20 अक्टूबर से पेराई शुरू, पर राजू शेट्टी की चेतावनी: मिलें खुलीं तो होगा कटका-बंद

पेराई सत्र बस दो हफ्ते दूर है — पश्चिमी यूपी की मिलों ने बॉयलर पूजा और स्टीम ट्रायल की तैयारी तेज कर दी है, और मौसम साथ दे तो 20 अक्टूबर से पेराई शुरू हो सकती है। लेकिन किसान नेता राजू शेट्टी ने चेतावनी दी है कि नवंबर से पहले मिलें चलीं तो “कटका-बंद” होगा, यानी तौल कांटे ठप कर दिए जाएंगे।
एक तरफ जल्दी पेराई की तैयारी, दूसरी तरफ प्रति टन ₹500 नुकसान की चेतावनी। पूरा मामला खोलकर देखते हैं।
“ईडी के डर से चल रही मिलें” — 7 अक्टूबर को शेट्टी का आरोप
7 अक्टूबर 2026 को पूर्व सांसद और स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के अध्यक्ष राजू शेट्टी ने मिल मालिकों पर सीधा आरोप लगाया। The Hindu के मुताबिक शेट्टी ने कहा कि मिल मालिक “सरकार के दबाव और ईडी-सीबीआई जांच के डर से” जल्दी पेराई के लिए बेकरार हो रहे हैं, क्योंकि सरकार को डर है कि चीनी की कमी से इसका भाव ₹100 प्रति किलो तक जा सकता है।
शेट्टी की तीन शर्तें: चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य ₹50 प्रति किलो, एथेनॉल ₹70 प्रति लीटर, और गन्ने की एमएसपी ₹5,000 प्रति क्विंटल तय हो — तब तक नवंबर से पहले कोई मिल न चले। इन पर 10 अक्टूबर को संगठन की 25वीं गन्ना परिषद में आगे की रणनीति तय होगी।
कटका-बंद का मतलब — किसान की भाषा में
“कटका” चीनी मिल के तौल कांटे को कहते हैं, जहां गन्ना तौलकर पर्ची बनती है। कटका-बंद में प्रदर्शनकारी इन कांटों को घेरकर ठप कर देते हैं। शेट्टी का संगठन पहले भी गन्ना-आपूर्ति रोकने जैसे आंदोलन कर चुका है, इसलिए यह धमकी महज बयानबाजी नहीं मानी जा रही।
यूपी के किसानों के लिए यह दूर की खबर नहीं है। केंद्र ने इस बार मिलों को 15 अक्टूबर से पेराई की सलाह दी है, और पीआईबी के हवाले से The Hindu ने बताया है कि इससे अक्टूबर में चीनी उत्पादन सामान्य 3-4 लाख टन से बढ़कर 10 लाख टन से ज्यादा हो जाने की उम्मीद है, ताकि त्योहारों में आपूर्ति बनी रहे।
कच्चे गन्ने का हिसाब: ₹500/टन का नुकसान कहां से आता है
शेट्टी के विरोध की जड़ एक तकनीकी हकीकत है: अक्टूबर के तीसरे सप्ताह में गन्ना पूरी तरह परिपक्व नहीं होता। ChiniMandi के मुताबिक शेट्टी का दावा है कि जल्दी पेराई से चीनी रिकवरी 1 से 1.5 प्रतिशत तक घट सकती है, जिससे किसानों को प्रति टन करीब ₹500 तक का नुकसान हो सकता है। The Hindu ने लिखा है कि कच्चे गन्ने में चीनी की मात्रा सिर्फ करीब 8 प्रतिशत रहती है, जिससे रिकवरी और वजन दोनों घटते हैं।
मिलों का पक्ष भी नोट करने लायक है। WISMA के अध्यक्ष बी.बी. थोंबरे ने ChiniMandi से कहा कि अक्टूबर में पेराई से रिकवरी 1 से 1.5 प्रतिशत गिर सकती है, जिससे मिलों को प्रति टन ₹450 से ₹500 तक का नुकसान हो सकता है। यानी घाटा सिर्फ किसान का नहीं, मिल का भी है। गन्ना प्रजनक बख्शी राम (Co-0238 के विकासकर्ता) भी कहते हैं कि पूरा फायदा उठाने के लिए पेराई नवंबर से शुरू होनी चाहिए।
पश्चिमी यूपी में उल्टी तैयारी: 20 अक्टूबर का प्लान
दूसरी तरफ यूपी का हक़ीक़तनामा कुछ और कहता है। The Times of India के अनुसार पश्चिमी यूपी की मिलें इस बार पिछले साल से करीब 10 दिन पहले पेराई शुरू करने की तैयारी में हैं — बिजनौर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली और मुरादाबाद की मिलों ने मरम्मत-रखरखाव तेज कर दिया है। सहारनपुर के उप गन्ना आयुक्त ओ.पी. सिंह के मुताबिक यूपी में 122 चीनी मिलें हैं, जिनमें से कम से कम 71 पश्चिमी यूपी में हैं।
22 सितंबर को बिजनौर में सरदार वी.एम. सिंह के नेतृत्व में हजारों किसानों ने महापंचायत की और ज्यादा गन्ना भाव व बकाया भुगतान पर ब्याज की मांग रखी। किसान संगठनों की नजर एसएपी पर है: सत्र 2025-26 में एसएपी अगेती के लिए ₹400 और सामान्य के लिए ₹390 था, लेकिन 2026-27 का एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ है। एक संगठन ने 2026-27 के लिए ₹600 प्रति क्विंटल भाव की मांग भी रखी है।
गन्ना विभाग की सलाह भी नोट कर लें: सर्वे रिकॉर्ड (रकबा और किस्म) सत्यापित करा लें और बैंक खाते पहचान पत्रों से जुड़े रखें, ताकि भुगतान में देरी न हो। और जल्दी पेराई का एक फायदा भी है — खेत जल्दी खाली होंगे और गेहूं की बुवाई सही समय पर हो सकेगी।
सरकार की रणनीति: 14 लाख टन चीनी कोटा
केंद्र ने अक्टूबर के पहले पखवाड़े के लिए चीनी का घरेलू बिक्री कोटा 14 लाख टन तय किया है। The Hindu BusinessLine के मुताबिक महाराष्ट्र की मिलें 15 अक्टूबर और पश्चिमी यूपी की मिलें 20 अक्टूबर से पेराई शुरू कर सकती हैं — सरकार त्योहारी सीजन में कीमतें काबू में रखना चाहती है।
लेकिन शेट्टी का सवाल वहीं अटका है — कीमत काबू करने की कीमत आखिर किसान ही क्यों चुकाए? 10 अक्टूबर की गन्ना परिषद में तय होगा कि विवाद आंदोलन की दिशा पकड़ता है या बातचीत से सुलझता है।
मुख्य बातें
- राजू शेट्टी ने 7 अक्टूबर को जल्दी पेराई का विरोध किया और नवंबर से पहले मिलें चलने पर कटका-बंद आंदोलन की धमकी दी।
- कच्चे गन्ने की पेराई से रिकवरी 1-1.5 प्रतिशत घट सकती है, जिससे किसान को प्रति टन करीब ₹500 का नुकसान हो सकता है।
- पश्चिमी यूपी की मिलें 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू कर सकती हैं, जबकि 2026-27 का एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ है।
स्रोत: The Hindu (7 अक्टूबर 2026), ChiniMandi, The Times of India
