13 किसानों के नाम पर फर्जी हाईकोर्ट वाद? भाकियू बोली- ब्याज का हक नहीं छूटेगा

कागज हाईकोर्ट का, नाम किसानों का, और मांग ऐसी जो किसानों के ही खिलाफ हो। पिछले दिनों सोशल मीडिया पर एक सूची तेजी से घूमी, जिसमें दावा किया गया था कि 13 किसानों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में वाद दायर करके गन्ने के बकाया भुगतान पर मिलने वाला ब्याज न लेने की मांग की है। खबर फैलते ही भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने इसे सीधे फर्जी बता दिया और शुगर मिल मालिकों पर किसानों के नाम का गलत इस्तेमाल करने का गंभीर आरोप लगाया।
वायरल सूची में क्या था
हिंदुस्तान और रॉयल बुलेटिन की रिपोर्टों के मुताबिक, सोशल मीडिया पर हाईकोर्ट में दायर एक कथित वाद की सूची वायरल हुई थी। इसमें 13 किसानों के नाम शामिल थे और कहा जा रहा था कि ये किसान गन्ने के बकाया भुगतान पर मिलने वाले ब्याज की मांग नहीं कर रहे। सूची में गांव भाज्जू के किसान धीरजपाल और महेशवीर के नाम भी थे।
बात यहीं बिगड़ गई। जब भाकियू ने इन दोनों किसानों से संपर्क किया, तो उन्होंने ऐसे किसी वाद की जानकारी होने से साफ इनकार कर दिया। दोनों का कहना था कि उन्होंने न तो कोई प्रमाणपत्र दिया और न ही किसी ऐसे दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए, जिसे अदालत में दाखिल किया गया हो। उनका आरोप है कि सूची में उनका नाम डालकर क्षेत्र में उन्हें बदनाम करने की कोशिश की गई।
भाकियू ने कार्यालय में की प्रेसवार्ता
शुक्रवार को शामली के धीमानपुरा स्थित भाकियू कार्यालय में जिलाध्यक्ष आशीष चौधरी ने इस पूरे मामले का खंडन किया। उनके साथ गांव भाज्जू के वही दो किसान भी मौजूद थे, जिनके नाम वायरल सूची में थे। चौधरी ने कहा कि शामली जिले की तीन शुगर मिलों में से दो ने अपना बकाया गन्ना भुगतान कर दिया है, जबकि थानाभवन स्थित बजाज शुगर मिल पर अभी भुगतान बकाया है।
उनका सीधा आरोप था कि किसानों के नाम पर कथित वाद दायर करके उनमें आपसी मतभेद पैदा करने की कोशिश की जा रही है, और इसका फायदा मिल मालिकों को मिल सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि वायरल सूची में शामली के अलावा लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्णनाथ, सहारनपुर के गंगनोली, बुढ़ाना, बिलाई, चांदपुर और पीलीभीत की शुगर मिलों से जुड़े किसानों के नाम भी बताए गए हैं। इस प्रेसवार्ता में बिल्लू राणा, प्रशांत चौधरी और कृष्णपाल राठी समेत संगठन के कई पदाधिकारी मौजूद रहे।
एसपी से जांच की मांग
भाकियू ने इस मामले को हल्के में नहीं लिया। संगठन का कहना है कि वह शनिवार को एसपी शामली से मिलकर शिकायत देगा और पूरे मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेगा। हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, भाकियू ने सोशल मीडिया पर वायरल हुए कथित दस्तावेज की जांच और कार्रवाई दोनों की बात कही है।
15 प्रतिशत ब्याज का पेंच
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब गन्ने के बकाया भुगतान पर ब्याज का मामला देश की सबसे बड़ी अदालत तक पहुंच चुका है। किसान तक की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने 6 अक्टूबर के आदेश में उत्तर प्रदेश सरकार की अर्जी खारिज करते हुए 15 प्रतिशत ब्याज की दर को बरकरार रखा। इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 31 अगस्त के आदेश में कहा था कि बकाया रिकवरी सर्टिफिकेट के तहत मिलों से 1,936 करोड़ रुपये वसूलने बाकी हैं, जिसमें 1,087 करोड़ रुपये मूल बकाया और 849.5 करोड़ रुपये ब्याज है।
यानी जिस ब्याज को “न लेने” की मांग वाला वाद वायरल हुआ, वही ब्याज सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों से किसानों का कानूनी हक बना हुआ है। कानून में मिलों को गन्ना देने के 14 दिन के भीतर भुगतान करना होता है, और देरी होने पर बकाया राशि पर ब्याज देना पड़ता है।
थानाभवन मिल पर पहले से आंदोलन
शामली में बकाया भुगतान का मुद्दा पहले से गर्म है। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, भाकियू (टिकैत) ने 13 अक्टूबर से जिलाधिकारी कार्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया था, जिसमें थानाभवन शुगर मिल से बकाया गन्ना भुगतान की मांग प्रमुख है। ऐसे माहौल में किसानों के नाम पर ऐसा वाद वायरल होना आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
किसानों के लिए जरूरी सबक
इस घटना से हर गन्ना किसान के लिए एक सीख निकलती है। अदालत या सरकारी कामकाज के लिए कभी भी बिना पढ़े-समझे किसी कागज पर हस्ताक्षर न करें। अपना आधार, खसरा-खतौनी या बैंक की जानकारी किसी अजनबी को न दें। अगर आपके गांव का नाम किसी वायरल सूची में दिखे, तो पहले अपने जिला गन्ना अधिकारी या किसान संगठन से इसकी पुष्टि कराएं। झूठे दस्तावेज पर नाम आने की स्थिति में तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराना आपका अधिकार है।
मुख्य बातें
- सोशल मीडिया पर 13 किसानों के नाम से गन्ना ब्याज न मांगने वाले कथित हाईकोर्ट वाद की सूची वायरल हुई, भाकियू ने इसे फर्जी बताया।
- भाज्जू गांव के धीरजपाल और महेशवीर ने किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर या वाद दायर करने की जानकारी से इनकार किया।
- भाकियू जिलाध्यक्ष आशीष चौधरी ने शुगर मिल मालिकों पर किसानों को बदनाम करने का आरोप लगाते हुए एसपी शामली से जांच और कार्रवाई की मांग की।
स्रोत: हिंदुस्तान (16 अक्टूबर 2026), रॉयल बुलेटिन (16 अक्टूबर 2026), किसान तक (9 अक्टूबर 2026), अमर उजाला (13 अक्टूबर 2026)
