₹90 करोड़ बकाया: 10 गांवों ने बजाज गांगनौली मिल को गन्ना देने से किया इनकार

पेराई सत्र 2026-27 के दरवाजे पर होने के बावजूद सहारनपुर के किसान पुराने भुगतान के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सहकारी गन्ना विकास समिति सहारनपुर की वार्षिक सामान्य निकाय बैठक में गन्ना सुरक्षण का मुद्दा ऐसा गरमाया कि किसानों ने मिल के खिलाफ खुला विरोध दर्ज करा दिया। सबसे ज्यादा आक्रोश बजाज समूह की गांगनौली चीनी मिल को गन्ना आवंटित किए जाने को लेकर दिखा।
हिंदुस्तान की 25 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक में किसानों ने बकाया गन्ना मूल्य का मुद्दा उठाते हुए साफ मांग रखी। गांगनौली मिल का गन्ना क्षेत्र काटकर देवबंद और बिड़वी चीनी मिलों को आवंटित किया जाए। यानी किसान इस मिल से अपना नाता तोड़ने की कगार पर हैं।
10 गांवों का लिखित प्रस्ताव
समिति सचिव अजीत कुमार सिंह के अनुसार, 10 गांवों के किसानों ने लिखित प्रस्ताव देकर बजाज गांगनौली मिल को गन्ना आवंटन नहीं किए जाने की मांग की। इन गांवों में घाटेड़ा, उमरी कलां, पिलखनी, सढ़ौली हरिया, पहांसू, भांकला, जंधेड़ा, सरकड़ी, दीपाखेड़ी और लाखनौर शामिल हैं।
किसानों का कहना है कि गांगनौली मिल पर अभी भी करीब 90 करोड़ रुपये से अधिक का गन्ना मूल्य बकाया है। भुगतान में बार-बार देरी से नाराज किसानों ने ऐलान किया है कि वे इस मिल को गन्ना नहीं देंगे। उनका गन्ना देवबंद, बिड़वी समेत अन्य मिलों को आवंटित किया जाए।
यह विरोध हवा में नहीं उठा है। न्यूज18 की 26 अगस्त 2026 की रिपोर्ट में गांगनौली बजाज शुगर मिल पर 98 करोड़ 45 लाख रुपये बकाया बताया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक यह बकाया ताजा नहीं, बल्कि 2025 से रुका हुआ है। किसानों का कहना है कि वे महीनों से अधिकारियों से मिल रहे हैं, ज्ञापन दे रहे हैं, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला।
छह मिलों के सुरक्षण प्रस्तावों पर चर्चा
बोर्ड बैठक में क्षेत्र की छह चीनी मिलों बिडवी, शेरमऊ, गांगनौली, देवबंद, गागलहेड़ी और सरसावा के गन्ना क्षेत्र सुरक्षण प्रस्तावों पर चर्चा हुई। गन्ना सुरक्षण यानी कौन सी मिल किस गांव का गन्ना लेगी, इसका फैसला। किसानों के लिए यह फैसलाकुन है, क्योंकि जिस मिल को क्षेत्र मिलता है, वहीं का गन्ना क्रय केंद्र उनके खेत से जुड़ता है।
बैठक में गांगनौली, बिडवी, देवबंद और शेरमऊ चीनी मिलों के प्रतिनिधि मौजूद रहे, जबकि गागलहेड़ी और सरसावा मिल का कोई प्रतिनिधि नहीं पहुंचा। दया शुगर गागलहेड़ी मिल के प्रतिनिधि की गैरमौजूदगी पर किसानों ने मिल संचालन को लेकर सवाल उठाए। उनकी मांग थी कि गन्ना डायवर्जन (दूसरी मिलों को गन्ना भेजने) की बजाय आगामी पेराई सत्र में गागलहेड़ी मिल खुद चलाई जाए।
किसान पर इसका क्या असर पड़ेगा
बकाया भुगतान का दर्द किसान की जेब पर सीधा पड़ता है। सरकार का नियम है कि गन्ना देने के 15 दिन के भीतर मिल को भुगतान करना होता है, और देरी पर ब्याज देना होता है। लेकिन सहारनपुर में यह नियम कागज पर रह गया है। न्यूज18 की रिपोर्ट बताती है कि न तो समय पर भुगतान होता है, न ही देरी पर ब्याज मिलता है। किसानों के लिए गन्ना उनकी एफडी जैसा है, जिसे मिल महीनों तक दबाए रखती है।
अब जबकि नया पेराई सत्र शुरू होने वाला है, गन्ना सुरक्षण का फैसला तय करेगा कि अगले एक साल तक किसानों का गन्ना किस मिल को जाएगा। जिन 10 गांवों ने प्रस्ताव दिया है, उनकी कोशिश है कि उनका क्षेत्र बजाज गांगनौली से हटकर समय पर भुगतान करने वाली मिलों को मिले। अगर प्रस्ताव मंजूर होता है, तो इन गांवों के किसानों को नए सत्र में राहत मिल सकती है।
बोर्ड बैठक का निर्णय
बोर्ड बैठक की अध्यक्षता कर रहे समिति अध्यक्ष चौ. मनोज पुंडीर ने किसानों को आश्वासन दिया कि प्राप्त सभी प्रस्तावों को गंभीरता से लेते हुए गन्ना एवं चीनी आयुक्त को भेजा जाएगा और किसानों के हित में लखनऊ स्तर तक प्रभावी पैरवी की जाएगी।
यूपी में कुल 122 चीनी मिलें हैं और बकाया भुगतान की समस्या केवल सहारनपुर तक सीमित नहीं है। हाल के दिनों में बिजनौर, शामली, बरेली और मुरादाबाद के किसान भी भुगतान को लेकर आवाज उठा चुके हैं। पेराई सत्र से ठीक पहले गन्ना सुरक्षण की यह लड़ाई बताती है कि किसान अब मिल चुनने की आजादी चाहते हैं, न कि जबरन उसी मिल से बंधना जो उनका पैसा रोककर बैठी हो।
मुख्य बातें
- सहारनपुर गन्ना समिति की बैठक में बजाज की गांगनौली मिल को गन्ना आवंटन पर तीखा विरोध।
- 10 गांवों (घाटेड़ा, उमरी कलां, पिलखनी सहित) ने लिखित प्रस्ताव देकर मिल को गन्ना न देने का ऐलान किया।
- मिल पर करीब ₹90-98 करोड़ का बकाया; किसानों की मांग गन्ना क्षेत्र देवबंद-बिड़वी मिलों को मिले।
- समिति अध्यक्ष चौ. मनोज पुंडीर ने प्रस्ताव गन्ना आयुक्त को भेजकर लखनऊ स्तर पर पैरवी का आश्वासन दिया।
स्रोत: हिंदुस्तान (सहारनपुर संस्करण), 25 सितंबर 2026; न्यूज18 हिंदी, 26 अगस्त 2026
