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गन्ना भाव ₹400 का श्रेय जयंत चौधरी को: मेरठ में बोले रालोद प्रदेश अध्यक्ष

✍️ Aamir Raza · 🗓 20 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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गन्ना भाव ₹400 का श्रेय जयंत चौधरी को: मेरठ में बोले रालोद प्रदेश अध्यक्ष

रविवार को मेरठ में राजनीतिक बयानबाजी के बीच गन्ने का भाव एक बार फिर सुर्खियों में आ गया। राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेश अध्यक्ष ऐश्वर्य राज सिंह ने अपने पहले मेरठ दौरे में दावा किया कि गन्ना भाव ₹400 तक पहुंचाने में केंद्रीय राज्यमंत्री जयंत चौधरी के प्रयासों की बड़ी भूमिका रही है, और आगे भी भाव बढ़वाने के लिए रालोद काम करती रहेगी।

पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में पत्रकार वार्ता में सिंह ने कहा, “राष्ट्रीय लोकदल किसानों और कमेरों की पार्टी है। सरकार में रहकर पार्टी किसानों का वकील बनकर उनके हितों की पैरवी कर रही है।” (दैनिक जागरण) उनके इस बयान के बाद सवाल उठना लाजमी है कि भाव बढ़ाने में किसी पार्टी का दावा कितना वजन रखता है और हकीकत में गन्ने का तय भाव क्या है।

₹400 वाला भाव: घोषणा किसकी, श्रेय किसका?

पहले तथ्य साफ कर लेते हैं। ₹400 प्रति क्विंटल अगेती गन्ने का राज्य परामर्शी मूल्य (SAP) है, जिसे उत्तर प्रदेश सरकार ने पेराई सत्र 2025-26 के लिए तय किया था। अक्टूबर 2025 में तत्कालीन घोषणा के तहत भाव में ₹30 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई थी। सामान्य प्रजाति के गन्ने का भाव ₹390 प्रति क्विंटल तय हुआ। सरकार के अनुमान के मुताबिक इस बढ़ोतरी से प्रदेश के 46.50 लाख गन्ना किसानों को करीब ₹3000 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान मिलना था। (दैनिक भास्कर)

यानी ₹400 का भाव किसी पार्टी की पैरवी का नतीजा नहीं, राज्य सरकार के फैसले का नतीजा था। रालोद यूपी में एनडीए सरकार का हिस्सा है, इसलिए पार्टी इस फैसले में अपना योगदान दिखाना चाहती है। राजनीति में श्रेय लेने की यह परिपाटी नई नहीं है, लेकिन किसान के लिए अहम सवाल यही है कि भाव की घोषणा किसने की, न कि क्रेडिट किसे मिला।

2026-27 सत्र: घोषणा अभी बाकी

अब सबसे बड़ा सवाल: अगले सत्र का भाव क्या होगा? इस मोर्चे पर अभी कोई अच्छी खबर नहीं है। गाँव जंक्शन की 9 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक योगी कैबिनेट की बैठक में गन्ने का भाव बढ़ाने का कोई एलान नहीं हुआ, जबकि सरकार ने गन्ना किसानों को ₹3.30 लाख करोड़ के भुगतान का दावा जरूर रखा।

केंद्र सरकार ने 2026-27 सीजन (अक्टूबर 2026 से सितंबर 2027) के लिए गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) ₹365 प्रति क्विंटल तय किया है, जो पिछले सीजन से ₹10 ज्यादा है। लेकिन यूपी का अपना SAP 2026-27 के लिए अभी घोषित नहीं हुआ है। पेराई सत्र सिर पर है और किसान अभी भी पुराने 2025-26 वाले भाव पर ही नजरें टिकाए बैठे हैं।

भाव बढ़ेगा या नहीं, यह फैसला पूरी तरह राज्य सरकार करेगी, किसी पार्टी के वादे पर नहीं।

