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मिलों को 15 नवंबर तक कोटे से ज़्यादा चीनी बेचने की छूट, यूपी किसानों को राहत की उम्मीद

✍️ Aamir Raza · 🗓 01 Nov 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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मिलों को 15 नवंबर तक कोटे से ज़्यादा चीनी बेचने की छूट, यूपी किसानों को राहत की उम्मीद

मिल चलेगी तो चीनी बनेगी, चीनी बिकेगी तो पैसा आएगा, और पैसा आएगा तो भुगतान होगा। गन्ना किसान की यही सीधी गणना है, और इसी से जुड़ी बड़ी खबर केंद्र सरकार के नए आदेश से आई है। सरकार ने मिलों को 15 नवंबर 2026 तक बनी चीनी को तय कोटे से ऊपर बेचने की अनुमति दे दी है। यानी नवंबर के पहले पखवाड़े में मिलें अपनी तय सीमा से ज़्यादा चीनी बाजार में उतार सकेंगी।

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने यह आदेश 30 अक्टूबर 2026 को जारी किया था। इसके मुताबिक, 1 से 15 नवंबर के बीच मिलें 15 नवंबर तक बनी चीनी को अपने नियमित कोटे के अतिरिक्त बेच सकती हैं। यह छूट अक्टूबर में पेराई शुरू करने वाली और नवंबर में शुरू करने वाली, दोनों तरह की मिलों पर लागू है।

यूपी को मिला 4.17 लाख टन का कोटा

नवंबर के पहले पखवाड़े के लिए देशभर की 587 चीनी मिलों के लिए कुल 13 लाख टन चीनी का नियमित बिक्री कोटा तय किया गया है। सबसे बड़ा हिस्सा महाराष्ट्र का है, जिसे 4,77,707 टन मिला है। दूसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश है, जिसका कोटा 4,17,290 टन है, और कर्नाटक को 2,63,439 टन मिला है। दो रिफाइनरियों को इस बार कोई कोटा नहीं दिया गया है।

यूपी का कोटा देश के कुल कोटे का लगभग एक तिहाई है। प्रदेश में 122 चीनी मिलें हैं, और इनकी बिक्री की रफ्तार का असर सीधे किसानों के भुगतान पर पड़ता है।

किसान पर इसका क्या असर पड़ेगा

चीनी मिलों की सबसे बड़ी दिक्कत अक्सर नकदी की होती है। चीनी गोदाम में पड़ी रहे और बिके नहीं, तो मिल के पास किसानों को भुगतान करने के लिए पैसा नहीं आता। कोटे से ऊपर बेचने की छूट से मिलों को नई चीनी जल्दी बेचने का मौका मिलेगा, जिससे नकदी की स्थिति और भुगतान की रफ्तार, दोनों सुधर सकते हैं।

नवंबर में देश में चीनी की खपत ज़्यादा रहती है, इसलिए सरकार का तर्क है कि बाजार में उपलब्धता बनी रहे और भाव में अचानक उछाल न आए। किसान के लिए इसका सीधा मतलब यह है कि उसकी फसल से बनी चीनी का बाजार समय पर खुला रहेगा।

लेकिन एक सावधानी भी ज़रूरी है। बिक्री की छूट भुगतान की गारंटी नहीं है। पैसा किसान तक कितनी जल्दी पहुंचेगा, यह मिल के भुगतान के रिकार्ड पर निर्भर करेगा। जिन मिलों पर पिछले सत्र का बकाया है, वहां किसानों को समिति और जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय से लगातार संपर्क बनाए रखना चाहिए।

2026-27 के गन्ना मूल्य की घोषणा अभी बाकी है

इस बीच एक बात साफ रखना ज़रूरी है कि पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ने के मूल्य की घोषणा अभी नहीं हुई है। पिछले सत्र 2025-26 का मूल्य अगैती के लिए 400 रुपये और पछेती के लिए 390 रुपये प्रति क्विंटल था। यह पिछले सत्र की दर है, इसे नए सत्र की दर न समझें, और नई घोषणा से पहले इस पर कोई बड़ा सौदा न करें।

छूट के साथ शर्तें भी लगी हैं

सरकार ने यह छूट बिना शर्त नहीं दी है। बेची गई चीनी को बिक्री के 7 दिनों के अंदर मिल से भेजना होगा, और बिक्री की तारीख वही मानी जाएगी जिस दिन मिल बिल बनाएगी। मिलों को 15 नवंबर तक की बिक्री का पूरा विवरण 18 नवंबर 2026 तक जमा करना होगा, और अक्टूबर का मासिक विवरण 7 नवंबर तक दाखिल करना है। डीलरों को भी विभाग के पोर्टल पर पंजीकृत होना होगा और हर शुक्रवार को स्टॉक की जानकारी देनी होगी, ताकि अतिरिक्त बिक्री के नाम पर जमाखोरी या भाव में हेरफेर न हो।

पेराई की रफ्तार अभी धीमी है

इस छूट का पूरा फायदा तभी मिलेगा जब मिलें ठीक से चलें। अक्टूबर के आखिर तक देशभर में 107 मिलों ने पेराई शुरू की थी, जिनमें महाराष्ट्र की 87 और यूपी की केवल दो मिलें थीं। अक्टूबर के आखिर की बारिश ने यूपी में पेराई को पीछे धकेल दिया है, और पश्चिमी यूपी की ज़्यादातर मिलें नवंबर के पहले और दूसरे सप्ताह में चलने की उम्मीद है।

उधर प्रदेश में चीनी का भंडार पर्याप्त बताया जा रहा है। विभाग की जानकारी के मुताबिक, यूपी के गोदामों में 70.64 लाख क्विंटल चीनी का स्टॉक मौजूद है, जिसमें सहकारी मिलों के पास 13.40 लाख क्विंटल है। यानी बाजार में कमी की आशंका फिलहाल नहीं है, और यही वजह है कि सरकार नियंत्रण के साथ छूट का रास्ता भी खोल रही है।

किसान इन बातों पर नज़र रखें

अपनी मिल की पेराई और तौल की तारीख समिति से ज़रूर पूछ लें। बिक्री की छूट से मिल की नकदी सुधर सकती है, पर भुगतान का सवाल तौल पर्ची और मिल के रिकार्ड से ही सुलझेगा। पर्ची मिलने पर उस पर लिखी तारीख और केंद्र का नाम ध्यान से देख लें, गलत दिन पहुंचने पर लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।

गन्ना भुगतान या पर्ची की शिकायत के लिए जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय या अपनी गन्ना समिति से संपर्क करें। टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। गन्ने के भाव को लेकर फैलने वाली अफवाहों पर ध्यान न दें, जब तक 2026-27 के मूल्य की आधिकारिक घोषणा नहीं होती, किसी भी नई दर को पक्का न मानें।

मुख्य बातें

  • केंद्र सरकार ने मिलों को 15 नवंबर तक बनी चीनी कोटे से ऊपर बेचने की अनुमति दी है, आदेश 30 अक्टूबर 2026 को जारी हुआ।
  • नवंबर के पहले पखवाड़े के लिए देश का नियमित कोटा 13 लाख टन है, जिसमें यूपी का हिस्सा 4,17,290 टन है।
  • छूट से मिलों की नकदी सुधर सकती है, पर यह भुगतान की गारंटी नहीं है; 2026-27 के गन्ना मूल्य की घोषणा अभी बाकी है।

स्रोत: रूरल वॉयस (31 अक्टूबर 2026), चिनीमंडी (30 अक्टूबर 2026), एग्रीइनसाइट (30 अक्टूबर 2026)।

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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