गन्ना भुगतान: शामली में थानाभवन मिल पर 81 करोड़ बकाया, DM ने तत्काल चुकाने के आदेश दिए

पुराना सत्र खत्म हुए अभी दिन ही हुए हैं, और नया सत्र बस पंद्रह दिन दूर है। थानाभवन चीनी मिल के क्षेत्र के गन्ना किसानों के लिए यह वक्त राहत का होना चाहिए था। लेकिन सच्चाई यह है कि उनका करीब 81 करोड़ रुपये अभी भी मिल के खाते में फंसा है। इसी बकाए को लेकर 28 सितंबर को शामली के DM आलोक यादव ने जिले की तीनों चीनी मिलों की समीक्षा बैठक की और थानाभवन मिल को अवशेष गन्ना मूल्य का शत-प्रतिशत भुगतान तत्काल सुनिश्चित करने के आदेश दिए।
बैठक में क्या-क्या सामने आया
सोमवार को अपने कार्यालय में हुई बैठक में DM ने पेराई सत्र 2025-26 के गन्ना मूल्य भुगतान की स्थिति, 2026-27 की तैयारियों और चीनी स्टॉक की एक-एक करके समीक्षा की। बैठक में जिला गन्ना अधिकारी आरएस कुशवाहा, खांडसारी अधिकारी, ऊन मिल के वाइस प्रेसिडेंट डॉ. कुलदीप पिलानिया और थानाभवन मिल के GM (गन्ना) लेखपाल सिंह मौजूद रहे।
आंकड़े बताते हैं कि शामली और ऊन, दोनों मिलों ने किसानों का पूरा पैसा चुका दिया है। शामली चीनी मिल ने 323.19 करोड़ रुपये और ऊन चीनी मिल ने 267.03 करोड़ रुपये का शत-प्रतिशत गन्ना मूल्य भुगतान कर दिया है। इसके ठीक उलट थानाभवन मिल पर पेराई सत्र 2025-26 का कुल 301.60 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य देय था, जिसमें से 28 सितंबर तक 220.23 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है। इस तरह करीब 81.37 करोड़ रुपये अभी भी बकाया है।
ध्यान रहे, यह ताजा भुगतान आंकड़ा (220.23 करोड़) अभी हिंदुस्तान की 28 सितंबर की रिपोर्ट पर आधारित है। हालांकि पिछले दो महीनों की आधिकारिक प्रगति एक ही दिशा में है: जुलाई में थानाभवन मिल का चुकाया गया गन्ना मूल्य 166.76 करोड़ रुपये था, अगस्त के अंत तक यह 198.08 करोड़ पहुंचा और 7 सितंबर को 206.38 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। यानी DM की निगरानी में ढाई महीने में करीब 54 करोड़ रुपये किसानों तक पहुंचाया जा चुका है।
DM ने कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी
बैठक में DM आलोक यादव ने थानाभवन मिल प्रबंधन को साफ कहा कि अवशेष गन्ना मूल्य का पूरा भुगतान तत्काल सुनिश्चित किया जाए। लापरवाही या ढिलाई बरते जाने पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई। यह कोई पहली बार की चेतावनी नहीं है। 7 सितंबर को हुई पिछली समीक्षा में भी DM ने थानाभवन मिल को बकाया चुकाने के निर्देश दिए थे।
तीनों मिलों को शासन के निर्देशानुसार हर हाल में 15 अक्टूबर 2026 तक नया पेराई सत्र 2026-27 शुरू करना होगा। यही वजह है कि बकाया भुगतान पर दबाव अब और तेज हो गया है। पुराना पैसा अटका रह जाए और नया सत्र शुरू हो जाए, तो किसान की नई पर्ची पर भरोसा कमजोर पड़ता है।
किसान के लिए इसका क्या मतलब है
थानाभवन क्षेत्र के किसान सबसे पहले अपना बकाया स्थिति खुद जांचें। ई-गन्ना ऐप में अपने सट्टे, पर्ची और भुगतान की स्थिति देखना सबसे तेज तरीका है। अगर बकाया दिख रहा है और मिल की ओर से कोई जवाब नहीं मिल रहा, तो जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय या सरकार के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-121-3203 और 1800-180-5129 पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
शामली और ऊन मिलों का 100 प्रतिशत भुगतान इस बात का सबूत है कि पैसा निकल सकता है। जिले की तीन मिलों में से दो मिलों ने पूरा गन्ना मूल्य चुका दिया है, तो तीसरी मिल पीछे क्यों है, यह सवाल खुद किसान समिति और जिला प्रशासन के सामने रख सकते हैं। DM की चौथी समीक्षा से यह भी साफ है कि लगातार निगरानी और दबाव से ढाई महीने में करीब 54 करोड़ रुपये किसानों के खातों तक पहुंचे हैं। शिकायत और फॉलो-अप बेकार नहीं जाते।
नए पेराई सत्र की बात करें तो 15 अक्टूबर की डेडलाइन तय है। मरम्मत का काम भी चल रहा है: पिछली समीक्षा के अनुसार थानाभवन मिल में करीब 61 प्रतिशत, शामली में करीब 60 प्रतिशत और ऊन में 56.75 प्रतिशत मरम्मत कार्य पूरा हो चुका था। किसान पर्ची कैलेंडर और सट्टा इंडेंट पर नजर रखें, ताकि नए सत्र में तौल और भुगतान में कोई अड़चन न आए।
मुख्य बातें
- थानाभवन चीनी मिल पर पेराई सत्र 2025-26 का करीब 81 करोड़ रुपये गन्ना बकाया; शामली और ऊन मिलों ने 100 प्रतिशत भुगतान कर दिया।
- DM आलोक यादव ने 28 सितंबर की समीक्षा बैठक में थानाभवन मिल को तत्काल पूरा भुगतान करने के आदेश दिए, लापरवाही पर कठोर कार्रवाई की चेतावनी।
- तीनों मिलों को 15 अक्टूबर 2026 तक नया पेराई सत्र शुरू करना होगा; बकाया किसान ई-गन्ना ऐप या टोल-फ्री 1800-121-3203 पर शिकायत कर सकते हैं।
स्रोत: लाइव हिंदुस्तान (28 सितंबर 2026), रॉयल बुलेटिन (7 सितंबर 2026), लाइव हिंदुस्तान (7 सितंबर 2026)
