गन्ना भाव पर बड़ी समिति: ₹31 वाला चीनी MSP अब बदलेगा?

title: “गन्ना भाव पर बड़ी समिति: ₹31 वाला चीनी MSP अब बदलेगा?” date: 2026-10-22T06:59:50+0530 description: “केंद्र सरकार ने नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद की अध्यक्षता में समिति बनाई है। किसानों को ज़्यादा भाव और चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य बढ़ाने पर विचार होगा। यूपी के किसानों पर इसका असर समझिए।” categories: [“ताज़ा ख़बर”] tags: [“गन्ना”, “गन्ना भाव”, “चीनी MSP”, “रमेश चंद समिति”, “गन्ना भुगतान”, “किसान”] slug: ramesh-chand-samiti-ganna-moolya-msp-oct-2026 image: /images/news/ramesh-chand-samiti-ganna-moolya-msp-oct-2026.webp keywords: [“गन्ना भाव”, “चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य”, “रमेश चंद समिति”, “गन्ना मूल्य 2026”, “गन्ना भुगतान”, “FRP MSP चीनी”, “यूपी गन्ना किसान”] authors: [“Aamir Raza”]
फरवरी 2019 से चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) वहीं टिका है, ₹31 प्रति किलो। बीच में गन्ना खरीदने का भाव बढ़ा, खाद-डीज़ल महंगे हुए, लेकिन चीनी बेचने का न्यूनतम दाम वही रहा। इस गठजोड़ को लेकर अब केंद्र सरकार ने नीति आयोग के पूर्व सदस्य प्रोफेसर रमेश चंद की अध्यक्षता में एक समिति गठित कर दी है। समिति गन्ना किसानों को मिलने वाले भाव और चीनी के MSP, दोनों पर विचार करेगी।
पूसा में किसान-मंत्री बैठक के बाद बनी समिति
खाद्य मंत्रालय के बयान के मुताबिक समिति का गठन 14 अक्टूबर को हुआ। इससे दो दिन पहले, 12 अक्टूबर को पूसा परिसर में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कर्नाटक और महाराष्ट्र के गन्ना किसान प्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी। बैठक में विभिन्न किसान संगठनों के करीब 80 से 90 किसान और दोनों राज्यों के मंत्री शामिल हुए थे।
किसानों ने लागत बढ़ने का हवाला देते हुए गन्ने का समर्थन मूल्य बढ़ाने की मांग रखी। साथ में मांग आई कि चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य मौजूदा ₹31 प्रति किलो से बढ़ाकर ₹50 प्रति किलो किया जाए। महाराष्ट्र में इस मांग को लेकर प्रदर्शन भी हुआ था, जहां पेराई सीजन के पहले दिन कई मिलें चल नहीं पाईं। समिति किसानों के प्रतिनिधियों, चीनी मिल संघों, राज्य सरकारों और विशेषज्ञों से बात करेगी और जल्द से जल्द रिपोर्ट देगी।
समिति क्या-क्या देखेगी
सिर्फ भाव तक समिति की नजर सीमित नहीं है। खाद्य मंत्रालय के बयान में समिति के काम तय कर दिए गए हैं।
पहला, किसानों को खेती की लागत और दूसरे प्रासंगिक कारकों को ध्यान में रखते हुए ज्यादा लाभकारी मूल्य देने की मांग की समीक्षा। दूसरा, चीनी के एक्स-मिल न्यूनतम बिक्री मूल्य में संशोधन की मांग, जिसमें उत्पादन लागत, बाजार से मिलने वाला दाम और चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति देखी जाएगी।
तीसरा काम तकनीकी है लेकिन किसान के लिए सबसे नजदीकी। समिति चीनी की रिकवरी (गन्ने से निकलने वाली चीनी की मात्रा) की जांच और रिपोर्टिंग व्यवस्था की समीक्षा करेगी। रिकवरी का पारदर्शी सत्यापन कैसे हो, इसके उपाय सुझाएगी। मिलों में गन्ने की तौल की प्रक्रिया भी आकलन के दायरे में है।
चौथा मुद्दा मशीनी कटाई से जुड़ा है। मिलें मशीन से काटे गए गन्ने के वजन में कटौती करती हैं। समिति जांचेगी कि मशीनी कटाई से वास्तव में कोई नुकसान होता भी है या नहीं, होता है तो कितना, और इस कटौती से किसान को मिलने वाले गन्ना मूल्य पर क्या असर पड़ता है।
यूपी के किसान के लिए इसका मतलब क्या
उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है और यहां आधिकारिक तौर पर 122 चीनी मिलें चल रही हैं। पेराई सत्र 2025-26 के लिए यूपी का राज्य परामर्शित मूल्य (SAP) अगेती प्रजाति पर ₹400, सामान्य पर ₹390 और अनुपयुक्त प्रजातियों पर ₹355 प्रति क्विंटल तय किया गया था। यानी यूपी का किसान SAP और केंद्र का FRP, दोनों व्यवस्थाओं के बीच खड़ा है।
यहीं समिति का काम यूपी किसान के लिए अहम हो जाता है। MSP बढ़ा तो मिलों की कमाई बढ़ेगी। मिलों की कमाई बढ़ी तो समय पर भुगतान की संभावना बढ़ेगी, यह वही बिंदु है जहां किसान सबसे ज्यादा चोट खाता है। 14 दिन में भुगतान का नियम कागज पर है, लेकिन व्यवहार में ब्याज समेत करोड़ों का बकाया अटका रहता है। चीनी के ₹31 वाले न्यूनतम बिक्री मूल्य को मिलों की वित्तीय सेहत से जोड़कर समिति इसी कड़ी को सुलझाने की कोशिश करेगी।
अभी बदला कुछ नहीं, इंतजार करना होगा
समिति के गठन को कीमत बदलाव समझने की भूल मत कीजिएगा। खाद्य मंत्रालय का कहना है कि समिति सिफारिशें पेश करेगी, और उसके बाद सरकार फैसला करेगी। MSP बढ़ेगा या नहीं, कितना बढ़ेगा, यह समिति की रिपोर्ट पर निर्भर है। समिति को अपनी रिपोर्ट “जल्द से जल्द” देने को कहा गया है, लेकिन कोई तय तारीख घोषित नहीं हुई है।
मशीन से काटने वाले किसानों के लिए कटौती वाला बिंदु विशेष ध्यान का है। अगर समिति पारदर्शी तौल और कटौती के वैज्ञानिक मानक तय करवा दे, तो हर ट्रॉली पर होने वाले विवाद में किसान की स्थिति मजबूत होगी।
मुख्य बातें
- केंद्र ने 14 अक्टूबर को नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद की अध्यक्षता में गन्ना मूल्य समीक्षा समिति गठित की।
- समिति गन्ने के ज्यादा भाव और फरवरी 2019 से टके हुए ₹31/किलो वाले चीनी MSP में संशोधन पर विचार करेगी।
- रिकवरी जांच, तौल प्रक्रिया और मशीनी कटाई में वजन कटौती की वैधता भी समिति के दायरे में है।
स्रोत: द इकोनॉमिक टाइम्स (पीटीआई), 14 अक्टूबर 2026; आईबीसी24 (भाषा/पीटीआई), 14 अक्टूबर 2026; द ट्रिब्यून (एएनआई), 14 अक्टूबर 2026
