2014 में गन्ना किसानों का ₹35,000 करोड़ अटका था, अब 97% भुगतान: केंद्रीय मंत्री का बड़ा बयान

2014 में जब चीनी मिलों पर किसानों का कुल बकाया ₹35,000 करोड़ तक पहुंच गया था, तब हालत ये थी कि पर्ची कटे महीनों बीत जाते थे और पैसा खाते में नहीं आता था। अब केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी का दावा है कि देशभर में गन्ने के भुगतान की स्थिति पूरी तरह पलट चुकी है। मिलें इस सीजन में 97% भुगतान कर चुकी हैं और पिछले चीनी वर्ष में बकाया 99.99% तक चुकाया गया था। यूपी के गन्ना किसानों के लिए इसका मतलब समझना जरूरी है।
2014 का हिसाब: पैसा क्यों अटका था
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक नवंबर 2025 में हुब्बली में बोलते हुए प्रह्लाद जोशी ने कहा था कि जब एनडीए सरकार आई थी, तब चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का ₹35,000 करोड़ बकाया छोड़कर पिछली सरकार गई थी। उस दौर में भुगतान तीन-तीन, चार-चार साल तक लटकता था। मिलों के पास पैसा नहीं था क्योंकि चीनी की कीमतें कम थीं और मिलें बची-खुची चीनी बेचकर भी किसानों का भुगतान नहीं कर पा रही थीं। किसान हर पेराई सत्र में नया गन्ना देता था, पर पुराना पैसा पुराना ही रहता था।
जोशी के मुताबिक 2017 में केंद्र ने बकाया निपटाने की नई नीति शुरू की। इसके बाद चीनी मिलों को ₹16,500 करोड़ का प्रोत्साहन पैकेज दिया गया ताकि वे किसानों का भुगतान कर सकें। सितंबर 2026 में हुब्बली में ही उन्होंने एक और आंकड़ा दिया: केंद्र ने लगभग ₹14,000 करोड़ की वित्तीय सहायता मिलों को दी, जिससे पुराना बकाया चुकाया जा सका।
एफआरपी ₹210 से ₹355: हर साल बढ़ा भाव
भुगतान के साथ-साथ गन्ने का भाव भी बदला है। मंत्री के हवाले से द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक चीनी सत्र 2013-14 में उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) ₹210 प्रति क्विंटल था, जो चीनी सत्र 2025-26 में ₹355 प्रति क्विंटल पहुंच गया है। यानी हर साल एफआरपी में बढ़ोतरी हुई। यह बढ़ोतरी कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) की सिफारिशों के आधार पर होती है।
मंत्री ने अपने पत्र में यह भी बताया कि ₹355 की एफआरपी उत्पादन लागत से 105.2% अधिक मार्जिन देती है। रिकवरी के हर 0.1% बढ़ने पर किसान को अतिरिक्त ₹3.46 प्रति क्विंटल मिलता है। शुगर टेक्नोलॉजिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के 83वें वार्षिक सम्मेलन में जोशी ने बताया था कि पिछले 10 साल में गन्ने का रकबा करीब 18%, उत्पादन 40%, उपज 19% और चीनी उत्पादन 58% बढ़ा है।
एथेनॉल: मिलों के पास पैसा कहां से आया
सिर्फ सरकारी पैकेज से काम नहीं बना। बड़ा बदलाव एथेनॉल से आया। पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की नीति की शुरुआत 2003-04 में वाजपेयी सरकार के समय हुई थी, लेकिन उस वक्त ब्लेंडिंग 1% के आसपास ही थी। मौजूदा सरकार ने इसे चरणबद्ध तरीके से 20% तक पहुंचाया। सितंबर 2026 में जोशी ने कहा कि 25% ब्लेंडिंग पर विचार के लिए एक समिति बनाई गई है, जिसकी सिफारिशों पर फैसला होगा।
एथेनॉल से मिलों की कमाई बढ़ी, और इससे किसानों का भुगतान तेज हुआ। ऑर्गनाइजर की रिपोर्ट के मुताबिक मंत्री ने बताया कि एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम से देशभर की डिस्टिलरियों को ₹2.18 लाख करोड़ से ज्यादा की आय हुई, जिससे चीनी की कीमतें स्थिर रहीं और किसानों को समय पर भुगतान संभव हुआ। चिनिमंडी की रिपोर्ट के मुताबिक 2023-24 के चीनी सत्र में 99.9% बकाया चुकाया गया था और 2024-25 में 90% से ज्यादा भुगतान पूरा हो चुका था।
राज्य की जिम्मेदारी: यूपी को खास संदेश
एक अहम बात मंत्री ने अपने पत्र में कही: गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 1966 के तहत 14 दिन के भीतर भुगतान की जिम्मेदारी राज्यों को सौंपी गई है। यानी किसान का पैसा समय पर मिले, इसे लागू करने की शक्ति राज्य सरकार के पास है। केंद्र एफआरपी तय करता है, लेकिन राज्य चाहे तो उससे ऊपर राज्य सलाहकार मूल्य (एसएपी) घोषित कर सकता है। यूपी, उत्तराखंड, पंजाब और हरियाणा में एसएपी की परंपरा है।
यूपी के संदर्भ में यह याद रखना जरूरी है कि 2025-26 सत्र का एसएपी ₹400 प्रति क्विंटल (अगेती) घोषित किया गया था। नया चीनी सत्र 1 अक्टूबर 2026 से शुरू हो चुका है, और 2026-27 के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। किसानों को यह साफ रहना चाहिए कि पुराने सत्र का भाव नए सत्र पर लागू नहीं होता।
यूपी के किसान के लिए इसका मतलब क्या है
दावा बड़ा है, पर जमीन पर असर तभी माना जाएगा जब पर्ची कटने के बाद पैसा समय पर आए। यूपी में 122 चीनी मिलें चलती हैं, और भुगतान की निगरानी ई-गन्ना ऐप पर होती है। किसान अपनी पर्ची, तौल और भुगतान की स्थिति वहीं देख सकता है। अगर भुगतान में देरी हो, तो टोल-फ्री 1800-121-3203 या 1800-180-5129 पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
जोशी का पूरा हिसाब यह कहता है: बकाया वाला दौर 2014 का था, अब सिस्टम सुधरा है। पर किसान के लिए असली परीक्षा इस पेराई सत्र में होगी, जब नई फसल की पर्ची कटेगी और नया भुगतान शुरू होगा।
मुख्य बातें
- 2014 में गन्ना बकाया ₹35,000 करोड़ था; केंद्र का दावा है कि अब देश में 97% भुगतान हो चुका है और पिछले सीजन में 99.99% तक बकाया चुकाया गया।
- एफआरपी ₹210 (2013-14) से बढ़कर ₹355 प्रति क्विंटल (2025-26) हुई; एथेनॉल ब्लेंडिंग 1% से 20% पहुंची, जिससे मिलों की आय बढ़ी।
- 14 दिन में भुगतान की जिम्मेदारी राज्यों की है; यूपी का SAP 2025-26 ₹400 (अगेती) था, 2026-27 की घोषणा अभी बाकी है।
स्रोत: टाइम्स ऑफ इंडिया (हुब्बली, नवंबर 2025), द हिंदू (नवंबर 2025), आईएएमरिन्यू (सितंबर 2026), चिनिमंडी।
