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शरद बुवाई में दीमक-गिडार से बीज बचाएं: 3 संकेत पहचानें, 5 सस्ते उपाय अपनाएं

✍️ GannaUP डेस्क · 🗓 12 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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शरद बुवाई में दीमक-गिडार से बीज बचाएं: 3 संकेत पहचानें, 5 सस्ते उपाय अपनाएं

अक्टूबर के तीसरे हफ्ते में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई खेतों में शरदकालीन बुवाई का काम जोरों पर है। कुछ किसानों को एक अजीब बात दिख रही है। बुवाई के पंद्रह-बीस दिन बाद खेत में अंकुरण तो हुआ, लेकिन जगह-जगह खाली धब्बे रह गए। जो पौधे निकले भी, उनमें से कुछ मुरझा रहे हैं। ऐसे में अगर किसी कतार में उखड़ा हुआ सेट उठाकर देखा जाए, तो राज वहीं खुलता है। सेट के कटे सिरे से अंदर खोखला कर दिया गया है, या आंख वाले हिस्से में छेद हैं। यह काम है मिट्टी के दो पुराने दुश्मनों का। दीमक और सफेद गिडार।

शरदकालीन बुवाई में यही दोनों कीट सबसे ज्यादा नुकसान करते हैं। दीमक जमीन के नीचे बोए गए सेट्स को कटे सिरों और आंखों से कुतरता है। इससे अंकुरण ही नहीं हो पाता। सफेद गिडार जड़ों को काटता है। पौधा ऊपर से पीला पड़ता है और मुरझाता है। परेशानी यह है कि दोनों ही जमीन के नीचे काम करते हैं। किसान को नुकसान तब दिखता है जब समय निकल चुका होता है। अच्छी खबर यह है कि इनसे बचने के तरीके सस्ते हैं। कई तो ऐसे हैं जिनमें रासायनिक दवा बिल्कुल नहीं लगती।

पहचान के 3 संकेत, जिन्हें नजरअंदाज न करें

सबसे पहला संकेत अंकुरण में खाली जगहें हैं। अगर बुवाई के 20-25 दिन बाद भी कतारों में लंबी खाली पट्टियां दिखें, तो सेट्स कहीं कट गए हैं। दूसरा संकेत है पत्तियों का पीलापन और मुरझाना। सफेद गिडार जड़ों को काटता है, तो पौधे को पानी और पोषण नहीं मिलता। पत्ते पीले पड़ते हैं और पूरा छत्र सूखने लगता है। तीसरा संकेत सबसे पक्का है। मुरझाए पौधे को हल्के से खींचें। सफेद गिडार के हमले में पौधा जड़ों समेत आसानी से उखड़ आता है, क्योंकि जड़ें कटी हुई होती हैं। जमीन खोदने पर ढेर के पास मोटे, पीले-सफेद, C आकार के लार्वा भी दिख सकते हैं। यह सफेद गिडार का ग्रब ही है।

इन तीनों संकेतों का फायदा यही है कि नुकसान की जड़ पता चल जाती है। कई किसान पीलापन देखकर सीधा यूरिया बढ़ा देते हैं। कीट का इलाज कीट से ही होगा, खाद से नहीं।

पहला हथियार: सस्ता जैविक इलाज, बुवाई से पहले करें

बुवाई के समय मिट्टी में ही सुरक्षा देना सबसे कारगर तरीका है। कृषि विशेषज्ञों की सलाह के मुताबिक बवेरिया बेसियाना नामक जैविक फफूंद दीमक के लिए रामबाण मानी जाती है। तरीका भी आसान है। 3 किलो बवेरिया बेसियाना को 100 किलो सड़ी हुई गोबर की खाद में मिलाएं। इस मिश्रण को छायादार जगह पर रखें और रोजाना हल्का पानी छिड़कते रहें। करीब 10 दिन में यह तैयार हो जाता है। आखिरी जुताई के समय इसे पूरे खेत में मिला दें।

इसका सीधा फायदा यह है कि मिट्टी में ही दीमक और कई दूसरे हानिकारक कीटों की संख्या घट जाती है। रासायनिक दवा का खर्च बचता है और मिट्टी की सेहत भी नहीं बिगड़ती। जैविक तरीके अपनाने वाले किसानों के लिए यही सबसे पहला और सबसे सस्ता विकल्प है।

