख सचिव से मिला और ज्ञापन सौंपा। अमर उजाला की 26 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार दस गांवों के किसानों ने गन्ना समिति के सचिव को केंद्र बदलने के प्रस्ताव भी दिए थे।
इस रास्ते में एक नियम आड़े आ रहा है। विभाग के अनुसार जो गांव सिंभावली और ब्रजनाथपुर मिल से जुड़े रह गए हैं, वे मिलों के साढ़े सात किलोमीटर के दायरे में आते हैं, इसलिए उनके पहले के प्रस्ताव रद्द हो गए थे। किसान नेताओं का कहना है कि दायरे का नियम किसान की मजबूरी से बड़ा नहीं होना चाहिए, क्योंकि भुगतान न मिलने पर खेती ही ठप पड़ जाती है।
किसान नेता क्या कह रहे हैं
पवन हूण ने कहा कि भुगतान समय पर नहीं मिलने से किसानों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है, इसलिए शेष केंद्रों को समय पर भुगतान करने वाली मिलों को देने की मांग उठाई गई है। भाकियू नेता अमित प्रधान ने गन्ना विभाग के फैसले को सराहनीय बताया, साथ ही कहा कि गेट द्वार और बाकी बचे केंद्रों के बारे में भी विचार करने की जरूरत है।
गन्ना समिति के सचिव राकेश पटेल के अनुसार विभाग ने पिछले वर्षों में ही 154 क्रय केंद्र दूसरी मिलों को आवंटित कर दिए हैं, और किसानों की बाकी मांगों पर भी विचार किया जा रहा है। समिति का कहना है कि वह केवल किसान हित में काम करेगी।
एक जमाने की नामी मिल, अब बंदी की कगार पर
सिंभावली का यह हाल एक दिन में नहीं हुआ। जागरण के अनुसार साल 2012-13 से पहले यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जानी-मानी गन्ना फैक्ट्री थी, जो अब बंद होने की कगार पर खड़ी है। पुराने बकाए, कर्ज के विवाद और घटते गन्ने ने मिल को इस मोड़ पर पहुंचा दिया। इसी पृष्ठभूमि में केंद्र बदलने का फैसला किसानों के लिए राहत की तरह देखा जा रहा है, भले ही यह राहत अभी आधी-अधूरी हो।
किसान के लिए इसका मतलब क्या है
जिन किसानों का केंद्र बदला है, वे सबसे पहले अपनी समिति या ई-गन्ना ऐप पर नई मिल और नए केंद्र की पुष्टि कर लें। पर्ची अब नई मिल से आएगी। पर्ची मिलने के बाद ही साफ-सुथरा गन्ना तौल केंद्र पर ले जाएं, ताकि तौल में कटौती की नौबत न आए।
भुगतान का नियम पहले जैसा ही है। नियमानुसार मिल को 14 दिनों के भीतर भुगतान करना होता है। नई मिल से भी भुगतान अटके तो जिला गन्ना अधिकारी से शिकायत करें। गन्ना विकास विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 और 1800-180-5129 पर भी मदद मिलती है, और एसएमएस के लिए 51969 नंबर है।
सिंभावली के बचे केंद्रों वाले किसानों के लिए अगली नजर गन्ना प्रमुख सचिव के फैसले पर रहेगी। शेष केंद्र भी दूसरी मिलों को मिलते हैं या नहीं, यही इस सत्र में इन सात हजार किसानों के भुगतान की दिशा तय करेगा।
मुख्य बातें
- सिंभावली और ब्रजनाथपुर मिल से 184 गन्ना क्रय केंद्र हटाकर मेरठ, गाजियाबाद और बुलंदशहर की मिलों को दिए गए हैं।
- सिंभावली के बचे केंद्रों से 7,848 हेक्टेयर रकबा, 66.47 लाख क्विंटल गन्ना और करीब 7,000 किसान जुड़े हैं।
- किसान संगठनों ने शेष केंद्र भी समय पर भुगतान करने वाली मिलों को देने की मांग के साथ गन्ना प्रमुख सचिव को ज्ञापन सौंपा है।
स्रोत: दैनिक जागरण (30 अक्टूबर 2026), अमर उजाला (25-26 अक्टूबर 2026), रॉयल बुलेटिन (22 अक्टूबर 2026)
