पेराई 10 दिन पहले, 14 लाख टन चीनी कोटा जारी: इस बार गन्ना भुगतान में देरी होगी या नहीं?

हर साल किसान की सबसे बड़ी चिंता एक ही होती है। मिल चलेगी, गन्ना तुलेगा, लेकिन पैसा कब आएगा? 1 अक्टूबर को नए चीनी सीजन 2026-27 की शुरुआत के साथ दिल्ली से आई खबरों ने इस सवाल का जवाब काफी हद तक साफ कर दिया है। खाद्य मंत्रालय ने 1 से 15 अक्टूबर के बीच घरेलू बाजार में 14 लाख टन चीनी बेचने का कोटा जारी किया है, और पश्चिमी यूपी की मिलें इस बार करीब 10 दिन पहले पेराई शुरू करने की तैयारी में हैं। यानी मिलों के पास सीजन की शुरुआत में ही नकदी आनी शुरू होगी, जिससे भुगतान का चक्र भी जल्दी चल सकता है। लेकिन यहां एक शर्त है जिस पर खुद उद्योग ने बात की है।
14 लाख टन कोटा: फैसला क्या कहता है
30 सितंबर के आदेश के मुताबिक देश की 587 चीनी मिलों और 2 रिफाइनरियों को 1 से 15 अक्टूबर के बीच कुल 14 लाख टन चीनी बेचने की अनुमति मिली है, जिसमें 1 लाख टन स्टैंडअलोन रिफाइनरों के हिस्से की है।
सितंबर के पखवाड़ों में 13 और 13.50 लाख टन का कोटा दिया गया था। इस बार कोटा बढ़ाने की वजह साफ है। अक्टूबर में नवरात्रि, दुर्गा पूजा और दशहरा हैं, नवंबर में दिवाली, जब चीनी की मांग साल के सबसे ऊंचे स्तर पर रहती है।
राज्यवार बंटवारे में महाराष्ट्र को 4,39,074 टन, उत्तर प्रदेश को 4,17,658 टन और कर्नाटक को 2,20,324 टन मिला है। तीनों राज्यों को मिलाकर 10.77 लाख टन, यानी कुल आवंटन का करीब 83 फीसदी। यूपी की मिलों के लिए यह सीजन की पहली बड़ी नकदी का रास्ता खोलेगा।
नियम अब कड़े: पहले हफ्ते में 45 फीसदी बेचना अनिवार्य
इस बार कोटा सिर्फ संख्या नहीं है, नियम भी सख्त हैं। मिलों को अपने आवंटन का कम से कम 45 फीसदी पहले हफ्ते में और बाकी दूसरे हफ्ते में बेचना होगा। बेची हुई चीनी 7 दिन के अंदर मिल से भेजनी होगी, और 15 अक्टूबर तक की बिक्री की जानकारी 18 अक्टूबर तक देनी होगी। शर्तें न मानने वाली मिलों को नवंबर का कोटा मिलना मुश्किल हो सकता है।
एक नियम सीधे किसानों के काम का है। जो मिलें अक्टूबर में पेराई शुरू करेंगी, वे कोटे के अलावा अक्टूबर-नवंबर में किसी भी समय अतिरिक्त चीनी बेच सकेंगी। मिल जितनी जल्दी चलेगी, उतनी जल्दी उसके पास नकदी आएगी, और नकदी आई तो किसान के भुगतान की बारी भी जल्दी आएगी।
पश्चिमी यूपी: 20 अक्टूबर के आसपास पेराई की तैयारी
महाराष्ट्र में 15 अक्टूबर के आसपास और पश्चिमी यूपी में 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू होने का अनुमान है। दैनिक जागरण की 20 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक मरम्मत का काम 65 से 90 फीसदी तक पूरा हो चुका है, और चांगीपुर चीनी मिल सबसे पहले पेराई शुरू करने की स्थिति में है। जिले ने इस बार 10 करोड़ क्विंटल गन्ना पेरने का लक्ष्य रखा है।
अमरोहा में भी जिले की 11 चीनी मिलों को 20 से 25 अक्टूबर के बीच चालू करने की योजना है। जिले में एक लाख हेक्टेयर से ज्यादा रकबे पर गन्ना है और करीब सवा लाख किसान खेती से जुड़े हैं। जिला गन्ना अधिकारी मनोज कुमार के मुताबिक सभी मिलों का समय से संचालन कराया जाएगा ताकि किसानों को गन्ना कोल्हू में डालने की मजबूरी न हो। (पश्चिमी यूपी की मिलों की तैयारियों पर यह रिपोर्ट भी पढ़ें।)
भुगतान पर एक शर्त: भाव टिकना जरूरी
अब सवाल का दूसरा हिस्सा। मिलें भाव के दबाव में तो नहीं हैं? यहां उद्योग की बात ध्यान देने लायक है। उद्योग संगठनों ISMA और NFCSF ने कहा है कि एक्स-मिल भाव औसत उत्पादन लागत (करीब 42-43 रुपये प्रति किलो) से ऊपर रहना जरूरी है, तभी मिलें किसानों का समय पर भुगतान कर पाएंगी।
राहत की बात यह है कि भाव अब रिकॉर्ड ऊंचाई से नीचे आ चुके हैं। सीएनबीसी टीवी18 के मुताबिक खुदरा भाव रिकॉर्ड स्तर से 11-12 फीसदी घटकर करीब 57.50 रुपये प्रति किलो रह गया है, और एक्स-मिल भाव करीब 30 फीसदी घटकर 4,450 रुपये प्रति क्विंटल पर है। सरकार ने स्टॉक लिमिट और 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति देकर बाजार को संभाला है।
किसान अभी क्या करें
जल्दी पेराई का फायदा सिर्फ मिलों को नहीं है। गन्ना जल्दी कटेगा तो खेत जल्दी खाली होगा, और गेहूं की बुवाई सही समय पर हो सकेगी। अपना सट्टा और पर्ची की व्यवस्था कैलेंडर के मुताबिक पूरी रखें, क्रय केंद्र की जानकारी समय से लें।
एक जरूरी बात और। 2026-27 सीजन के SAP की घोषणा अभी बाकी है। 2025-26 का अगेती SAP 400 रुपये प्रति क्विंटल था। नई दर आने तक पुरानी दर को मौजूदा सीजन की दर समझने की गलती न करें।
मुख्य बातें
- 1 से 15 अक्टूबर के लिए 14 लाख टन चीनी बिक्री कोटा जारी। यूपी की मिलों को 4,17,658 टन का हिस्सा। पहले हफ्ते में 45 फीसदी बेचना अनिवार्य।
- अक्टूबर में पेराई शुरू करने वाली मिलें कोटे के अलावा अतिरिक्त चीनी बेच सकेंगी। पश्चिमी यूपी में 20 अक्टूबर के आसपास पेराई का अनुमान।
- भाव अब रिकॉर्ड से नीचे हैं। उद्योग कहता है लागत से ऊपर भाव टिके तो समय पर भुगतान होगा। 2026-27 के SAP की घोषणा अभी बाकी है।
स्रोत: द हिंदू बिजनेसलाइन (30 सितंबर 2026), सीएनबीसी टीवी18 (30 सितंबर 2026), चिनीमंडी (30 सितंबर 2026), दैनिक जागरण (20 सितंबर 2026), हिंदुस्तान (अमरोहा)।