बुवाई के समय की 3 सावधानियां

बुवाई की तैयारी में तीन बातों का ध्यान रखना इन कीटों से बचाव का आधा काम कर देता है। पहला, गहरी जुताई करें। कटाई के तुरंत बाद गहरी जुताई करने से मिट्टी में छिपे कीटों के घर टूटते हैं और धूप में वे मर जाते हैं। दूसरा, सड़ी-गली गोबर की खाद ही इस्तेमाल करें। कच्ची या अधूरी सड़ी खाद में कीटों के अंडे पनपते हैं। तीसरा, नमी का प्रबंधन। पर्याप्त सिंचाई बनाए रखें। विशेषज्ञों के अनुसार खेत में 24 घंटे पानी ठहरा देने से सफेद गिडार के ग्रब मिट्टी से बाहर आ जाते हैं, जिन्हें पक्षी खा जाते हैं।

इन तीनों में से कोई भी अलग से खर्च वाला काम नहीं है। यह बुवाई की सामान्य तैयारी का ही हिस्सा है, बस दिशा सही होनी चाहिए।

हमला हो गया हो तो: खड़ी फसल के विकल्प

अगर खड़ी फसल में दीमक या गिडार का प्रकोप दिख रहा है, तो रासायनिक नियंत्रण अपनाना पड़ता है। खेत विशेषज्ञों की सलाह के मुताबिक क्लोरोपायरीफॉस 20 ईसी की 2 लीटर मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से सिंचाई के पानी के साथ खेत में चलाई जा सकती है। सफेद गिडार के लिए सरकार के पादप संरक्षण सलाहकार की सिफारिश है कि प्रकोप की स्थिति में फिप्रोनिल 40% + इमिडाक्लोप्रिड 40% डब्ल्यूजी 175-200 ग्राम प्रति एकड़, 400-500 लीटर पानी में मिलाकर प्रयोग करें, या फोरेट 10% सीजी 10,000 ग्राम प्रति एकड़ की दर से दें।

साथ ही लाइट ट्रैप लगाने से सफेद गिडार के वयस्क भृंग पकड़े जा सकते हैं। मानसून की शुरुआत में ये भृंग नीम और बबूल जैसे पेड़ों पर पाए जाते हैं। उन्हें इकट्ठा करके नष्ट करने से अगली पीढ़ी के अंडे ही कम हो जाते हैं। रासायनिक दवा हमेशा लेबल पर लिखी मात्रा और सुरक्षा निर्देशों के साथ ही इस्तेमाल करें। जरूरत से ज्यादा दवा खर्च भी बढ़ाती है और मिट्टी को नुकसान भी पहुंचाती है।

किन किसानों को सबसे ज्यादा सावधान रहना चाहिए

जिन खेतों में पिछले साल या पेड़ी फसल में दीमक-गिडार का प्रकोप रहा है, वहां इस बार बुवाई से पहले ही बचाव जरूरी है। रेतीली या हल्की मिट्टी वाले खेतों में दीमक ज्यादा सक्रिय रहता है। जिन खेतों में लगातार पेड़ी ली जा रही है, वहां भी जोखिम अधिक है। अगर पास के खेत में प्रकोप है, तो अपने खेत की निगरानी बढ़ा दें। कीट खेत की मेड़ नहीं देखते।

मुख्य बातें

  • दीमक सेट्स को कटे सिरों से और सफेद गिडार जड़ों को काटता है; खाली अंकुरण, पीले पत्ते और आसानी से उखड़ते पौधे इसके 3 संकेत हैं।
  • बुवाई से पहले 3 किलो बवेरिया बेसियाना + 100 किलो सड़ी गोबर खाद का 10-दिन तैयार मिश्रण आखिरी जुताई में मिलाएं।
  • गहरी जुताई, सड़ी खाद और सही नमी प्रबंधन बुवाई के समय का मुफ्त बचाव है; प्रकोप पर क्लोरोपायरीफॉस 2 लीटर/हेक्टेयर सिंचाई के पानी के साथ दें।

स्रोत: News18 हिंदी (कृषि विशेषज्ञ सलाह), केंद्रीय पादप संरक्षण, संगरोध एवं भंडारण निदेशालय की सफेद ग्रब सलाह, तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय विशेषज्ञ प्रणाली।

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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