सर्दी में गन्ने को पानी 20-25 दिन पर दें: वजन घटेगा नहीं, चीनी भी बचेगी

नवंबर की सुबह खेत में खड़े किसान के मन में एक सवाल अक्सर आता है। गन्ना हरा-भरा खड़ा है, ऊपर से ठंड बढ़ रही है, तो पानी दें या कुछ दिन और रुक जाएं। गर्मी वाला हिसाब सर्दी में चलाया तो नुकसान तय है। पानी कम पड़ा तो कल्ले सूखने लगते हैं और वजन घटता है। पानी ज्यादा पड़ा तो जड़ें गलने लगती हैं और पकने की रफ्तार धीमी हो जाती है, जिससे रस में चीनी की मात्रा पर असर पड़ता है।
सर्दी में गन्ने की प्यास क्यों बदल जाती है
गर्मी में धूप तेज होती है और मिट्टी से पानी जल्दी उड़ता है। इसलिए गर्मी में गन्ने को 10 से 15 दिन के अंतर पर पानी देना पड़ता है। सर्दी में धूप नरम पड़ जाती है, रातें लंबी हो जाती हैं और मिट्टी में नमी देर तक टिकी रहती है। फसल की बढ़वार भी धीमी हो जाती है। इसलिए सर्दी में पानी की जरूरत अपने आप कम हो जाती है।
भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ से जुड़ी सलाह के अनुसार सर्दियों में 20 से 25 दिन के अंतर पर सिंचाई करना ठीक रहता है। तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय के गन्ना विशेषज्ञ तंत्र में भी सर्दी के लिए 25 से 30 दिन का अंतर बताया गया है। मतलब साफ है। सर्दी में गन्ने को गर्मी जितनी बार पानी देने की जरूरत नहीं है। अपने खेत की मिट्टी देखकर 20 से 25 दिन के बीच का अंतर चुनना सबसे सुरक्षित रहता है।
किस खेत में कितना अंतर रखें
हर खेत एक जैसा नहीं होता, इसलिए एक ही कैलेंडर सब पर लागू नहीं होगा। बलुई या हल्की मिट्टी पानी जल्दी छोड़ देती है। ऐसे खेत में अंतर थोड़ा कम रखें, करीब 20 दिन के आसपास। चिकनी या भारी मिट्टी नमी देर तक संभालकर रखती है। वहां 25 दिन तक भी इंतजार किया जा सकता है, बशर्ते मिट्टी में नमी बनी हुई दिखे।
शरदकालीन गन्ना, यानी सितंबर-अक्टूबर में बोया गया नया गन्ना, सर्दी में अभी छोटा होता है और उसकी जड़ें गहरी नहीं गई होतीं। ऐसे खेत को पूरी तरह सूखने न दें। 20 से 25 दिन के अंतर के साथ हल्की सिंचाई करते रहें, ताकि कल्ले निकलने की प्रक्रिया रुके नहीं। जिस खेत में गन्ने के बीच सरसों, आलू या गेहूं जैसी सहफसल लगी है, वहां हिसाब सहफसल से भी तय होगा।
मिट्टी खुद बता देगी, बस जांचना सीख लें
कैलेंडर से ज्यादा भरोसेमंद मिट्टी की जांच है। सिंचाई से एक दिन पहले 10 से 12 सेंटीमीटर गहराई से मिट्टी उठाएं और मुट्ठी में दबाकर देखें। मिट्टी से लड्डू बन जाए और हाथ पर नमी महसूस हो, तो अभी पानी की जरूरत नहीं है। मिट्टी हाथ में बिखर जाए और पूरी तरह सूखी लगे, तो सिंचाई का समय आ गया है। दोपहर में पत्तियां मुरझाई दिखें और मिट्टी सूखी हो, तो सिंचाई टालना नुकसान देगा।
पाले वाली रात से पहले हल्की सिंचाई
