अक्टूबर में गन्ना बुआई? इन 6 बातों से पेड़ी नहीं टूटेगी, उपज भी बढ़ेगी

धान अभी खेत में खड़ा है, कटाई में हफ्ता-दो हफ्ता लगेगा, और मन में वही पुराना हिसाब चल रहा है। अक्टूबर में गन्ना बोना है, पर कब? कौन सी प्रजाति लें? बीज कितना लगेगा और खाद कब डालें? शरदकालीन बुआई का फायदा यह है कि फसल को पूरे साल की धूप और ठंड दोनों मिलती है, पेड़ी भी मजबूत रहती है। लेकिन फायदा तभी, जब शुरुआती 60 दिन की तैयारी सही हो। बुआई के समय की छोटी-छोटी गलतियां बाद में टनों में उतरती हैं।
बुआई का सही समय मत चूको
अक्टूबर की बुआई के लिए सितंबर का दूसरा पक्ष और अक्टूबर का पहला पक्ष सबसे ठीक माना जाता है। इस साल के कृषि वैज्ञानिकों के सुझाव के अनुसार 20 अक्टूबर के बाद भी शरदकालीन गन्ने की रोपाई की जा सकती है। देर से बोने वालों को एक नुकसान याद रखना चाहिए। जितनी देर होगी, फसल को ठंड से पहले तैयारी का उतना ही कम समय मिलेगा, और अंकुरण धीमा पड़ जाएगा। कोशिश करें कि 10 अक्टूबर से पहले बुआई निपट जाए। खेत में उस दिन नमी अच्छी होनी चाहिए। सूखे खेत में गन्ना दबाया तो अंकुरण में फर्क पड़ेगा।
प्रजाति का चुनाव इस साल सोचकर करो
पीलीभीत के जिला गन्ना अधिकारी ने इस बार रोग-रोधी और अगेती प्रजातियों पर जोर दिया है। इस साल कुछ प्रजातियों में रेड रॉट और विल्ट की शिकायत आई है, खासकर को.0238 के कुछ खेतों में। जहां लक्षण दिखे हों, उस खेत का गन्ना बीज में बिल्कुल मत लो। शरदकालीन बुआई के लिए इस समय को.0118, कोलख 14201, को.16202, कोशा 18231, कोलख 94184 और कोशा 13235 जैसी प्रजातियां बेहतर बताई जा रही हैं। कोलख 14201 करीब 10-11 महीने में तैयार हो जाती है और इसमें चीनी का परता 10.5 से 11.5 तक मिलता है। बीज हमेशा स्वस्थ बीज नर्सरी प्लॉट से लो। अपने सर्किल के गन्ना पर्यवेक्षक से संपर्क करके नजदीकी बीज नर्सरी का पता ले सकते हो। समिति के माध्यम से भी उन्नत बीज उपलब्ध कराया जाता है।
बीज कितना लगे और कैसा हो
एक एकड़ के लिए 35 से 45 क्विंटल बीज गन्ना पर्याप्त होता है। दो आंख वाले टुकड़े 20 से 24 हजार और तीन आंख वाले 14 से 16 हजार प्रति एकड़ चाहिए होते हैं। बीज के लिए 8 से 10 महीने पुराने गन्ने का ऊपरी भाग सबसे अच्छा रहता है। गन्ने के ऊपरी तिहाई हिस्से में ग्लूकोज ज्यादा होता है, जिससे अंकुरण तेज और मजबूत होता है। कीट-रोग लगे या सूखी-सिकुड़ी गांठों वाले गन्ने को बीज में लेने से बचना चाहिए। एक बार खराब बीज दब गया तो पूरी फसल का भविष्य वहीं तय हो जाता है।
बीज उपचार — पांच मिनट की मेहनत, पूरे साल का फायदा
