खेती गाइड

गन्ने की फसल का बीमा: 2% प्रीमियम में पूरा सुरक्षा कवच, पूरी प्रक्रिया

✍️ GannaUP डेस्क · 🗓 30 Sep 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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गन्ने की फसल का बीमा: 2% प्रीमियम में पूरा सुरक्षा कवच, पूरी प्रक्रिया

सितंबर की एक रात तेज आंधी आई और खेत में खड़ा गन्ना बिखर गया। सुबह किसान खेत गया तो पेड़ी लेटी हुई मिली। हाथ-पैर चलाकर खड़ा भी कर दिया, लेकिन शुगर रिकवरी गिर गई, वजन घट गया। मिल में तौल हुई तो भुगतान उम्मीद से कम आया। यहीं पर फसल बीमा काम आता है। जिन्होंने गन्ने का बीमा कराया होता है, उनके नुकसान की भरपाई बीमा से हो जाती है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) 2016 से चल रही है और उत्तर प्रदेश में 2016-17 से ही सभी जिलों में लागू है। गन्ना भी इसमें कवर होता है। फिर भी ज्यादातर गन्ना किसान या तो इसके बारे में जानते नहीं, या कागजी कार्रवाई के डर से आवेदन नहीं करते। इस गाइड में बीमा की पूरी प्रक्रिया आसान भाषा में दी गई है।

गन्ने पर बीमा कौन-सा नुकसान कवर करता है

PMFBY सिर्फ सूखी-बर्बाद फसल तक सीमित नहीं है। इसमें खेती के हर चरण का जोखिम कवर होता है:

  • प्रतिकूल मौसम की वजह से बुवाई ही न हो पाए, तो उस स्थिति का नुकसान
  • खड़ी फसल को सूखा, बाढ़, जलभराव या ओलावृष्टि से नुकसान
  • कटाई के बाद खेत में सुखाने के लिए रखी गई फसल का नुकसान

गन्ने के लिए ये तीनों ही चरण मायने रखते हैं। मानसून में जलभराव से गन्ना सड़ता है, आंधी में पेड़ी गिरती है, और सूखे में बढ़वार रुक जाती है। योजना इन सभी स्थितियों में वित्तीय भरपाई का प्रावधान करती है। मुआवजे की राशि फसल की बीमित राशि और नुकसान की मात्रा के आधार पर तय होती है।

कितना प्रीमियम देना होता है

योजना की सबसे बड़ी खूबी इसका कम प्रीमियम है। किसान को अपनी जेब से बहुत कम देना होता है:

  • खरीफ फसलें (जिसमें गन्ना आता है): बीमा राशि का केवल 2%
  • रबी फसलें: 1.5%
  • बागवानी और व्यावसायिक फसलें: 5%

बाकी पूरा प्रीमियम केंद्र और राज्य सरकार सब्सिडी के रूप में भरती हैं। बीमा राशि जिले के स्तर पर तय होती है, जिसे स्केल ऑफ फाइनेंस कहा जाता है। अपने जिले में गन्ने की बीमा राशि कितनी है, ये नजदीकी जन सेवा केंद्र, बैंक शाखा या कृषि विभाग से पता चल जाता है। मतलब साफ है: किसान को पूरे जोखिम का कवर मिलता है, खर्च नाममात्र का।

आवेदन कैसे करें: स्टेप बाय स्टेप

अगर आपके पास किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) या फसल ऋण है, तो ध्यान रहे — खरीफ 2020 से PMFBY सभी किसानों के लिए स्वैच्छिक है। बैंक प्रीमियम तभी काटेगा जब आपने सहमति (opt-in) दी हो; बीमा नहीं चाहिए तो बैंक को opt-out घोषणा देनी होती है। ऋणी किसान चाहे तो खुद भी पोर्टल या CSC से आवेदन कर सकता है। गैर-ऋणी किसान को तो खुद ही आवेदन करना होता है:

