बिना कर्ज लिए 20 हजार किसान दिवालिया की कगार पर, सिंभावली का 148 करोड़ वाला सच

हापुड़ के एक किसान को बैंक से नोटिस मिला कि वह कर्जदार है, जबकि उसने कभी कर्ज लिया ही नहीं था। यह कहानी एक किसान की नहीं है। दैनिक जागरण की 27 अक्टूबर 2026 की खबर के मुताबिक, सिंभावली शुगर मिल से जुड़े 20 हजार से ज्यादा किसान आज इसी स्थिति में खड़े हैं। आरोपों के अनुसार, उन पर ऐसा कर्ज लदा है जो उन्होंने कभी लिया ही नहीं, और ब्याज सहित यह रकम अब 300 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है।
मामला पुराना है, लेकिन किसानों की परेशानी आज भी ताजा है। सीबीआई जांच और हाईकोर्ट में सुनवाई के बाद भी अंतिम फैसला नहीं आया है, और किसान न नया कर्ज ले पा रहे हैं, न फर्द विवाद सुलझा पा रहे हैं।
सस्ते उर्वरक के नाम पर लिए गए कागज
जागरण के अनुसार, 2011 से 2015 के बीच मिल ने 5,762 किसानों के भूमि-जोत और गन्ना आपूर्ति के कागजात बैंक को दिए। किसानों का कहना है कि ये कागजात उनसे सस्ता उर्वरक देने के नाम पर लिए गए थे। उन्हीं कागजातों के आधार पर 148.59 करोड़ रुपये का कर्ज निकाला गया।
यही आंकड़ा सीबीआई एफआईआर की रिपोर्टों में भी दर्ज है। ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स की हापुड़ शाखा ने 2011 में यह कर्ज स्वीकृत किया था। यह पैसा 25 जनवरी से 13 मार्च 2012 के बीच गन्ना आपूर्ति करने वाले 5,762 किसानों के लिए था। पैसा एस्क्रो खाते से किसानों के खातों में जाना था। आरोप है कि कंपनी ने इसे अपने कामों में लगा लिया।
इसका पता 2016 में चला, जब बैंक के बकाया नोटिस घर पहुंचे। किसानों ने कहा कि उन्होंने कोई कर्ज लिया ही नहीं है। बैंक से बात नहीं बनी, तो शिकायत ऊपर पहुंची और जांच में सामने आया कि नोटिस पाने वाले सभी एक ही बैंक के खाताधारक थे।
सीबीआई जांच में क्या सामने आया
शिकायत के बाद धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज हुई और मामला सीबीआई को सौंपा गया। सीबीआई ने 2018 में केस दर्ज किया और दिल्ली, हापुड़ व नोएडा में आठ ठिकानों पर छापे मारे। जांच में सामने आया कि यह पैसा किसानों ने नहीं लिया था। बैंक ने 31 मार्च 2015 को खाता एनपीए किया और 13 मई 2015 को 97.85 करोड़ की धोखाधड़ी आरबीआई को बताई। बैंक को हुआ कुल नुकसान 109.08 करोड़ रुपये बताया गया।
इसके बावजूद किसानों के नाम पर दर्ज देनदारी का विवाद खत्म नहीं हुआ। जागरण के अनुसार, यह मामला अब हाईकोर्ट में विचाराधीन है और अभी तक इस पर कोई निर्णय नहीं हो सका है। ये बातें आरोपों और जांच रिपोर्टों पर आधारित हैं; अदालत का फैसला अभी बाकी है।
5,762 से 20 हजार तक कैसे पहुंची संख्या
कागजात 5,762 किसानों के थे, फिर प्रभावित 20 हजार से ज्यादा कैसे हुए? जागरण के अनुसार, पीढ़ी बदल गई। पंद्रह साल में पिता की जगह बेटे ने खेती संभाली, परिवार बंटे, खातेदार बढ़े। ब्याज के साथ रकम बढ़ी और परिवारों की संख्या भी। जागरण से बातचीत में किसान सुरेंद्र शर्मा ने कहा, “हम 15 साल से उस कर्ज के नीचे दबे हैं, जो कभी हमने लिया ही नहीं था।”
आज किसान पर क्या बीत रही है
सबसे बड़ी मार यह है कि बैंक इन्हें कोई और ऋण नहीं दे रहा है; व्यावहारिक रूप से इन्हें बकाएदार मान लिया गया है। जागरण के अनुसार, किसानों की आरसी अभी जारी नहीं हुई है, यानी औपचारिक वसूली शुरू नहीं हुई है। डर यह है कि मिल बंद हुआ या बिका, तो देनदारी किसानों पर आ सकती है।
मिल महाप्रबंधक करन सिंह के अनुसार, मामला आईआरपी स्तर पर देखा जा रहा है और मिल ने कर्ज अपने ऊपर ले लिया है। जिला गन्ना अधिकारी अंगद सिंह ने कहा है कि गन्ना बकाया और फर्द विवाद सुलझने तक वह आईआरपी से वार्ता नहीं करेंगे।
हापुड़ में मिल की हालत पहले से खराब
अमर उजाला की 25 और 26 अक्टूबर की खबरों के अनुसार, गन्ना आयुक्त के आदेश पर सिंभावली और ब्रजनाथपुर मिल से 184 गन्ना खरीद केंद्र हटा दिए गए हैं। ये केंद्र मेरठ, गाजियाबाद और बुलंदशहर की दूसरी मिलों को दे दिए गए हैं। अब सिंभावली से सिर्फ छह और ब्रजनाथपुर से सिर्फ चार गांव जुड़े रह गए हैं। इन दोनों मिलों पर किसानों का करीब 160 करोड़ रुपये का गन्ना भुगतान भी बकाया बताया गया है। यानी हापुड़ के किसान दो मोर्चों पर लड़ रहे हैं।
किसान अब क्या करें
इस मामले में घबराहट से ज्यादा काम सावधानी का है। अपने कागजात संभालकर रखें: फर्द, बैंक पासबुक, पुराने नोटिस और शिकायतों की प्रतियां एक फाइल में। नया नोटिस आए तो बिना लिखित जानकारी के रकम जमा न करें; पूछें कि देनदारी किस खाते और अवधि की है। गन्ना समिति और जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय से संपर्क रखें, शिकायत लिखित में दें और पावती लें।
सिंभावली के किसानों की लड़ाई अब सिर्फ पैसों की नहीं रही। सवाल यह है कि उर्वरक के लिए दिए गए कागज कर्ज का बोझ कैसे बन गए। जवाब अदालत से आएगा, तब तक किसानों को अपना रिकॉर्ड, एकता और आवाज बचाकर रखनी होगी।
मुख्य बातें
- 5,762 किसानों के कागजात पर 148.59 करोड़ के कर्ज का आरोप है, जो अब 300 करोड़ से ज्यादा है।
- सीबीआई जांच में पैसा किसानों का न होना सामने आया, पर मामला हाईकोर्ट में लंबित है।
- पीढ़ी बदलने से प्रभावित किसान 20 हजार से ज्यादा हुए; बैंक नया ऋण नहीं दे रहा है।
स्रोत: दैनिक जागरण (27 अक्टूबर 2026), सीबीआई एफआईआर रिपोर्टें (बिजनेस स्टैंडर्ड, टाइम्स नाउ, मनीलाइफ), अमर उजाला (25-26 अक्टूबर 2026)
