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दिवाली से पहले बड़ा फैसला: 16 लाख टन चीनी कोटा 2 दिन पहले जारी, यूपी को 4.51 लाख टन

✍️ Aamir Raza · 🗓 14 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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दिवाली से पहले बड़ा फैसला: 16 लाख टन चीनी कोटा 2 दिन पहले जारी, यूपी को 4.51 लाख टन

पिछले कुछ दिनों में चीनी के थोक भाव पूछने पर एक ही जवाब मिला होगा — भाव चढ़ा है। द हिंदू बिज़नेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 10 दिनों में एक्स-मिल चीनी के भाव करीब 1000 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ गए। कुछ मिलों ने तो 1 से 15 अक्टूबर का बिक्री कोटा ही खत्म कर लिया था, यानी वे चीनी बेचने की स्थिति में ही नहीं थीं। इसी दबाव में केंद्र सरकार हरकत में आई। खाद्य मंत्रालय ने 12 अक्टूबर को फैसला लिया और 13 अक्टूबर की अधिसूचना से 13 से 31 अक्टूबर तक के लिए 16 लाख टन चीनी का बिक्री कोटा जारी कर दिया — तय समय से दो दिन पहले।

उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए यह खबर सीधी अहमियत रखती है। देश की सबसे ज्यादा चीनी मिलें यूपी में हैं, और इस कोटे में यूपी को 4.51 लाख टन का हिस्सा मिला है — महाराष्ट्र के बाद दूसरा सबसे बड़ा। बड़ा सवाल यही है कि इससे चीनी के भाव थमेंगे या नहीं, और किसानों के भुगतान पर क्या असर पड़ेगा।

16 लाख टन का पूरा गणित

अधिसूचना के मुताबिक 13 से 31 अक्टूबर के लिए 16 लाख मीट्रिक टन चीनी बेचने की अनुमति दी गई है। इसमें 14 लाख टन का कोटा देश की 587 चीनी मिलों को मिला है, जबकि 2 लाख टन एडवांस ऑथराइजेशन के तहत आयातित चीनी के लिए दो रिफाइनरियों को दिया गया है।

यह सितंबर में शुरू हुई पखवाड़ा प्रणाली का चौथा आवंटन है। इससे पहले हर महीने एक ही कोटा जारी होता था। अक्टूबर के पहले पखवाड़े में 14 लाख टन का कोटा मिला था, और सितंबर में कुल 26.50 लाख टन दो हिस्सों में बंटा था। दोनों पखवाड़ों को मिलाकर अक्टूबर 2026 में कुल 30 लाख टन चीनी बाजार में उतर सकेगी — अक्टूबर 2025 के पूरे महीने के 24 लाख टन से काफी ज्यादा। सरकार दिवाली से पहले सप्लाई में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती।

यूपी को दूसरा सबसे बड़ा हिस्सा

राज्यवार बंटवारे में महाराष्ट्र को सबसे ज्यादा 4,76,201 टन कोटा मिला है। उत्तर प्रदेश को 4,50,809 टन यानी करीब 4.51 लाख टन मिला है, और कर्नाटक को 2,32,351 टन। इन तीन राज्यों को मिलाकर कुल कोटे का करीब 83 फीसदी बैठता है।

यूपी की मिलों के लिए यह इसलिए अहम है कि सीजन की शुरुआत में ही बड़ी मात्रा में चीनी बेचने की अनुमति मिली है। मिल के खजाने में नकदी जल्दी आएगी तो गन्ने के भुगतान का चक्र भी समय पर घूमेगा।

दो दिन पहले क्यों जारी हुआ कोटा

सरकार ने तय तारीख से दो दिन पहले कोटा जारी किया क्योंकि भाव की तेज़ी ने चिंता बढ़ा दी थी। कई मिलों ने पहले पखवाड़े का बिक्री कोटा खत्म कर लिया था, जिससे बाजार में कमी की अटकलें तेज हुईं और भाव चढ़ने लगे। दिवाली का त्योहार भी करीब है — इस बार 8 नवंबर को — और त्योहारी मांग पहले से दबाव बना रही है।

