₹4,500 पहली किस्त नहीं तो मिल बंद: 185 किमी रैली के बाद कोल्हापुर में 80 ट्रैक्टर रोके गए

रविवार की रात मिरज-सोलापुर रोड पर भोसे के पास करीब 80 ट्रैक्टर रुक गए। उन पर गन्ना लदा था, मंजिल एक निजी मिल थी, लेकिन रास्ता आंदोलन ने रोक लिया। राजू शेट्टी के बेटे सौरभ शेट्टी मौके पर पहुंचे और किसानों से अपील की कि कटाई के लिए गन्ना न भेजा जाए। यह एक रात की घटना नहीं थी। यह उस दिन की कहानी का अगला पड़ाव था, जिस दिन कोल्हापुर जिले में किसानों ने मोटरसाइकिलों पर 185 किलोमीटर का सफर तय किया था।
हातकणंगले से शुरू हुई 185 किलोमीटर की रैली
रैली की शुरुआत 25 अक्टूबर की सुबह हातकणंगले में तहसीलदार कार्यालय के बाहर से हुई। स्वाभिमानी शेतकरी संघटना के अध्यक्ष और पूर्व सांसद राजू शेट्टी के नेतृत्व में किसान और कार्यकर्ता मोटरसाइकिलों के साथ जुटे। रवाना होने से पहले छत्रपति शिवाजी महाराज, महात्मा जोतिबा फुले और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमाओं पर पुष्पहार चढ़ाए गए।
इसके बाद काफिला नरंदे स्थित शरद सहकारी चीनी कारखाने और वारणानगर स्थित वारणा चीनी कारखाने से होता हुआ गुजरा। रैली शिरोळ, हातकणंगले, शाहूवाडी, करवीर, कागल और भुदरगड तहसीलों से होकर कसबा सांगाव में समाप्त हुई।
मांग का गणित: पहली किस्त 4,500 और दूसरी 500
रैली की सबसे सीधी मांग पहली किस्त के रूप में ₹4,500 प्रति टन गन्ना मूल्य की थी। इसके साथ ₹500 प्रति टन दूसरी किस्त की मांग भी जुड़ी है। दोनों को जोड़ें तो कुल मांग ₹5,000 प्रति टन तक पहुंचती है। शेट्टी की चेतावनी भी उतनी ही सीधी है। जब तक पहली किस्त की घोषणा नहीं होती, तब तक मिलों को चलने नहीं दिया जाएगा।
इस मांग के पीछे खेती की लागत का तर्क है। शेट्टी का कहना है कि खेती का खर्च बढ़ा है, रिकवरी घटी है और रास्ते में गन्ने का वजन भी घटता है। इसीलिए संघटना पहली किस्त को ही आंदोलन की धुरी बना रही है, क्योंकि पहली किस्त तय हो जाए तो किसान को सीजन की शुरुआत में ही भरोसा मिल जाता है।
चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य की मांग भी इसी लड़ाई का हिस्सा है। शेट्टी चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य ₹50 प्रति किलो करने की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि यह दर करीब आठ साल से नहीं बदली है, जबकि उत्पादन लागत और बाजार की हालत बदल चुकी है। मिलों की कमाई सुधरेगी तो किसानों को बेहतर भाव देने की गुंजाइश भी बनेगी।
बैठक हुई, पर गतिरोध नहीं टूटा
रैली से पहले कोल्हापुर के पालकमंत्री प्रकाश आबिटकर, शेट्टी और मिल मालिकों के बीच बैठक हो चुकी है। उस बैठक में भी कोई हल नहीं निकला। मिल पक्ष का कहना है कि एथनॉल उत्पादन पर रोक के बाद चीनी का उत्पादन बढ़ेगा और कीमतें गिर सकती हैं। ऐसे में मांगी गई दर देना उनके लिए मुश्किल होगा।
आबिटकर ने दो दिन में फिर बैठक कराने की बात कही है। यानी रैली के बाद भी फैसला अगली बैठक पर टिका है। किसान पक्ष अपनी मांग पर अड़ा है और मिल पक्ष अपनी मजबूरी बता रहा है। इसी खींचतान में रविवार रात ट्रैक्टर रोकने की घटना हुई, जिसने साफ कर दिया कि आंदोलन सिर्फ नारों तक सीमित नहीं रहेगा।