बुआई से पहले बीज के टुकड़ों को रोग से बचाने के लिए उपचार जरूरी है। कार्बेन्डाजिम का घोल बनाओ। 100 लीटर पानी में 100 ग्राम कार्बेन्डाजिम घोलकर 35 क्विंटल बीज गन्ने के टुकड़ों को इसमें करीब 5 मिनट तक डुबोकर रखो। एक दूसरा तरीका भी कृषि वैज्ञानिक बताते हैं। 1000 लीटर पानी में 500 ग्राम कार्बेन्डाजिम, 2000 मिली मैलाथियान और 5-7 किलो यूरिया का घोल बनाकर टुकड़ों को कम से कम 15 मिनट तक भिगोना। यह कीट और रोग दोनों से शुरुआती सुरक्षा देता है। भूमि शोधन के लिए ट्राइकोडर्मा का प्रयोग 2 लीटर प्रति एकड़ की दर से भी सुझाया गया है। बीज उपचार को छोटे काम समझकर छोड़ने की गलती मत करो। यही पांच मिनट बाद में दवा के हजारों रुपये बचाते हैं।
खाद की मात्रा — बुआई पर ही सही हिसाब लगाओ
एक एकड़ के लिए अनुमानित उर्वरक मात्रा 113 किलो नाइट्रोजन, 32 किलो फास्फोरस, 72 किलो पोटाश और 10 किलो जिंक सल्फेट होती है। इसमें नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा और फास्फोरस, पोटाश व जिंक सल्फेट की पूरी मात्रा बुआई के समय नाली में डाल दो। बची हुई नाइट्रोजन की मात्रा बुआई के 110 से 120 दिन बाद डालनी चाहिए। यूरिया की देर से दी गई खुराक से पौधों में हरियाली बनी रहती है और टिलरिंग मजबूत होती है।
खेत तैयारी में गोबर की सड़ी खाद भी डाली जाती है। कृषि विभाग की सलाह के अनुसार 150 से 200 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से गोबर खाद पूरे खेत में बिखेरकर जुताई में मिला दो। यह खाद मिट्टी की जलधारण क्षमता बढ़ाती है। एक बात ध्यान रखो। हर जुताई के बाद पाटा जरूर चलाओ ताकि अंकुरण लायक नमी बनी रहे। मिट्टी भुरभुरी हो, ढेले बिल्कुल न रहें। यही नमी अंकुरण की जान है।
ट्रेंच विधि — कम पानी में ज्यादा उपज
शरदकालीन गन्ने की बुआई अधिकतर रेजर विधि से होती है, लेकिन ट्रेंच विधि से उपज रेजर से अधिक मिलती है। खेत तैयार होने के बाद ट्रेंच ओपनर से करीब एक फुट चौड़ी और 25 से 30 सेमी गहरी नालियां बनाई जाती हैं। दो नालियों के बीच की दूरी 120 सेमी रखी जाती है। नाली के सबसे नीचे उर्वरक डालकर फिर बीज के टुकड़े रखे जाते हैं। इस विधि में पानी की करीब 15 प्रतिशत बचत होती है और फसल को मजबूत पकड़ मिलती है, जिससे पौधे जल्दी नहीं गिरते।
120 सेमी की चौड़ी दूरी का एक और फायदा है। बीच की खाली जगह में सरसों, आलू या मूंग की अंतःफसल ली जा सकती है। गन्ने के जमने से पहले यह अंतःफसल अतिरिक्त आय दे देती है। ट्रेंच विधि में मजदूरी थोड़ी ज्यादा लगती है, पर बढ़ी हुई उपज और अंतःफसल की कमाई इस खर्च को पूरा कर देती है।
मुख्य बातें
- बुआई सितंबर के दूसरे पक्ष से 10 अक्टूबर के बीच निपटा लो; 20 अक्टूबर के बाद भी संभव है, पर अंकुरण धीमा पड़ता है।
- को.0118, कोलख 14201, कोशा 18231 जैसी रोग-रोधी प्रजातियां चुनो; को.0238 के रोगग्रस्त खेत का बीज मत लो।
- बीज उपचार 100 ग्राम कार्बेन्डाजिम प्रति 100 लीटर पानी में 5 मिनट और ट्रेंच विधि में 120 सेमी की दूरी — ये दो काम उपज तय करते हैं।
स्रोत: कृषि जागरण (हिंदी) — शरदकालीन गन्ने की वैज्ञानिक खेती; लाइव हिंदुस्तान — शरदकालीन बुआई के लिए नई प्रजातियां और रोग सलाह (सितंबर 2026); दैनिक भास्कर (पीलीभीत) — जिला गन्ना अधिकारी की अगेती प्रजातियों पर सलाह।
