जितनी जल्दी जुड़ोगे, उतना कम चुकाना: 60 के बाद ₹3,000/माह पेंशन वाली किसान योजना

पेराई खत्म होने के बाद खेत खाली पड़ा है और बंशीधर के हाथ भी अब पहले जैसे नहीं चलते। साठ पार कर चुके हैं, लेकिन खेती ही इकलौती आय है। बेटों के अपने काम हैं। ऐसे में हर महीने एक पक्की रकम आती रहे, इससे बड़ा सहारा बुढ़ापे में और क्या होगा। यही सोचकर केंद्र सरकार ने छोटे और सीमांत किसानों के लिए प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना (PM-KMY) शुरू की थी। गन्ना बोने वाले छोटे किसान इस योजना का फायदा उठा सकते हैं। शर्त बस इतनी है कि जुड़ना होगा 18 से 40 साल की उम्र के बीच।
योजना में मिलता क्या है
इस योजना में किसान को 60 साल की उम्र पूरी होने के बाद हर महीने ₹3,000 की पेंशन जीवन भर मिलती है। साल भर में यह राशि ₹36,000 होती है। योजना स्वैच्छिक और अंशदायी है, यानी किसान भी थोड़ा-थोड़ा पैसा जमा करता है और सरकार भी उतना ही पैसा डालती है। पेंशन फंड का प्रबंधन भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) करता है और योजना कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत चलती है। योजना की शुरुआत 12 सितंबर 2019 को हुई थी।
लाभार्थी की मृत्यु के बाद पति या पत्नी को आधी राशि, यानी ₹1,500 महीना पारिवारिक पेंशन के रूप में मिलती है। यह सुविधा सिर्फ पति या पत्नी पर लागू होती है। अगर 60 साल से पहले ही किसान की मृत्यु हो जाए तो पति या पत्नी योजना को जारी रखकर आगे का योगदान दे सकते हैं।
कौन जुड़ सकता है
योजना उन्हीं किसानों के लिए है जिनके नाम पर 2 हेक्टेयर (करीब 5 एकड़) तक खेती योग्य जमीन हो और जिनकी उम्र 18 से 40 साल के बीच हो। गन्ने की खेती करने वाले जिन छोटे किसानों के पास सीमित जमीन है, वे इस दायरे में आते हैं।
कुछ लोग योजना में शामिल नहीं हो सकते। जो किसान राष्ट्रीय पेंशन योजना (NPS), कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) या कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के सदस्य हैं, वे पात्र नहीं हैं। आयकर देने वाले किसान भी इस योजना से बाहर रखे गए हैं।
हर महीने कितना पैसा जमा करना होगा
योगदान किसान की उम्र के हिसाब से तय होता है। जितनी कम उम्र में जुड़ेंगे, महीना उतना कम देना पड़ेगा।
| जुड़ने की उम्र | किसान का मासिक योगदान | सरकार का योगदान |
|---|---|---|
| 18 वर्ष | ₹55 | ₹55 |
| 20 वर्ष | ₹61 | ₹61 |
| 25 वर्ष | ₹80 | ₹80 |
| 30 वर्ष | ₹105 | ₹105 |
| 35 वर्ष | ₹150 | ₹150 |
| 40 वर्ष | ₹200 | ₹200 |
18 साल की उम्र में जुड़ने वाला किसान महीने में सिर्फ ₹55 देता है और सरकार भी ₹55 डालती है। 60 साल तक यह योगदान बैंक खाते से अपने आप कटता रहता है। देर से जुड़ने पर राशि बढ़ जाती है, इसलिए जल्दी नाम लिखवाना फायदेमंद रहता है।
बीच में निकलना हो तो क्या होगा
अगर कोई किसान 60 साल की उम्र से पहले योजना छोड़ना चाहे तो उसका जमा किया पैसा बचत खाते के ब्याज सहित वापस मिल जाता है। पैसा डूबने का डर नहीं है। यह प्रावधान योजना को भरोसेमंद बनाता है, क्योंकि किसान को पता रहता है कि जरूरत पड़ने पर रकम वापस मिल जाएगी।
आवेदन कैसे करें
योजना में नामांकन के लिए किसान को अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाना होगा। वहां आधार कार्ड और बैंक खाते की जानकारी देनी होती है। जमीन के रिकॉर्ड की जांच भी होती है। पहली किश्त नकद जमा करनी होती है, उसके बाद बैंक खाते से ऑटो-डेबिट की सहमति ली जाती है। रजिस्ट्रेशन के बाद किसान को विशिष्ट पेंशन नंबर और किसान पेंशन कार्ड मिलता है। CSC पर नामांकन की सुविधा निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती है।
एक बात का ध्यान रखें। मासिक योगदान बैंक खाते से ऑटो-डेबिट से कटता है, इसलिए जिस खाते को जोड़ा है उसमें तय तारीख के आसपास पर्याप्त रकम रखना जरूरी है। अगर खाते में पैसा न हो और किश्त छूट जाए तो आगे की प्रक्रिया में दिक्कत आ सकती है। पेराई के सीजन में भुगतान आने पर एक बार में कुछ महीनों का प्रबंध अलग रखना समझदारी रहती है।
आवेदन करते समय आधार कार्ड, बैंक खाता विवरण और खेत के कागज साथ लेकर जाएं। बैंक खाता आधार से जुड़ा होना जरूरी है, क्योंकि इसी खाते से मासिक योगदान कटता है।
पति-पत्नी दोनों जुड़ सकते हैं
योजना का एक बड़ा फायदा यह है कि घर के दोनों सदस्य अलग-अलग जुड़ सकते हैं, बशर्ते दोनों पात्रता पूरी करते हों। इससे बुढ़ापे में दो पेंशन का सहारा मिलता है। गन्ना किसान परिवारों में अक्सर पति खेती संभालता है और पत्नी भी खेत के काम में हाथ बंटाती है। दोनों का नामांकन भविष्य की सुरक्षा दोगुनी कर देता है।
मुख्य बातें
- 18 से 40 साल के छोटे गन्ना किसान (2 हेक्टेयर तक जमीन) ₹55 से ₹200 महीना जमा कर 60 के बाद ₹3,000 महीना पेंशन पाते हैं, सरकार बराबर राशि डालती है।
- मृत्यु के बाद पति या पत्नी को ₹1,500 महीना पारिवारिक पेंशन मिलती है, और 60 से पहले निकलने पर जमा राशि ब्याज सहित वापस मिल जाती है।
- नामांकन नजदीकी CSC केंद्र पर आधार, बैंक खाता और जमीन के कागज के साथ निःशुल्क होता है; NPS, ESIC, EPFO सदस्य और आयकरदाता पात्र नहीं हैं।
स्रोत: कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की PM-KMY योजना जानकारी, Moneycontrol Hindi, Desh Darbar, Testbook; योजना सितंबर 2019 में शुरू हुई।