पाले की आशंका वाली रात से पहले हल्की सिंचाई करना सर्दी का सबसे पुराना और आजमाया उपाय है। गीली मिट्टी में गर्मी देर तक टिकी रहती है, जबकि सूखी मिट्टी रात में जल्दी ठंडी हो जाती है। कृषि विज्ञान केंद्रों की सलाह के अनुसार पाले की संभावना वाले दिनों में खेत में हल्की सिंचाई करते रहना चाहिए, ताकि मिट्टी का तापमान नीचे न गिरे।
यहां हल्की शब्द पर ध्यान दें। खेत में पानी भरना जरूरी नहीं है। बस इतनी नमी चाहिए कि मिट्टी ठंडी रात में भी थोड़ी गर्म बनी रहे। पाले की आशंका वाली रात को खेत में गुड़ाई या जुताई करने से बचें, क्योंकि खुली मिट्टी से गर्मी जल्दी निकल जाती है। बीज के लिए रखे गन्ने वाले खेत में इस बात का खास ध्यान रखें, क्योंकि पाला बीज की आंखें खराब कर देता है।
कटाई के करीब पानी घटाएं, फिर बंद करें
गन्ना जब पकने की अवस्था में पहुंचता है, तो उसे पानी की जरूरत और कम हो जाती है। इस दौर में मिट्टी की नमी धीरे-धीरे घटने देना ही ठीक रहता है। इससे फसल की बढ़वार थमती है और रस में चीनी की मात्रा बढ़ने में मदद मिलती है। कटाई से करीब 15 दिन पहले सिंचाई बंद कर देने की सलाह कृषि विशेषज्ञ देते हैं।
इसका फायदा दोतरफा है। कटाई के समय खेत सूखा रहता है, जिससे मजदूरों और ट्रॉली की आवाजाही आसान हो जाती है। साथ ही सूखे खेत का गन्ना वजन और चीनी दोनों के लिहाज से बेहतर रहता है। जो किसान कटाई से दो-चार दिन पहले तक भारी सिंचाई करते रहते हैं, वे अनजाने में अपनी ही चीनी प्रतिशत घटा लेते हैं।
पेड़ी वाले खेत का हिसाब इससे अलग है। कटाई के बाद पेड़ी के फूटाव के लिए मिट्टी में नमी बनी रहनी चाहिए। कटाई के तुरंत बाद खेत पूरी तरह सूखा पड़ा हो तो पेड़ी को हल्की सिंचाई दे दें, ताकि नए कल्ले समय पर फूटें। पेड़ी की सिंचाई भी हल्की ही रखें, क्योंकि पानी भरने से ठूंठ सड़ने का खतरा बढ़ जाता है।
नवंबर-दिसंबर का छोटा कैलेंडर
हर हफ्ते एक बार मिट्टी की मुट्ठी जांच करें, भले ही सिंचाई का दिन न हो। शीतलहर की चेतावनी मिले तो उसी दिन हल्की सिंचाई कर दें, रात का इंतजार न करें। कटाई की तारीख तय होते ही उस खेत की सिंचाई का हिसाब उल्टा गिन लें, ताकि कटाई से 15 दिन पहले पानी बंद हो जाए। 20 से 25 दिन का यह छोटा सा नियम अपनाकर किसान पानी और डीजल भी बचा सकता है और गन्ने का वजन और चीनी दोनों भी बचा सकता है।
मुख्य बातें
- सर्दी में गन्ने को 20-25 दिन के अंतर पर पानी दें, गर्मी वाला 10-15 दिन का अंतर सर्दी में नुकसान देगा।
- पाले की आशंका वाली रात से पहले हल्की सिंचाई करें, खेत में पानी भरने की जरूरत नहीं है।
- कटाई से करीब 15 दिन पहले सिंचाई बंद करें, ताकि चीनी की मात्रा बढ़े और कटाई आसान हो।
स्रोत: भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ से जुड़ी शरदकालीन गन्ना सलाह; तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय गन्ना विशेषज्ञ तंत्र (सिंचाई प्रबंधन); कृषि विज्ञान केंद्रों की शीतलहर व पाला सलाह।
