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गेहूं में सिर्फ ₹25, सरसों में ₹413 का उछाल — 6 रबी फसलों के नए एमएसपी जानिए

✍️ Aamir Raza · 🗓 03 Oct 2026 · ⏱ 4 मिनट में पढ़ें

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गेहूं में सिर्फ ₹25, सरसों में ₹413 का उछाल — 6 रबी फसलों के नए एमएसपी जानिए

रबी की बुवाई दस्तक दे रही है और उसी से ठीक पहले केंद्र सरकार ने किसानों के सामने नया गणित रख दिया है। बुधवार को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में छह रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी को हरी झंडी मिल गई। लेकिन खबर की असली कहानी एक विरोधाभास में है। गेहूं का एमएसपी महज 25 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ा, जबकि सरसों के भाव में एक झटके में 413 रुपये का इजाफा कर दिया गया।

यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली समिति ने लिया। कैबिनेट ब्रीफिंग में सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि यह बढ़ोतरी कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की सिफारिशों के आधार पर तय की गई है। नई दरें विपणन वर्ष 2027-28 के लिए लागू होंगी, यानी इस रबी में बोई जाने वाली फसल जो अगले साल मंडी और सरकारी खरीद में आएगी, उस पर यही भाव मिलेगा।

छह फसलों के नए एमएसपी: पूरी सूची

सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार इस बार सबसे बड़ा उछाल कुसुम को मिला है। फसलवार नई दरें इस प्रकार हैं:

  • गेहूं: 2,585 से बढ़कर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल (बढ़ोतरी: 25 रुपये)
  • जौ: 2,150 से बढ़कर 2,286 रुपये प्रति क्विंटल (बढ़ोतरी: 136 रुपये)
  • चना: 5,875 से बढ़कर 5,958 रुपये प्रति क्विंटल (बढ़ोतरी: 83 रुपये)
  • मसूर: 7,000 से बढ़कर 7,390 रुपये प्रति क्विंटल (बढ़ोतरी: 390 रुपये)
  • सरसों-रेपसीड: 6,200 से बढ़कर 6,613 रुपये प्रति क्विंटल (बढ़ोतरी: 413 रुपये)
  • कुसुम: 6,540 से बढ़कर 7,215 रुपये प्रति क्विंटल (बढ़ोतरी: 675 रुपये)

प्रतिशत के हिसाब से देखें तो कुसुम में 10.3 फीसदी की सबसे बड़ी बढ़ोतरी हुई है। सरसों में 6.7 फीसदी, जौ में 6.3 फीसदी और मसूर में 5.6 फीसदी का इजाफा हुआ, जबकि गेहूं का भाव सिर्फ एक फीसदी ही बढ़ पाया।

गेहूं पर सबसे कम बढ़ोतरी क्यों

गेहूं की मामूली बढ़ोतरी पर किसान संगठनों की ओर से सवाल उठे हैं, लेकिन सरकार के पास अपना तर्क है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कैबिनेट फैसले के बाद कहा कि उत्पादन लागत पर कम से कम 50 फीसदी मुनाफा सुनिश्चित करने की नीति पर सरकार कायम है। गेहूं की अनुमानित उत्पादन लागत 1,264 रुपये प्रति क्विंटल है, जिस पर 2,610 रुपये का एमएसपी 106 फीसदी का मार्जिन देता है। यह छहों फसलों में सबसे ज्यादा मार्जिन है।

सरसों पर लागत 3,367 रुपये के मुकाबले 96 फीसदी, मसूर पर 92 फीसदी, चने पर 59 फीसदी, जौ पर 58 फीसदी और कुसुम पर 50 फीसदी का मार्जिन मिलेगा। सरकार का कहना है कि गेहूं के सरकारी भंडार पहले से भरे हैं और पिछले वर्षों में भारी खरीद हो चुकी है, ऐसे में गेहूं से ज्यादा जोर दलहन और तिलहन पर है ताकि फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिले और आयात पर निर्भरता घटे।

गन्ना किसान के लिए इसका क्या मतलब है

यूपी का गन्ना किसान सिर्फ गन्ने पर नहीं टिका है। पश्चिमी यूपी के कई किसान गन्ने के साथ सहफसली के रूप में गेहूं लेते हैं, और पेड़ी के खेतों में रबी के दौरान सरसों बोने वालों की संख्या भी कम नहीं है। ऐसे किसानों के लिए यह घोषणा सीधे जेब से जुड़ी है।

सरसों के 6,613 रुपये प्रति क्विंटल के एमएसपी और लागत पर 96 फीसदी के मार्जिन को देखते हुए इस रबी में सरसों का रकबा बढ़ाने पर विचार करने वालों के लिए सरकार की ओर से एक संकेत मिल गया है। वहीं गेहूं में महज 25 रुपये की बढ़ोतरी उन किसानों को सोचने पर मजबूर करेगी जो गेहूं-सरसों के बीच चुनाव कर रहे हैं।

एक और पहलू यह है कि गन्ने का भुगतान कई बार अटकता है। ऐसे में एमएसपी पर बिकने वाली गेहूं-सरसों की फसल किसान के घर का खर्च और अगली बुवाई की लागत दोनों संभालने में काम आती है। सरकारी खरीद में तय दाम मिलने की गारंटी इसी मायने में महत्वपूर्ण है।

90,962 करोड़ का सौदा

सरकार का अनुमान है कि विपणन वर्ष 2027-28 में 324 लाख टन की खरीद पर किसानों को कुल 90,962 करोड़ रुपये का भुगतान होगा। यह आंकड़ा बताता है कि सरकार एमएसपी को सिर्फ कागजी घोषणा नहीं, बल्कि खरीद की वास्तविक योजना के साथ जोड़ रही है।

किसानों के लिए सलाह साफ है। बुवाई से पहले अपनी मिट्टी, पानी और पिछली उपज को ध्यान में रखकर फैसला लें। नई दरें संकेत दे रही हैं कि सरकार तिलहन की ओर खेती को मोड़ना चाहती है, लेकिन अंतिम फैसला खेत की हालत और बाजार की नब्ज देखकर ही लें।

मुख्य बातें

  • 30 सितंबर को सीसीईए ने 6 रबी फसलों के एमएसपी में बढ़ोतरी को मंजूरी दी, नई दरें विपणन वर्ष 2027-28 के लिए लागू होंगी
  • गेहूं में सिर्फ 25 रुपये (2,610/क्विंटल), सरसों में 413 रुपये (6,613/क्विंटल) और कुसुम में 675 रुपये (7,215/क्विंटल) की बढ़ोतरी
  • गेहूं पर लागत से 106 फीसदी का सबसे ज्यादा मार्जिन, सरकार का जोर दलहन-तिलहन की तरफ विविधीकरण पर
  • 324 लाख टन खरीद पर किसानों को कुल 90,962 करोड़ रुपये भुगतान का अनुमान

स्रोत: द हिंदू (30 सितंबर 2026), सीएनबीसी टीवी18 (30 सितंबर 2026), पीटीआई/द हिंदू बिजनेसलाइन (30 सितंबर 2026)

#गन्ना #एमएसपी #रबी फसल #गेहूं #सरसों #किसान

Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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