डीलरों पर भी सख्ती बढ़ाई गई है। 15 अक्टूबर से 30 नवंबर तक कोई डीलर एक जगह पर 1000 क्विंटल से ज्यादा चीनी नहीं रख सकेगा और 15 दिन से ज्यादा स्टॉक नहीं रख सकेगा, ताकि चीनी मिल से बाजार तक लगातार चलती रहे।

मिलों पर कड़ी शर्तें

हर मिल को अपने आवंटन का कम से कम 45 फीसदी पहले सप्ताह में बेचना होगा, और बिक्री के 7 दिनों के अंदर चीनी मिल से डिस्पैच करनी होगी। हर डीलर का खाद्य मंत्रालय के पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य है, और डीलरों को हर शुक्रवार को अपना स्टॉक घोषित करना होगा। अक्टूबर का पी-II रिटर्न दोनों पखवाड़ों को मिलाकर 7 नवंबर तक भरना होगा।

एक अच्छी खबर: जो मिलें अक्टूबर 2026 में पेराई शुरू करेंगी, वे उस महीने बनाई गई चीनी को अक्टूबर और नवंबर में बेच सकेंगी। इससे सीजन की शुरुआत में पेराई करने वाली मिलों को दोहरा फायदा मिलेगा।

किसान के लिए क्या मतलब

पहला असर: मिलों के पास सीजन की शुरुआत में नकदी आएगी तो गन्ना भुगतान की रफ्तार बढ़ने की उम्मीद है। दूसरा: अक्टूबर में पेराई शुरू करने वाली मिलों को दोहरा फायदा मिलेगा, जिससे जल्दी पेराई का चलन बढ़ सकता है और किसानों का गन्ना समय पर उठने की संभावना सुधरेगी।

तीसरी बात साफ-साफ समझना जरूरी है। चीनी के भाव बढ़ने का मतलब यह नहीं कि गन्ने का भाव अपने आप बढ़ जाएगा। 2026-27 सत्र के लिए केंद्र का एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल पहले से तय है, और यूपी के एसएपी 2026-27 की घोषणा अभी बाकी है। बढ़े चीनी भाव किसानों की भाव-वृद्धि की मांग को मजबूत जरूर करते हैं, लेकिन गन्ने का भाव सरकार तय करती है, बाजार नहीं।

किसानों के लिए अभी दो तैयारी जरूरी हैं: गन्ना सर्वे के रिकॉर्ड में रकबा और किस्म का विवरण सही करवा लें, और बैंक खाता सक्रिय व आधार से लिंक रखें ताकि भुगतान आते ही खाते में पहुंचे।

मुख्य बातें

  • 13 से 31 अक्टूबर के लिए 16 लाख टन चीनी बिक्री कोटा जारी — 14 लाख टन 587 मिलों को, 2 लाख टन आयातित चीनी के लिए। यूपी को 4.51 लाख टन, दूसरा सबसे बड़ा हिस्सा।
  • भाव की तेज़ी (रिपोर्टों के मुताबिक 10 दिन में करीब 1000 रुपये/क्विंटल) के बाद सरकार ने तय तारीख से दो दिन पहले कोटा जारी किया। दिवाली 8 नवंबर को है।
  • मिलों को पहले सप्ताह में 45 फीसदी कोटा बेचना होगा। चीनी भाव बढ़ने से गन्ना भाव अपने आप नहीं बढ़ेगा — यूपी के एसएपी 2026-27 की घोषणा अभी बाकी है।

स्रोत: द हिंदू बिज़नेसलाइन, चीनिमंडी, बिज़नेस स्टैंडर्ड — 12–14 अक्टूबर 2026

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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