₹69,163 करोड़ खर्च, 15 दिन में गन्ना भुगतान: कृषि मंत्री का दावा, खाते से मिलाकर देखें

सोमवार, 12 अक्टूबर को गोरखपुर में एक ऐसा कार्यक्रम हुआ, जहां मंच से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाढ़, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि और चक्रवात से फसल गंवाने वाले नौ लाख से अधिक किसानों के खातों में राहत राशि जारी की। उसी मंच से प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने किसानों को लेकर कई बड़े दावे किए। सबसे बड़ा दावा: योगी सरकार अब तक किसानों पर ₹69,163 करोड़ खर्च कर चुकी है।
दावे मंच से होते हैं, हिसाब किसान के खाते में होता है। इसलिए यहां मंत्री के हर दावे को खोलकर देखेंगे और यह भी बताएंगे कि आप इसे अपने स्तर पर कैसे परख सकते हैं।
₹69,163 करोड़ का हिसाब क्या है
शाही के मुताबिक, मायावती सरकार ने अपने कार्यकाल में किसानों पर ₹10,207 करोड़ और अखिलेश यादव सरकार ने करीब ₹12 हजार करोड़ खर्च किए थे, जबकि मौजूदा सरकार अब तक ₹69,163 करोड़ खर्च कर चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि 2017 में सरकार बनते ही पहली कैबिनेट बैठक में 86 लाख किसानों का ₹36 हजार करोड़ का कर्ज माफ करने का फैसला हुआ था।
ये आंकड़े मंत्री के दावे हैं, किसी स्वतंत्र ऑडिट के नहीं। किसान के लिए असली पैमाना यह तुलना नहीं, अपने गांव तक पहुंची सुविधा है: बीज समय पर मिला या नहीं, बिजली और उर्वरक की किल्लत पड़ी या नहीं।
“105 मिलें 15 दिन में भुगतान कर रही हैं”: दावा ऐसे परखें
मंत्री के मुताबिक 105 मिलें 15 दिन में भुगतान कर रही हैं। पिछली सरकार ने पांच साल में करीब ₹62 हजार करोड़ का गन्ना भुगतान किया था, जबकि उनके कार्यकाल में यह राशि ₹3.25 लाख करोड़ तक पहुंची।
यह दावा सीधे आपकी जेब से जुड़ता है। 15 दिन की गिनती गन्ना तौल के दिन से होती है, मिल के हिसाब वाले दिन से नहीं। पर्ची कटने के 15 दिन बाद भी पैसा न आए, तो ये तीन रास्ते याद रखें:
- टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 पर भुगतान देरी की शिकायत दर्ज कराएं। नंबर आधिकारिक है, काल दर्ज होती है।
- 51969 पर SMS करके अपनी पर्ची और भुगतान की स्थिति जांचें। यह सरकार का आधिकारिक शॉर्टकोड है।
- सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक देरी से भुगतान पर 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का प्रावधान है। यानी 15 दिन से ज्यादा की देरी सिर्फ इंतजार नहीं, आपका कानूनी हक भी है।
पर्ची की तारीख और पैसे आने की तारीख नोट करके रखें। यही दो तारीखें दावे की असली जांच हैं।
₹400/क्विंटल: यह किस सीजन का भाव है
मंत्री ने गन्ने का मूल्य बढ़ाकर ₹400 प्रति क्विंटल करने की बात कही। भ्रम न हो: ₹400 अगेती किस्म का 2025-26 पेराई सत्र का भाव है, जो सरकार पहले ही तय कर चुकी है। यह कोई नया ऐलान नहीं है।
पेराई सत्र 2026-27 सिर पर है, पर इसका SAP अभी घोषित नहीं हुआ है। किसान संगठनों की मांग ₹600 प्रति क्विंटल तक है, लेकिन आधिकारिक घोषणा से पहले ₹400 को ही मौजूदा भाव मानकर चलें।
फसल बीमा और राहत राशि: आपके काम की बात
कार्यक्रम का असल मकसद राहत राशि का वितरण था। शाही ने बताया कि 2017-18 से अब तक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को ₹6,125 करोड़ की क्षतिपूर्ति दी गई है। वर्ष 2025-26 में आपदा से प्रभावित 7.31 लाख किसानों को इस योजना से ₹812.76 करोड़ मिले। बीमा कराने वाले किसानों की संख्या पिछले साल के करीब 18 लाख से बढ़कर इस साल 23 से 24 लाख हो गई है। जालौन में भी योजना के तहत करीब ₹5 करोड़ किसानों के खातों में भेजे जा रहे हैं।
फसल बीमा की बात गन्ना किसान के लिए इसलिए अहम है क्योंकि अतिवृष्टि और जलभराव गन्ने की फसल को भी नुकसान पहुंचाते हैं। अगर आपने इस साल फसल बीमा नहीं कराया है, तो अगले सीजन से पहले अपनी समिति या बैंक से जानकारी जरूर लें।
इसका मतलब किसान के लिए क्या
मंच से बड़े आंकड़े अच्छे लगते हैं, पर गन्ना किसान के लिए इस खबर के तीन ठोस नतीजे हैं। पहला, 15 दिन में भुगतान का दावा आपके पास एक पैमाना देता है: पर्ची की तारीख से गिनती शुरू करें, देरी हो तो टोल-फ्री 1800-121-3203 पर शिकायत दर्ज करें। दूसरा, ₹400 भाव मौजूदा सीजन का है, नए सीजन का SAP अभी आना बाकी है, इसलिए किसी के कहने पर नया भाव मानकर गन्ना न दें। तीसरा, राहत राशि उन्हीं किसानों तक पहुंचती है जिनका रिकॉर्ड दुरुस्त है, यानी सर्वे में अपना नाम और फसल का ब्योरा समय पर दर्ज करवाना ही असली तैयारी है।
मुख्य बातें
- कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही का दावा: योगी सरकार ने किसानों पर अब तक ₹69,163 करोड़ खर्च किए, 105 मिलें 15 दिन में भुगतान कर रही हैं।
- ₹400/क्विंटल 2025-26 सत्र का मौजूदा भाव है; पेराई सत्र 2026-27 का SAP अभी घोषित नहीं हुआ है।
- भुगतान में देरी हो तो टोल-फ्री 1800-121-3203 पर शिकायत करें और 51969 पर SMS से पर्ची-भुगतान की स्थिति जांचें।
स्रोत: IBC24 (12 अक्टूबर 2026), APN News Hindi (12 अक्टूबर 2026), Free Press Journal (12 अक्टूबर 2026)