किसानों की राय: राहत भी, नाराजगी भी

भाव बढ़ोतरी पर किसानों की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक मेरठ के सरधना क्षेत्र के किसानों ने कहा कि कुछ के लिए यह राहत है, तो कुछ की उम्मीद अधूरी रह गई। भारतीय किसान यूनियन के मंडल उपाध्यक्ष रामबोस दबथुवा ने ₹30 की बढ़ोतरी को अपर्याप्त बताते हुए सरकार से बोनस देने की मांग भी की थी।

ज्यादातर गन्ना किसानों की असली चिंता भाव नहीं, भुगतान है। भाव कितना भी बढ़ जाए, मिल समय पर पैसा न दे तो बढ़ोतरी कागजी रह जाती है। अगर आपका भुगतान अटका है, तो गन्ना विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 या 1800-180-5129 पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

राजनीति की बिसात: 403 सीटें और 2027

मेरठ दौरे में ऐश्वर्य राज सिंह ने 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि रालोद प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर पूरी ताकत से एनडीए उम्मीदवार को जिताने का काम करेगी। सीट बंटवारे पर उन्होंने कहा कि इसका निर्णय रालोद और घटक दलों का संसदीय बोर्ड करेगा।

अध्यक्ष बनने के बाद यह सिंह का पहला मेरठ दौरा था। हापुड़ चुंगी पर उनका स्वागत हुआ और रोहटा में कार्यकर्ता सम्मेलन में उन्होंने शिरकत की। कमिश्नरी चौराहे पर चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा और कचहरी के सामने डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण भी किया। मौके पर बागपत के सांसद डॉ. राजकुमार सांगवान और विधायक गुलाम मोहम्मद समेत कई नेता मौजूद रहे। माल्यार्पण के बाद जब सांसद डॉ. सांगवान नीचे उतरे तो उनके जूते गायब मिले। काफी देर ढूंढने के बाद भी नहीं मिले, आखिरकार उन्हें बिना जूते पहने ही निकलना पड़ा। (दैनिक जागरण)

किसान के लिए इसका मतलब

राजनीतिक बयान अपनी जगह, लेकिन किसान के लिए कुछ ठोस बातें साफ हैं। पहली: मौजूदा भाव ₹400 (अगेती) और ₹390 (सामान्य) पेराई सत्र 2025-26 का है, 2026-27 का भाव अभी घोषित नहीं हुआ। दूसरी: पेराई से पहले अपने सट्टे, पर्ची और पिछले बकाये का हिसाब दुरुस्त कर लें। तीसरी: किसी भी पार्टी के वादे पर भाव बढ़ने की उम्मीद में गन्ना रोकने या जल्दबाजी में बेचने जैसा फैसला न लें, भाव की घोषणा सिर्फ सरकार करती है।

गन्ना सीजन नजदीक है। हर दावे को इसी तराजू पर तौलें: घोषणा किसने की और आपकी जेब पर असर कब पड़ेगा।

मुख्य बातें

  • मेरठ में रालोद प्रदेश अध्यक्ष ऐश्वर्य राज सिंह का दावा: ₹400 भाव तक पहुंचाने में जयंत चौधरी के प्रयासों की भूमिका, आगे भी वृद्धि का वादा।
  • हकीकत: ₹400 अगेती गन्ने का SAP 2025-26 है, जो यूपी सरकार ने अक्टूबर 2025 में घोषित किया था; 2026-27 सत्र के भाव की घोषणा अभी बाकी है।
  • किसानों की असली चिंता भाव से ज्यादा समय पर भुगतान है; पेराई से पहले बकाये का हिसाब दुरुस्त रखें, शिकायत के लिए टोल-फ्री 1800-121-3203 उपलब्ध।

स्रोत: दैनिक जागरण (19 अक्टूबर 2026), नवभारत टाइम्स (18 अक्टूबर 2026), चिनीमंडी (20 अक्टूबर 2026), दैनिक भास्कर (अक्टूबर 2025), गाँव जंक्शन (9 अक्टूबर 2026), किसान सूत्र।

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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