शामली: 189 केंद्र बंटे, 5 नवंबर से पेराई, पर थानाभवन पर 71 करोड़ बकाया

शामली के गन्ना किसानों के लिए इस हफ्ते दो खबरें एक साथ आई हैं, एक राहत वाली और एक चिंता वाली। राहत यह कि जिले की तीनों चीनी मिलों को गन्ना खरीद केंद्र मिल गए हैं, कुल 189 केंद्र। चिंता यह कि जिस थानाभवन मिल की पेराई 5 नवंबर से शुरू होने जा रही है, उसी पर किसानों का करीब 71 करोड़ रुपये का पुराना बकाया अब तक अटका हुआ है। यानी नई पेराई शुरू होने से पहले पुराना हिसाब पूरा नहीं हुआ है।
तीनों मिलों को कितने केंद्र मिले
शासन से मिले आवंटन के मुताबिक शामली चीनी मिल को 28, थानाभवन मिल को 72 और ऊन मिल को 89 गन्ना खरीद केंद्र दिए गए हैं। तीनों को मिलाकर कुल 189 केंद्र बनते हैं। जिला गन्ना अधिकारी रणजीत सिंह कुशवाहा के मुताबिक शामली मिल के 28 केंद्रों से कुल 19,386 हेक्टेयर गन्ने का क्षेत्रफल जुड़ा हुआ है।
कुछ केंद्रों की अदला-बदली भी हुई है। थानाभवन मिल के गंदेवड़ा ए और बी केंद्र सहारनपुर जिले की नोनौता मिल को दिए गए हैं। लिसाढ़ पंचम केंद्र शामली मिल को मिला है और शामली मिल का खेड़ी पट्टी केंद्र मुजफ्फरनगर की तितावी मिल को स्थानांतरित किया गया है। किसान पर्ची पर केंद्र का नाम जरूर मिलान कर लें।
कब से चलेगी कौन सी मिल
थानाभवन चीनी मिल के गन्ना महाप्रबंधक लेखपाल सिंह के मुताबिक मिल में मरम्मत का काम पूरा हो चुका है और सभी 72 खरीद केंद्र स्थापित कर दिए गए हैं। मिल को 5 नवंबर से चालू करने की तैयारी है। शामली चीनी मिल के यूनिट हेड संजय कुमार शर्मा ने बताया है कि शामली मिल के 5 से 9 नवंबर के बीच चालू होने की संभावना है। वहां नई टरबाइन का परीक्षण चल रहा था, जिसके पूरा होते ही पेराई शुरू कर दी जाएगी।
ऊन चीनी मिल सबसे बाद में चलेगी। ऊन मिल के यूनिट हेड कुलदीप पिलानिया के मुताबिक मिल का पेराई सत्र 15 नवंबर के बाद शुरू होने की उम्मीद है। पिछले सत्र का क्रम भी कुछ ऐसा ही रहा था। तब थानाभवन में 1 नवंबर को पूजन और 2 नवंबर को पेराई शुरू हुई थी, शामली में 3 नवंबर को पूजन के बाद 5 नवंबर को पेराई चली थी और ऊन मिल ने 15 नवंबर को संचालन शुरू किया था।
इस बार पेराई सत्र करीब एक सप्ताह पिछड़ा है, और बारिश व कम रिकवरी की वजह से कार्यक्रम में बदलाव की आशंका भी है। जिला गन्ना अधिकारी के मुताबिक इस बार गन्ने की रिकवरी करीब 8 प्रतिशत के आसपास आ रही है, जो मिलों और किसानों दोनों के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
71 करोड़ का बकाया और 7 सितंबर से धरना
अब बकाया वाले हिस्से पर आते हैं। 12 अक्टूबर को जिलाधिकारी आलोक यादव की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में थानाभवन मिल के पिछले सत्र के आंकड़े सामने रखे गए थे। मिल ने 301.60 करोड़ रुपये के गन्ना मूल्य में से 230.33 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। हिसाब लगाने पर करीब 71 करोड़ रुपये बाकी निकलते हैं। यही रकम अब 1 नवंबर की खबरों में भी दर्ज है।
उसी बैठक में यह भी सामने आया था कि शामली मिल (323.19 करोड़ रुपये) और ऊन मिल (267.03 करोड़ रुपये) का पूरा भुगतान हो चुका था। जिलाधिकारी ने थानाभवन मिल के प्रतिनिधियों को शत-प्रतिशत भुगतान तत्काल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे और चेतावनी दी थी कि ऐसा न होने पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई होगी।
किसान एकता संघर्ष समिति के नेतृत्व में किसान 7 सितंबर से शामली गन्ना सहकारी समिति परिसर में धरना दे रहे हैं। मांग सीधी है: बकाया भुगतान के साथ देरी पर लगने वाले ब्याज का वर्षवार हिसाब सार्वजनिक किया जाए। जब तक पुराना हिसाब साफ नहीं होता, नई पेराई का भरोसा भी कमजोर रहेगा।
किसान पर इसका क्या असर पड़ेगा
थानाभवन मिल को गन्ना देने वाले किसानों के लिए यह सत्र दोहरी परीक्षा है। 5 नवंबर से पर्चियां चलने लगेंगी, पर पिछले सत्र की रकम अब तक खाते में नहीं आई। ऐसे में तीन काम तुरंत करें।
पहला, पर्ची और केंद्र का नाम मिलान कर लें, वरना पुराने केंद्र पर गन्ना ले जाने से वापसी का झंझट होगा। दूसरा, तौल पर्ची और भुगतान की तारीख का हिसाब डायरी में लिखते चलें, ताकि देरी पर ब्याज का दावा बन सके। तीसरा, बकाया न मिला हो तो जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराएं, क्योंकि वसूली की कार्रवाई शिकायतों के आधार पर ही आगे बढ़ती है।
एक बात और। पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ने का राज्य परामर्शी मूल्य यानी SAP अभी घोषित नहीं हुआ है। पिछले सत्र 2025-26 में अगेती का SAP 400 रुपये और सामान्य का 390 रुपये प्रति क्विंटल था। नई दर आने तक पुरानी दर को इस सत्र की दर समझने की गलती न करें।
मुख्य बातें
- शामली जिले की तीनों मिलों को कुल 189 गन्ना खरीद केंद्र मिले हैं: शामली को 28, थानाभवन को 72 और ऊन को 89।
- थानाभवन मिल 5 नवंबर से, शामली मिल 5 से 9 नवंबर के बीच और ऊन मिल 15 नवंबर के बाद पेराई शुरू करने की तैयारी में है।
- थानाभवन मिल पर पिछले सत्र का करीब 71 करोड़ रुपये का बकाया अब तक लंबित है, जबकि शामली और ऊन मिलों का पुराना भुगतान पूरा हो चुका है।
स्रोत: दैनिक जागरण (26 अक्टूबर 2026), अमर उजाला (1 नवंबर 2026), पूर्व-पश्चिम ज्योति (12 अक्टूबर 2026)।
