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SAP 2026-27: गन्ने पर ₹10-20 बढ़ोतरी की चर्चा, किसान अड़े ₹500 पर

✍️ Aamir Raza · 🗓 04 Nov 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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SAP 2026-27: गन्ने पर ₹10-20 बढ़ोतरी की चर्चा, किसान अड़े ₹500 पर

पेराई सत्र शुरू हो चुका है, मिलों में गन्ना पहुंचने लगा है, लेकिन एक सवाल अब भी हवा में लटका है। इस सत्र के गन्ने का दाम क्या होगा? 3 नवंबर को आई बिज़नेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश सरकार 2026-27 सत्र के लिए गन्ने के राज्य परामर्श मूल्य (SAP) में ₹10 से ₹20 प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी पर विचार कर रही है।

यह साफ कर देना जरूरी है कि यह अभी कोई घोषित फैसला नहीं है। 2026-27 के SAP की आधिकारिक घोषणा अब तक नहीं हुई है। अंतिम मुहर राज्य मंत्रिमंडल को लगानी है।

₹10-20 की चर्चा कहां से आई

बिज़नेस स्टैंडर्ड की 3 नवंबर की रिपोर्ट में कहा गया है कि बढ़ोतरी की मात्रा पर अभी सहमति नहीं बनी है, लेकिन सूत्रों के अनुसार यह ₹10 से ₹20 प्रति क्विंटल के बीच रह सकती है। गांव जंक्शन की उसी दिन की रिपोर्ट में भी यही बात दोहराई गई है कि सरकार चालू पेराई सत्र के लिए SAP बढ़ाने पर विचार कर रही है।

अगर यह बढ़ोतरी होती है, तो यह पिछले सत्र की तुलना में छोटी होगी। 2025-26 सत्र में सरकार ने गन्ने के दाम में ₹30 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की थी, जिसे हाल के वर्षों की सबसे बड़ी बढ़ोतरी में से एक माना गया था। उस फैसले के बाद अगैती किस्म का SAP ₹400 प्रति क्विंटल और सामान्य किस्म का ₹390 प्रति क्विंटल तय हुआ था।

किसान संगठन क्यों ₹500 पर अड़े हैं

किसान संगठनों को ₹10-20 की चर्चा से संतोष नहीं है। भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष नरेश टिकैत ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा कि लागत में भारी इजाफा हुआ है, इसलिए चालू सत्र के लिए SAP में ₹50 से ₹100 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी होनी चाहिए।

23 अक्टूबर को लखनऊ के डालीबाग स्थित गन्ना संस्थान में हुई किसान मजदूर महापंचायत में भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने गन्ने का लाभकारी मूल्य ₹500 प्रति क्विंटल से अधिक करने की मांग उठाई थी।

किसानों का तर्क सीधा है। डीजल, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और मजदूरी, सब महंगा हुआ है। इंडिया टुडे हिंदी की 27 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार किसान संगठनों का आकलन है कि पौध और पेड़ी फसल को मिलाकर इस सत्र में गन्ने की औसत उत्पादन लागत करीब ₹2,22,520 प्रति हेक्टेयर पहुंच गई है, जबकि पिछले वर्ष यह ₹2,12,043 थी।

मिल मालिकों का पक्ष क्या है

दूसरी तरफ चीनी मिलें किसी भी बढ़ोतरी के पक्ष में नहीं दिख रहीं। बिज़नेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक निजी चीनी मिलें दाम यथावत रखने की मांग कर रही हैं। उनका कहना है कि उत्पादन लागत और चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य के बीच संतुलन बनाना पहले ही मुश्किल हो रहा है।

गांव जंक्शन की रिपोर्ट बताती है कि इस मुद्दे पर मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में राज्य परामर्शित मूल्य सिफारिश समिति की बैठक हुई, जिसमें दोनों पक्षों ने अपनी दलीलें रखीं। चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण ने संकेत दिया है कि अंतिम परामर्श बैठक जल्द होगी, और उसके बाद ही प्रस्ताव कैबिनेट के पास भेजा जाएगा।

सियासी दबाव भी एक वजह

इस पूरे मामले में 2027 के विधानसभा चुनाव की छाया भी दिख रही है। बिज़नेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट में कहा गया है कि चुनाव से कुछ महीने पहले सरकार करीब 50 लाख गन्ना किसानों को साधने की कोशिश के तहत दाम बढ़ाने पर विचार कर रही है। भाजपा की सहयोगी राष्ट्रीय लोक दल ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर 2026-27 के लिए SAP बढ़ाने की मांग की है।

FRP और SAP में फर्क समझिए

कई किसान FRP और SAP को एक समझ लेते हैं, लेकिन दोनों अलग हैं। केंद्र सरकार ने 2026-27 सत्र के लिए गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) ₹365 प्रति क्विंटल तय किया है, जो 10.25 प्रतिशत बेसिक रिकवरी पर लागू होगा। SAP इससे अलग है। उत्तर प्रदेश जैसे कुछ राज्य अपने किसानों को FRP से अधिक मूल्य देते हैं, जिसे राज्य परामर्श मूल्य कहा जाता है। मिलों को किसानों से गन्ना इसी SAP पर खरीदना होता है।

किसान पर इसका क्या असर पड़ेगा

अगर सरकार ₹10-20 की बढ़ोतरी करती है, तो एक क्विंटल पर किसान को इतना ही अतिरिक्त मिलेगा। सौ क्विंटल गन्ना बेचने वाले किसान के हाथ में ₹1,000 से ₹2,000 अतिरिक्त आएंगे। वहीं ₹500 की मांग पूरी होती तो यही रकम ₹10,000 तक पहुंच जाती। फर्क यहीं से समझ आता है कि किसान संगठन छोटी बढ़ोतरी से खुश क्यों नहीं हैं।

आगे क्या होगा

अब सबकी नजर अंतिम परामर्श बैठक और उसके बाद कैबिनेट के फैसले पर है। सूत्रों के हवाले से ₹10-20 की चर्चा है, किसान ₹50-100 की बढ़ोतरी मांग रहे हैं, मिलें यथावत दाम चाहती हैं। इन तीनों के बीच कैबिनेट को संतुलन बनाना है।

किसानों को सलाह यही है कि किसी भी व्हाट्सऐप मैसेज या अफवाह पर भरोसा न करें। जब तक सरकार की ओर से आधिकारिक घोषणा न हो, ₹10-20 की बढ़ोतरी को पक्का दाम न समझें।

मुख्य बातें

  • 2026-27 सत्र के लिए UP में SAP की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है; सरकार ₹10-20 प्रति क्विंटल बढ़ोतरी पर विचार कर रही है।
  • 2025-26 में अगैती का SAP ₹400 और सामान्य का ₹390 प्रति क्विंटल था, जिसमें ₹30 की बढ़ोतरी हुई थी।
  • किसान संगठन ₹500 प्रति क्विंटल की मांग कर रहे हैं, जबकि चीनी मिलें दाम यथावत रखना चाहती हैं; अंतिम फैसला कैबिनेट लेगा।

स्रोत: बिज़नेस स्टैंडर्ड (3 नवंबर 2026), गांव जंक्शन (3 नवंबर 2026), इंडिया टुडे हिंदी (27 अक्टूबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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