शामली: 15% ब्याज का रिकॉर्ड नहीं मिला तो समिति में तालाबंदी, DM को शिकायत

शामली के गन्ना किसानों का सब्र अब जवाब दे रहा है। दो महीने से समिति के चक्कर काट रहे किसानों ने साफ कह दिया है कि अगर देर से हुए गन्ना भुगतान पर मिलने वाले ब्याज का वर्षवार रिकॉर्ड नहीं दिया गया तो वे शामली गन्ना समिति में तालाबंदी करेंगे। किसान एकता संघर्ष समिति के नेतृत्व में किसानों ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।
यह विवाद सिर्फ एक कागज का नहीं है। इसके पीछे सालों से लटका गन्ना भुगतान और उस पर बनता ब्याज है। किसान चाहते हैं कि हिसाब साफ हो, ताकि हर किसान को पता चले कि देरी पर कितना ब्याज बनता है।
7 सितंबर से धरना, फिर भी रिकॉर्ड नहीं
किसानों का कहना है कि ब्याज का रिकॉर्ड लेने के लिए वे 7 सितंबर 2026 से शामली गन्ना समिति पर लगातार धरना दे रहे हैं। इतने लंबे समय के बाद भी समिति के अधिकारी उन्हें पूरा रिकॉर्ड नहीं दे रहे हैं, और रिकॉर्ड क्यों नहीं दिया जा रहा, इसका कोई लिखित कारण भी नहीं बताया गया।
27 अक्टूबर को समिति के सचिव ने बताया था कि एक साल का रिकॉर्ड तैयार है और बाकी दो वर्षों का रिकॉर्ड एक सप्ताह में दे दिया जाएगा। इस भरोसे पर करीब 20 से 25 किसान रिकॉर्ड लेने पहुंचे, लेकिन समिति कर्मचारियों ने रिकॉर्ड देने से मना कर दिया।
किसान एकता संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी परमवीर शास्त्री के नेतृत्व में किसानों ने जिलाधिकारी को पत्र देकर कहा है कि समिति से ब्याज का रिकॉर्ड दिलाया जाए। किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर रिकॉर्ड नहीं मिला तो तालाबंदी के लिए मजबूर होंगे और इसकी जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी।
14 दिन का नियम और 15 प्रतिशत ब्याज का दावा
गन्ना आपूर्ति की व्यवस्था में किसान अपनी फसल चीनी मिलों को गन्ना समितियों के माध्यम से देते हैं। नियम के मुताबिक गन्ना मूल्य का भुगतान 14 दिनों के भीतर होना चाहिए, लेकिन किसानों का आरोप है कि मिलों ने तय समय में भुगतान नहीं किया, इसलिए देरी की अवधि पर ब्याज बनता है।
शिकायती पत्र में किसानों ने दावा किया है कि 16 जुलाई 2026 को उच्च न्यायालय ने पेराई सत्र 1996-97 से 2025-26 तक 14 दिन से अधिक देरी से हुए गन्ना मूल्य भुगतान पर 15 प्रतिशत की दर से ब्याज देने का आदेश दिया है। यह दावा किसानों के पत्र में दर्ज है। ब्याज की यह दर ही इस पूरे विवाद की जड़ है, क्योंकि इतने लंबे समय का हिसाब जोड़ने पर रकम बड़ी हो जाती है। किसानों की मांग सीधी है, समिति वर्षवार ब्याज का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक करे, ताकि हर किसान अपना हिसाब खुद देख सके।
थानाभवन मिल पर 71 करोड़ बकाया, 5 नवंबर से पेराई की तैयारी
इसी बीच जिले की थानाभवन चीनी मिल पर किसानों का करीब 71 करोड़ रुपये बकाया है। मिल प्रबंधन 5 नवंबर से पेराई शुरू करने की तैयारी में जुटा है। मिल के गन्ना महाप्रबंधक लेखपाल सिंह के मुताबिक मरम्मत पूरी हो गई है और सभी 72 गन्ना खरीद केंद्र स्थापित कर दिए गए हैं।
किसानों के लिए यह स्थिति सबसे ज्यादा परेशान करने वाली है। एक तरफ पुराने सत्र का भुगतान नहीं मिला, दूसरी तरफ नया पेराई सत्र शुरू होने जा रहा है। किसानों का कहना है कि पुराने भुगतान के बिना नया सत्र शुरू होने से उनकी आर्थिक मुश्किलें और बढ़ जाएंगी। खेती की लागत निकालना, बच्चों की फीस भरना और परिवार के जरूरी खर्च पूरे करना पहले से मुश्किल हो रहा है।
जिले की तीनों मिलों की स्थिति पर 12 अक्टूबर को जिलाधिकारी आलोक यादव ने समीक्षा बैठक की थी। उसमें बताया गया था कि पेराई सत्र 2025-26 में थानाभवन मिल ने 301.60 करोड़ रुपये के सापेक्ष 230.33 करोड़ रुपये का भुगतान किया है, जबकि शामली और ऊन मिलों ने पूरा भुगतान कर दिया है।
जिला गन्ना अधिकारी रणजीत सिंह ने कहा है कि थानाभवन मिल को जल्द से जल्द बकाया भुगतान करने के निर्देश दिए गए हैं और किसानों को ब्याज का ब्योरा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी की जाएगी।
किसान पर इसका क्या असर पड़ेगा
ब्याज का रिकॉर्ड मिलना किसानों के लिए सिर्फ एक कागज हासिल करना नहीं है। अगर वर्षवार हिसाब सामने आ जाता है तो हर किसान को पता चल जाएगा कि उसके भुगतान में कितनी देरी हुई और उस पर कितना ब्याज बनता है।
दूसरी तरफ, पेराई सत्र शुरू होने से पहले बकाया निपटना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि नया गन्ना डालने के बाद किसान फिर उसी चक्र में फंस सकते हैं। पुराना पैसा अटका रहा तो खाद, बीज और मजदूरी के लिए फिर उधार लेना पड़ेगा।
किसान क्या करें
जो किसान इस मामले से जुड़े हैं, वे अपनी गन्ना पर्चियां, भुगतान की रसीदें और समिति से मिला हर कागज संभालकर रखें। ब्याज का हिसाब वर्षवार होता है, इसलिए जिस वर्ष का गन्ना दिया था, उस वर्ष की पर्ची ही काम आएगी। समिति से रिकॉर्ड मांगते समय लिखित में मांग देना बेहतर रहता है।
मुख्य बातें
- शामली के किसान 7 सितंबर से गन्ना भुगतान पर ब्याज का वर्षवार रिकॉर्ड मांग रहे हैं, 27 अक्टूबर के आश्वासन के बाद भी रिकॉर्ड नहीं मिला।
- किसानों ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर रिकॉर्ड दिलाने की मांग की है और समिति में तालाबंदी की चेतावनी दी है।
- थानाभवन मिल पर करीब 71 करोड़ रुपये बकाया है, जबकि मिल 5 नवंबर से पेराई शुरू करने की तैयारी में है।
स्रोत: रॉयल बुलेटिन (3 नवंबर 2026), अमर उजाला (1 नवंबर 2026), पूरब पश्चिम ज्योति (12 अक्टूबर 2026)
