15 नवंबर से पहले पेराई पर रोक! 12 अक्टूबर की बैठक में गन्ना किसानों को क्या मिलेगा?

किसान संगठन कह रहे हैं कि 15 नवंबर से पहले चीनी मिलों की चिमनी नहीं उठेगी, और केंद्र सरकार चाहती है कि मिलें दिवाली से पहले गन्ना पेरना शुरू कर दें। बीच में फंसा है किसान, जिसका कच्चा गन्ना अगर समय से पहले पेर दिया गया तो एकड़ पर करीब 20,000 रुपये का नुकसान उठाना पड़ेगा। इस खींचतान का अगला पड़ाव 12 अक्टूबर को दिल्ली में है, जहां केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने किसान नेताओं के साथ बैठक बुलाई है।
15 नवंबर की चेतावनी क्यों
महाराष्ट्र और कर्नाटक के किसान संगठनों ने चीनी मिलों और किसानों से अपील की है कि जब तक उनकी मांगें मानी नहीं जातीं, तब तक गन्ने की कटाई और पेराई शुरू न की जाए। कच्चे गन्ने की पेराई से गन्ने की उपज और चीनी की रिकवरी, दोनों घट जाती हैं। इससे किसानों और चीनी मिलों, दोनों को आर्थिक नुकसान होता है। स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के अध्यक्ष राजू शेट्टी के मुताबिक, कच्चा गन्ना पेरने से प्रति एकड़ करीब 6 टन गन्ने का नुकसान होता है, जो करीब 20,000 रुपये प्रति एकड़ के बराबर बैठता है। गन्ने में सुक्रोज की मात्रा नवंबर के बाद बढ़ती है, इसलिए जल्दी पेराई सीधे रिकवरी पर मार करती है।
सरकार क्यों चाहती है जल्दी पेराई
केंद्र सरकार ने चीनी मिलों से पेराई का काम करीब एक महीने पहले शुरू करने को कहा है, ताकि त्योहारों के सीजन में चीनी की उपलब्धता बनी रहे। बीते छह महीनों में भारत चीनी के निर्यातक से आयातक बन गया है, क्योंकि उत्पादन अनुमान गलत साबित हुए और निर्यात से घरेलू भंडार घट गया। इसके बाद चीनी के भाव ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गए। इसी दबाव में महाराष्ट्र ने मिलों को 15 अक्टूबर से पहले भी पेराई शुरू करने की छूट दे दी। किसान संगठनों का कहना है कि बाजार के लिए जल्दी पेराई का खर्च किसान और मिलें क्यों उठाएं, इसीलिए नुकसान की भरपाई की मांग भी उठाई गई है।
12 अक्टूबर की बैठक में क्या मांगे हैं
मांगों में चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य को 31 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलो करने, शीरे से बनने वाले एथेनॉल की खरीद कीमत 70 रुपये प्रति लीटर तय करने और जल्दी पेराई से हुए नुकसान के लिए 500 रुपये प्रति टन मुआवजे की मांग शामिल है। कर्नाटक के कर्नाटक राज्य रैयत संघ और ग्रीन ब्रिगेड ने तो 12 अक्टूबर की बैठक में समाधान न निकलने पर 13 अक्टूबर से राष्ट्रीय राजमार्गों पर अनिश्चितकालीन नाकेबंदी की चेतावनी दे दी है। उनकी मांगों में 9.25 प्रतिशत रिकवरी पर 5,500 रुपये प्रति टन गन्ने की कीमत, कटाई के 14 दिनों के भीतर भुगतान और देरी पर 15 प्रतिशत ब्याज, कटाई व ढुलाई का खर्च मिलों द्वारा उठाना, एपीएमसी में डिजिटल तौल मशीनें और कर्नाटक में गन्ने का राज्य परामर्शित मूल्य लागू करना शामिल है।
जोशी का रुख क्या है
केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रल्हाद जोशी ने हुब्बल्ली में कहा था कि केंद्र सरकार किसानों से बातचीत के लिए तैयार है, इसलिए 12 अक्टूबर को दिल्ली में बैठक रखी गई है। उन्होंने चीनी के एमएसपी को लेकर एक अहम बात स्पष्ट की। उनके मुताबिक चीनी का एमएसपी न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं, बल्कि न्यूनतम बिक्री मूल्य है। मतलब, मिलें 31 रुपये से कम कीमत पर चीनी नहीं बेच सकतीं। फिलहाल बाजार में चीनी 40 से 47 रुपये प्रति किलो बिक रही है, जबकि पिछले साल यह 38-39 रुपये के आसपास थी। जोशी ने यह भी कहा कि चीनी के एमएसपी में बढ़ोतरी का मतलब गन्ने की कीमत में अपने आप बढ़ोतरी नहीं होगा, क्योंकि दोनों कीमतें सीधे जुड़ी हुई नहीं हैं। उन्होंने किसान नेताओं से आंदोलन की बजाय दिल्ली आकर मंत्रालयों से बातचीत करने की अपील की है।
यूपी के गन्ना किसानों के लिए इसका क्या मतलब है
यह लड़ाई महाराष्ट्र और कर्नाटक में शुरू हुई है, लेकिन असर यूपी के किसानों पर भी पड़ेगा। यूपी में 122 चीनी मिलें हैं और पेराई सत्र की तैयारियां चल रही हैं। हरदोई में तो 28 अक्टूबर से पेराई शुरू होने की घोषणा हो चुकी है। अगर 12 अक्टूबर की बैठक में चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य और एथेनॉल की कीमतों पर कोई फैसला होता है, तो मिलों की भुगतान क्षमता बेहतर होगी। दूसरी तरफ, यूपी का SAP 2026-27 अभी घोषित नहीं हुआ है। 2025-26 का भाव 400 रुपये प्रति क्विंटल (अगेती) था, लेकिन इस सीजन का रेट आने में देरी किसानों के बजट को प्रभावित कर रही है।
यूपी के किसानों के लिए तुरंत करने वाला काम यह है कि कच्चे गन्ने की कटाई में जल्दबाजी न करें। नवंबर से पहले पेराई से रिकवरी घटती है, और उसका नुकसान सीधे किसान की जेब पर पड़ता है। अपनी पर्ची, सट्टे और समिति से जुड़े कागजात पहले से दुरुस्त रखें, ताकि पेराई शुरू होते ही गन्ना ले जाने में देरी न हो। 12 अक्टूबर की बैठक के नतीजों पर नजर रखें। चीनी और एथेनॉल की कीमतों में बदलाव हुआ तो यह यूपी के भाव और भुगतान, दोनों पर असर डालेगा।
मुख्य बातें
- महाराष्ट्र-कर्नाटक के किसान संगठनों का ऐलान: 15 नवंबर से पहले गन्ना पेराई नहीं होने देंगे, कच्चे गन्ने से 20,000 रुपये प्रति एकड़ तक का नुकसान।
- 12 अक्टूबर को दिल्ली में केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी की बैठक; चीनी के बिक्री मूल्य, एथेनॉल कीमत और मुआवजे की मांगों पर फैसला संभव।
- यूपी के 122 मिलों में पेराई की तैयारियां जारी; SAP 2026-27 की घोषणा अभी बाकी, किसान कच्चे गन्ने की कटाई में जल्दबाजी न करें।
स्रोत: द हिंदू (2 और 9 अक्टूबर 2026), द इकोनॉमिक टाइम्स (8 अक्टूबर 2026), बिज़नेस स्टैंडर्ड हिंदी (8 अक्टूबर 2026), टाइम्स ऑफ इंडिया (सितंबर-अक्टूबर 2026)
