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शाहजहांपुर में बनेगा देश का पहला गन्ना विश्वविद्यालय, कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार

✍️ Aamir Raza · 🗓 03 Nov 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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शाहजहांपुर में बनेगा देश का पहला गन्ना विश्वविद्यालय, कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार

देश का लगभग आधा गन्ना उत्तर प्रदेश में पैदा होता है। फिर भी गन्ने की पढ़ाई, शोध और उद्यम के लिए आज तक देश में कोई अलग विश्वविद्यालय नहीं बना। शाहजहांपुर से 3 नवंबर को आई खबर इस कमी को दूर करने की दिशा में पहला ठोस कदम है। वहां की गन्ना शोध परिषद को देश के पहले गन्ना विश्वविद्यालय में बदलने का प्रस्ताव तैयार करके शासन को भेज दिया गया है।

यह पहल प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना की ओर से हुई है। उन्होंने प्रस्ताव तैयार कराया और शासन को भेजा। खबरों के अनुसार इस विषय पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से चर्चा भी हो चुकी है। अब सबकी नजर कैबिनेट की स्वीकृति पर है। मंजूरी मिलते ही देश को अपना पहला समर्पित गन्ना विश्वविद्यालय मिल जाएगा।

कैबिनेट की मंजूरी के बाद क्या होगा

अभी यह मामला प्रस्ताव के स्तर पर है, इसलिए किसान भाइयों को एक बात साफ समझ लेनी चाहिए। विश्वविद्यालय बनना अभी बाकी है। कैबिनेट की स्वीकृति मिलने के बाद ही स्थापना की औपचारिक प्रक्रिया शुरू होगी।

स्वीकृति के बाद नए संस्थान में गन्ने की खेती, उससे बनने वाले उत्पादों और उद्यम की संभावनाओं से जुड़े विषयों की पढ़ाई और शोध होगा। मतलब यह संस्थान सिर्फ डिग्री देने तक सीमित नहीं रहेगा। बीज से लेकर खेत, मिल में चीनी और उससे आगे एथनॉल जैसे उत्पादों तक, गन्ने की पूरी शृंखला पर यहां काम होगा।

कैबिनेट कब इस प्रस्ताव पर फैसला लेगी, इसकी कोई तारीख अभी सामने नहीं आई है। इसलिए किसी भी तरह की तारीख वाली अफवाह पर भरोसा न करें।

शाहजहांपुर को ही क्यों चुना गया

इस सवाल का जवाब शाहजहांपुर के इतिहास में छिपा है। यहां गन्ने पर शोध की शुरुआत 1912 में एक शोध केंद्र के रूप में हुई थी। सौ साल से ज्यादा समय से यह परिषद गन्ने की नई प्रजातियों, रोगों और खेती की तकनीक पर काम कर रही है। इतनी लंबी शोध परंपरा देश में और कहीं गन्ने के लिए मौजूद नहीं है।

दूसरी वजह उत्तर प्रदेश का गन्ना उत्पादन है। देश के कुल गन्ना उत्पादन का करीब 45 प्रतिशत हिस्सा अकेले यूपी में होता है। लखनऊ स्थित भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान और शाहजहांपुर की गन्ना शोध परिषद, ये दो संस्थान ही देश में गन्ने की उन्नत प्रजातियां विकसित करने का मुख्य काम करते हैं। जिस राज्य में देश का लगभग आधा गन्ना पैदा होता हो, वहां गन्ने का अपना विश्वविद्यालय होना किसानों के हित में ही है।

परिषद ने अब तक किसानों को क्या दिया

गन्ना शोध परिषद का काम कागजों तक सीमित नहीं रहा है। परिषद ने रेड रॉट रोग के प्रति मध्यम रोग-रोधी अगेती प्रजातियां कोशा 13235, कोशा 18231, कोशा 17231 और कोशा 19231 विकसित की हैं। ये वे किस्में हैं जिन पर रेड रॉट के बढ़ते दबाव के बीच किसानों की उम्मीद टिकी है।

इसके अलावा परिषद की नई प्रजाति कोशा 23232 भी किसानों को वितरित की जा रही है। विश्वविद्यालय बनने से इस तरह के शोध को एक संस्थागत ढांचा मिलेगा। शोधकर्ता, छात्र और खेत, तीनों एक ही व्यवस्था से जुड़ जाएंगे। नई किस्मों के परीक्षण और खेत तक पहुंचने की रफ्तार बढ़ने की उम्मीद है।

किसान के खेत तक इसका सीधा असर क्या पड़ेगा

इस खबर का असली मतलब किसान के खेत पर समझना जरूरी है। पहला असर बीज पर पड़ेगा। शोध और परीक्षण तेज होगा तो रोग-रोधी और ज्यादा पैदावार देने वाली किस्में जल्दी किसानों तक पहुंचेंगी। रेड रॉट जैसी बीमारियों से जूझ रहे इलाकों के लिए यही सबसे बड़ी राहत होगी।

दूसरा असर जानकारी पर पड़ेगा। विश्वविद्यालय से जुड़े वैज्ञानिक और छात्र खाद, सिंचाई, कीट प्रबंधन और मिट्टी की सेहत जैसे विषयों पर खेत तक वैज्ञानिक सलाह पहुंचाएंगे। किसान को हर छोटी समस्या के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।

तीसरा असर युवाओं पर पड़ेगा। गन्ना बहुल इलाकों के युवा गन्ना तकनीक, चीनी उद्योग और एथनॉल जैसे क्षेत्रों की पढ़ाई करके अपने ही क्षेत्र में रोजगार पा सकेंगे। लंबे समय में इससे पूरी गन्ना अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

एक भ्रम से बचें

शाहजहांपुर में विश्वविद्यालय की खबर सुनकर एक भ्रम हो सकता है, इसलिए इसे साफ कर देना जरूरी है। फरवरी 2026 में विधानसभा में शाहजहांपुर के लिए स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय का विधेयक पारित हुआ था। वह सामान्य उच्च शिक्षा का विश्वविद्यालय है, जो मुमुक्षु आश्रम ट्रस्ट की संस्थाओं के उन्नयन से बन रहा है।

गन्ना विश्वविद्यालय उससे अलग प्रस्ताव है। यह पूरी तरह गन्ने पर केंद्रित होगा। दोनों को एक समझने की गलती न करें।

तब तक किसान क्या करें

जब तक कैबिनेट की मंजूरी नहीं मिलती, किसानों को अपनी मौजूदा व्यवस्था पर ही ध्यान रखना चाहिए। नई प्रजातियों के बीज के लिए गन्ना शोध परिषद और स्थानीय गन्ना समितियों से संपर्क बनाए रखें। पर्ची, तौल और सट्टे से जुड़े काम समय पर निपटाते रहें। विश्वविद्यालय की मंजूरी की खबर आते ही उसकी पूरी जानकारी यहां दी जाएगी।

मुख्य बातें

  • शाहजहांपुर की गन्ना शोध परिषद को देश का पहला गन्ना विश्वविद्यालय बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
  • वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना की पहल पर प्रस्ताव तैयार हुआ है, मुख्यमंत्री से चर्चा हो चुकी है, अब कैबिनेट की स्वीकृति का इंतजार है।
  • देश के कुल गन्ना उत्पादन का करीब 45 प्रतिशत उत्तर प्रदेश में होता है, और शाहजहांपुर में 1912 से गन्ना शोध हो रहा है।

स्रोत: दैनिक जागरण (3 नवंबर 2026), लल्लूराम (3 नवंबर 2026), अमर उजाला (शोध परिषद का इतिहास)

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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