  1. जन सेवा केंद्र (CSC) जाएं: यहां आवेदन फॉर्म भरा जाता है। साथ में आधार कार्ड, बैंक पासबुक, खसरा-खतौनी और बुवाई का प्रमाण ले जाएं।
  2. बैंक शाखा से कराएं: जिस बैंक में खाता है, वहां भी फसल बीमा का फॉर्म मिलता है।
  3. ऑनलाइन खुद करें: PMFBY की वेबसाइट पर Farmer Corner में रजिस्टर करके सारी जानकारी खुद भर सकते हैं। बस जानकारी सही-सही भरें, गलत विवरण बाद में सत्यापन में अटकता है।

कागजों की सूची छोटी है: आधार कार्ड, बैंक पासबुक (जिसमें मुआवजा आना है), जमीन के कागज या खसरा-खतौनी, बुवाई का प्रमाण जैसे पटवारी की रिपोर्ट या सेल्फ डिक्लेरेशन, पासपोर्ट साइज फोटो और निवास प्रमाण (वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस आदि)। फॉर्म भरते समय जो रसीद या शिकायत संख्या मिले, उसे संभालकर रखें। वही आपका सबूत है।

नुकसान हो जाए तो दावा कैसे करें

सबसे जरूरी नियम: नुकसान की सूचना 72 घंटे के भीतर देनी होती है। सूचना टोल फ्री नंबर 14447 पर दी जाती है। इसके बाद बीमा कंपनी के प्रतिनिधि खेत का मुआयना करने आते हैं।

दावे के लिए ये चीजें तैयार रखें:

  • नुकसान का फोटो या वीडियो सबूत, जिसमें तारीख दिखे
  • बीमा की रसीद या पॉलिसी नंबर
  • खसरा-खतौनी और आधार की प्रति

सर्वे की रिपोर्ट फाइनल होते ही मुआवजे की राशि DBT के जरिए सीधे किसान के बैंक खाते में भेज दी जाती है। इसमें आमतौर पर कुछ हफ्तों से लेकर डेढ़-दो महीने का समय लगता है। जितनी जल्दी सूचना देंगे, सर्वे टीम उतनी जल्दी खेत पहुंचेगी।

खरीफ 2026 की स्थिति और आगे की तैयारी

खरीफ 2026 में फसल बीमा कराने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 10 सितंबर कर दी गई थी, जो अब निकल चुकी है। यानी इस सीजन में जो किसान आवेदन नहीं कर पाए, उनका गन्ना इस बार कवर नहीं होगा। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि तैयारी बंद कर दी जाए।

रबी सीजन का बीमा बुवाई सीजन के दौरान खुलता है। जो किसान गेहूं, सरसों जैसी रबी फसल लेते हैं, वे समय पर आवेदन कर सकते हैं। और अगली खरीफ के लिए अभी से कागज तैयार रखें: खसरा-खतौनी अपडेट कराएं, बैंक खाता आधार से लिंक रखें, और अपने जिले की बीमा राशि व अंतिम तिथि कृषि विभाग से पहले ही पूछ लें।

वो गलतियां जो मुआवजा अटका देती हैं

  • 72 घंटे की समयसीमा निकल जाना। यही सबसे आम गलती है।
  • फॉर्म में गलत खाता नंबर या गलत रकबा लिखना। बैंक खाता बंद या निष्क्रिय होना भी भुगतान रोक देता है।
  • बुवाई का प्रमाण न होना। बिना प्रमाण के बीमा का दावा कमजोर पड़ता है।
  • रसीद या शिकायत संख्या खो देना। मुआवजे की स्थिति पूछने पर यही नंबर काम आता है।

मुख्य बातें

  • गन्ना PMFBY में कवर है; खरीफ में किसान को बीमा राशि का सिर्फ 2% प्रीमियम देना होता है।
  • नुकसान की सूचना 72 घंटे के अंदर टोल फ्री 14447 पर देना अनिवार्य है, नहीं तो दावा कमजोर पड़ जाता है।
  • खरीफ 2026 की अंतिम तिथि 10 सितंबर निकल चुकी है; रबी के लिए अभी और अगली खरीफ के लिए पहले से तैयारी रखें।

स्रोत: दैनिक जागरण (25 सितंबर 2026), दैनिक जागरण हरदोई (सितंबर 2026), ABP न्यूज़ (26 सितंबर 2026), ज़ी बिज़नेस

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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