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सहारनपुर: ₹88.51 करोड़ बकाया पर बजाज गांगनौली को डीएम की 2 दिन की मोहलत

✍️ Aamir Raza · 🗓 07 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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सहारनपुर: ₹88.51 करोड़ बकाया पर बजाज गांगनौली को डीएम की 2 दिन की मोहलत

पिछले पेराई सत्र का गन्ना मिल में तुल चुका, खेत से पेड़ी भी उठने को तैयार है, लेकिन किसान का खाता अभी भी पुराने भुगतान का इंतजार कर रहा है। सहारनपुर में बजाज समूह की गांगनौली चीनी मिल पर गत सत्र का ₹88.51 करोड़ का बकाया ऐसे ही नहीं अटका है। अब इस बकाये पर जिलाधिकारी की सीधी कार्रवाई शुरू हो गई है, और मिल प्रबंधन के पास महज दो दिन का समय बचा है।

जिलाधिकारी अरविंद कुमार चौहान की अध्यक्षता में जनपद की सभी चीनी मिलों के यूनिट हेड और अध्यासी के साथ एक अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य दो था: बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान और आगामी पेराई सत्र 2026-27 में चीनी मिलों का समय से संचालन।

सिर्फ गांगनौली पर है बकाया, ₹88.51 करोड़

बैठक में जिला गन्ना अधिकारी शैलेश कुमार मौर्य ने जो आंकड़ा रखा, वह गांगनौली मिल के लिए असहज करने वाला था। जानकारी दी गई कि जनपद सहारनपुर में गत पेराई सत्र 2025-26 का गन्ना मूल्य बकाया सिर्फ बजाज ग्रुप की गांगनौली चीनी मिल पर है, और यह रकम ₹88.51 करोड़ है।

इस पर जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाया। बजाज गांगनौली मिल के यूनिट हेड आर.बी. खोखर को बैठक में कड़ी फटकार लगाई गई। डीएम ने साफ निर्देश दिया कि पेराई सत्र 2025-26 के समस्त बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान नया सत्र शुरू होने से पहले किया जाए।

अक्सर भुगतान में देरी पर “जल्द भुगतान” जैसा नरम आश्वासन मिलता है, लेकिन इस बार निर्देश की भाषा कड़ी है और समय सीमा भी साफ है: नया सत्र लगने से पहले पूरा बकाया।

दो दिन में कार्ययोजना, वरना गन्ना छिनकर दूसरी मिल को

फटकार यहीं नहीं रुकी। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि दो दिवस के अंदर गन्ना मूल्य भुगतान की कार्ययोजना जिला गन्ना अधिकारी के माध्यम से उपलब्ध कराई जाए। कार्ययोजना का मतलब साफ है: कब कितना पैसा आएगा, किस तारीख को किस गांव के किसानों का भुगतान होगा, इसका लिखा-पढ़ी हिसाब।

सबसे कड़ा हिस्सा इसके बाद आया। डीएम ने चेतावनी दी कि अगर कार्ययोजना नहीं मिली या भुगतान नहीं हुआ, तो बजाज चीनी मिल का गन्ना अन्य चीनी मिलों को व्यावर्तित करा दिया जाएगा। व्यावर्तन यानी उस मिल के गन्ना क्षेत्र का गन्ना दूसरी मिलों के क्रय केंद्रों पर भेजा जाना। किसान के लिए इसका मतलब यह होगा कि उसकी पर्ची अब गांगनौली नहीं, बल्कि देवबंद, बिड़वी या किसी और मिल के नाम पर कटेगी।

किसानों के लिए यह दोहरी खबर है। एक तरफ भुगतान की उम्मीद बढ़ी है, दूसरी तरफ अगर मिल समय पर पैसा नहीं दे पाती है तो आपूर्ति व्यवस्था में बदलाव तय है। 10 गांवों के किसानों ने पहले ही लिखित प्रस्ताव देकर कहा है कि वे गांगनौली को गन्ना नहीं देना चाहते। हिंदुस्तान की 25 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक किसान अपने गन्ने का क्षेत्र देवबंद और बिड़वी मिलों को आवंटित कराने की मांग कर चुके हैं। डीएम की यह चेतावनी उसी मांग को प्रशासनिक बल देती है।