महाराष्ट्र में पेराई की रफ्तार भी धीमी
महाराष्ट्र में पेराई सत्र शुरू हुए दस दिन हो चुके हैं, लेकिन रफ्तार धीमी है। राज्य के 224 चीनी मिलों में से अब तक सिर्फ 92 मिलों ने पेराई शुरू की है। इन मिलों ने कुल 43.9 लाख टन गन्ना पेरा है और 30.9 लाख क्विंटल चीनी बनाई है। रिकवरी दर करीब 7 प्रतिशत दर्ज की गई है।
धीमी शुरुआत सबसे ज्यादा कोल्हापुर क्षेत्र में दिख रही है। कोल्हापुर और सांगली जिलों वाली इस क्षेत्र की 41 मिलों में से सिर्फ सात ने काम शुरू किया है। इसके मुकाबले सोलापुर में 23, अहिल्यानगर में 18 और पुणे संभाग में 14 मिलें चल रही हैं। राज्य सरकार ने 15 अक्टूबर से पेराई की अनुमति दी थी, जो सामान्य से करीब पखवाड़ा पहले है। चीनी की उपलब्धता और बढ़ती कीमतों की चिंता इस जल्दी शुरुआत की वजह बताई गई है।
UP के किसान के लिए इस खबर का मतलब
महाराष्ट्र और UP में भाव तय करने का तरीका एक जैसा नहीं है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में भुगतान केंद्र के उचित एवं लाभकारी मूल्य, चीनी रिकवरी और मिल व्यवस्था के हिसाब से होता है। UP में राज्य परामर्श मूल्य की व्यवस्था है। फिर भी कोल्हापुर की लड़ाई UP के किसान के लिए बेकार नहीं है।
केंद्र ने पेराई सत्र 2026-27 के लिए 10.25 प्रतिशत चीनी रिकवरी पर उचित एवं लाभकारी मूल्य ₹365 प्रति क्विंटल तय किया है। UP में पेराई सत्र 2025-26 के लिए अगेती गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य ₹400 प्रति क्विंटल और सामान्य गन्ने का ₹390 प्रति क्विंटल था। 2026-27 के लिए UP के राज्य परामर्श मूल्य की घोषणा अभी बाकी है। इसलिए महाराष्ट्र की ₹4,500 प्रति टन वाली मांग को सीधे UP के भाव से जोड़कर देखना गलत होगा।
UP के किसान के लिए असली सबक कुछ और है। भाव की घोषणा पेराई शुरू होने से पहले हो, पहली किस्त साफ हो और भुगतान का समय तय हो, यही तीन बातें हर सीजन में सबसे ज्यादा काम आती हैं। UP में भी किसान को अपनी पर्ची, तौल और भुगतान की तारीख पर यही नजर रखनी चाहिए।
आगे क्या होगा
अब सबकी नजर दो मोर्चों पर है। एक, आबिटकर की ओर से कही गई दो दिन में होने वाली बैठक। दो, केंद्र की ओर से बनाई गई समिति। केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने किसान संगठनों को आश्वासन दिया है कि गन्ने से जुड़े मुद्दों पर बनी समिति 20 नवंबर से पहले चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य में संशोधन पर फैसला लेगी।
अगर बैठक में सहमति बनती है तो कोल्हापुर क्षेत्र की रुकी हुई मिलों को राहत मिलेगी। अगर नहीं बनती तो आंदोलन तेज होने की चेतावनी पहले से दी जा चुकी है।
मुख्य बातें
- कोल्हापुर में 25 अक्टूबर को 185 किमी की बाइक रैली निकली, मांग पहली किस्त ₹4,500 प्रति टन की है।
- रविवार रात भोसे में गन्ना लदे करीब 80 ट्रैक्टर रोके गए, आबिटकर के साथ बैठक बेनतीजा रही।
- महाराष्ट्र की 224 मिलों में से सिर्फ 92 ने पेराई शुरू की है, कोल्हापुर क्षेत्र में 41 में से सिर्फ 7 मिलें चली हैं।
स्रोत: UNI (25 अक्टूबर 2026), टाइम्स ऑफ इंडिया, कोल्हापुर (26 अक्टूबर 2026), एबीपी माझा (25 अक्टूबर 2026)