मिल रिपेयर की समीक्षा: गागलहेड़ी सबसे पीछे

बैठक में बकाये के साथ-साथ आगामी सत्र की तैयारियों की भी गहन समीक्षा हुई। मिल प्रतिनिधियों ने जो प्रगति बताई, उसके मुताबिक देवबंद चीनी मिल का 82 प्रतिशत, गांगनौली का 89.75 प्रतिशत, शेरमऊ का 79.75 प्रतिशत, गागलहेड़ी का 51.25 प्रतिशत, बिडवी का 80.25 प्रतिशत, नानौता का 75.25 प्रतिशत और सरसावा का 79.75 प्रतिशत मिल रिपेयर का कार्य पूर्ण हो चुका है।

दया शुगर मिल गागलहेड़ी की स्थिति सबसे खराब मिली। सिर्फ 51.25 प्रतिशत काम पूरा होने पर उसके यूनिट हेड को भी कड़ी फटकार लगाई गई। निर्देश दिया गया कि मिल रिपेयर में अपेक्षित प्रगति लाई जाए और चीनी मिल का संचालन नवंबर 2026 के प्रथम सप्ताह तक अनिवार्य रूप से शुरू किया जाए।

किसान पर इसका क्या असर पड़ेगा

पहला सीधा असर यह है कि बकाया भुगतान का मुद्दा अब सिर्फ ज्ञापन और आश्वासन के स्तर से ऊपर उठकर समयबद्ध निर्देश में बदल गया है। दो दिन की कार्ययोजना से किसानों को लिखित में पता चलेगा कि उनका पैसा कब मिलेगा।

दूसरा असर आपूर्ति पर पड़ सकता है। अगर गांगनौली का गन्ना व्यावर्तित होता है, तो प्रभावित गांवों की पर्ची दूसरी मिल के नाम बनेगी। ऐसे में किसानों को गन्ना समिति कार्यालय से यह जरूर पता करना चाहिए कि इस सत्र में उनका गन्ना किस मिल को आवंटित है, ताकि क्रय केंद्र पर भटकना न पड़े। गागलहेड़ी मिल के क्षेत्र के किसानों के लिए भी खबर राहत वाली है, क्योंकि मिल को नवंबर के पहले सप्ताह तक चलाने का निर्देश मिला है।

आगे क्या होगा

बैठक में सभी प्रमुख मिलों के प्रतिनिधि और किसान प्रतिनिधि मौजूद थे, यानी फैसले सभी पक्षों की मौजूदगी में हुए हैं। दो दिन की मोहलत पूरी होने के बाद प्रशासन की नजर कार्ययोजना पर होगी। अगर बजाज प्रबंधन ठोस योजना देता है और भुगतान शुरू होता है, तो किसानों को पुराना पैसा मिलने का रास्ता खुलेगा। और अगर नहीं, तो व्यावर्तन की चेतावनी सिर्फ कागज पर नहीं रहेगी।

मुख्य बातें

  • सहारनपुर में बजाज गांगनौली मिल पर गत सत्र का ₹88.51 करोड़ गन्ना मूल्य बकाया; पूरे जिले में यही एकमात्र बकाया वाली मिल।
  • जिलाधिकारी अरविंद कुमार चौहान ने यूनिट हेड को फटकार लगाकर दो दिन में भुगतान कार्ययोजना मांगी; नया सत्र शुरू होने से पहले पूरा बकाया चुकाने का निर्देश।
  • भुगतान न हुआ तो गन्ना अन्य मिलों को व्यावर्तित कराने की कड़ी चेतावनी; 10 गांव पहले ही गांगनौली को गन्ना न देने का लिखित प्रस्ताव दे चुके हैं।
  • दया शुगर गागलहेड़ी का रिपेयर सिर्फ 51.25% पूरा; नवंबर के पहले सप्ताह तक मिल चलाने का अनिवार्य निर्देश।

स्रोत: रॉयल बुलेटिन (सहारनपुर डीएम बैठक रिपोर्ट), हिंदुस्तान (25 सितंबर 2026, गन्ना सुरक्षण बोर्ड बैठक)।

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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