20 अक्टूबर से मिलें चलेंगी, आपका गन्ना कब तुलेगा: जल्दी कटाई में वज़न का नुकसान

20 अक्टूबर की तारीख अब करीब है। पश्चिमी यूपी की मिलों ने बॉयलर पूजा और स्टीम ट्रायल पूरे कर लिए हैं, और गन्ना आयुक्त कार्यालय व मिल संघों के मुताबिक इस बार करीब 10 दिन पहले पेराई सत्र खोलने की तैयारी है। पर एक बात पहले समझ लीजिए: मिल का चलना और आपके गन्ने का तुलना दो अलग-अलग तारीखें हैं।
मिलें तकनीकी तौर पर 20 अक्टूबर से चालू हो सकती हैं, लेकिन खेतों से गन्ने की वास्तविक कटाई और आवक दशहरे के बाद ही जोर पकड़ेगी। यानी असली पहिया 20-22 अक्टूबर के बाद घूमेगा। अगर यह उलझन समझे बिना गन्ना काट दिया, तो खेत में पड़ा गन्ना रोज़ वज़न घटाएगा और उतना ही भुगतान भी।
महाराष्ट्र में सिर्फ 15 मिलें क्यों चलीं
महाराष्ट्र में पेराई की सबसे तेज़ रफ्तार दिखनी चाहिए थी, पर वहां कहानी उल्टी है। राज्य की 55 चीनी मिलों में से अब तक सिर्फ 15 ने ही पेराई शुरू की है। किसान तक की रिपोर्ट के मुताबिक ये 15 मिलें 8 अक्टूबर से चलीं; बाकी करीब 40 मिलों ने पूजा-पाठ तो कर ली, पर किसान आंदोलन के चलते काम पूरी तरह शुरू नहीं हो पाया। महाराष्ट्र और कर्नाटक के किसान गन्ने का ज्यादा भाव और चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य को 60 रुपये किलो करने की मांग पर अड़े हैं। कर्नाटक में तो अभी एक भी मिल पूरी तरह नहीं चली।
केंद्र ने प्रो. रमेश चंद की अध्यक्षता में समिति बना दी है, पर रिपोर्ट की कोई समय-सीमा तय नहीं और किसान संगठनों ने इसे खारिज कर दिया है। यूपी के किसान के लिए इसका मतलब सीधा है: जब देश के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक राज्य की मिलें धीमी चल रही हैं, तो नई चीनी की आवक घटेगी, चीनी महंगी रहेगी और गन्ने के भाव की मांग को बल मिलेगा।
सहारनपुर की 8 मिलों का पूरा कैलेंडर
“तैयारी” और “पेराई शुरू” में कितना फर्क होता है, इसका सबसे साफ उदाहरण सहारनपुर है। दैनिक जागरण (16 अक्टूबर) के मुताबिक जिले की 8 मिलों में मरम्मत-रखरखाव तेज़ है, पर शासन के जल्दी शुरू कराने के निर्देशों के बावजूद अक्टूबर में सिर्फ एक मिल चलेगी।
देवबंद (त्रिवेणी) 28 अक्टूबर से सबसे पहले चलेगी। फिर 1 नवंबर को नानौता-सरसावा सहकारी और शेरमऊ (उत्तम), 2 नवंबर को गांगनौली (बजाज), 8 नवंबर को बिडवी (वेव) और 15 नवंबर को गागलहेड़ी (दया शुगर)। टोडरपुर पिछले साल से बंद है। किसान संगठन मांग कर रहे हैं कि मिलें चलने के साथ नया भाव घोषित हो और पिछले सत्र का बकाया जल्द चुकाया जाए।
अपनी मिल की तारीख इस सूची से नोट कर लें, पर एक बात याद रखें: मिल चलने की तारीख और आपकी परची कटने की तारीख एक नहीं होती। परची कैलेंडर का अपना क्रम होता है।
जल्दी काटा गन्ना तो वज़न घटेगा, भुगतान भी
मिल 20 अक्टूबर को चल पड़े, तो क्या 21 को गन्ना काट लेना चाहिए? अनुभव कहता है नहीं। कटाई के बाद गन्ना जितने दिन खेत या ढुलाई में पड़ा रहेगा, उतना ही नमी खोकर वज़न घटाएगा। भुगतान क्विंटल पर होता है, इसलिए हर घटा किलो सीधे जेब से जाता है।
सही तरीका यह है कि परची या कैलेंडर की तारीख से 1-2 दिन पहले ही कटाई करें। मिल गेट पर लंबी कतार में खड़ा गन्ना भी धूप में वज़न घटाता है। अपनी मिल की घोषित तारीख, अपनी परची का क्रम और मौसम, तीनों को जोड़कर फैसला लें। बारिश वाला गन्ना कम मीठा होता है, रिकवरी घटती है; ऐसे में जल्दबाज़ी दोहरा नुकसान दे सकती है।
चीनी के दाम पर सरकार की नज़र, गन्ने का भाव अभी बाकी
एक तरफ चीनी का भाव ऊंचा चल रहा है, दूसरी तरफ सरकार त्योहारी सीजन में कमी और मुनाफाखोरी रोकने के लिए सतर्क है। गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस के मुताबिक प्रदेश के गोदामों में 70.64 लाख क्विंटल चीनी का स्टॉक है और अक्टूबर के आखिरी हफ्ते से मिलें चलने पर नवंबर में नए सत्र की चीनी बाज़ार पहुंचेगी। सभी जिलाधिकारियों को कीमतों पर नज़र रखने के निर्देश दिए गए हैं।
पर किसान की जेब से जुड़ा सबसे बड़ा सवाल अब भी खुला है: 2026-27 का गन्ना मूल्य (एसएपी) घोषित नहीं हुआ है। केंद्र ने इस सत्र का एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, पर यूपी का एसएपी आना बाकी है। पिछले सत्र का भाव इस सत्र का भाव नहीं है। जब तक नया भाव नहीं आता, भुगतान पुराने विवादों के बीच ही चलेगा, और यही वजह है कि किसान संगठन हर शेड्यूल के साथ भाव की घोषणा की मांग जोड़ रहे हैं।
परची-कैलेंडर पर नज़र रखना न भूलें
मिलों की तारीखें घोषित हो गई हैं, अब बारी आपकी तैयारी की है। eGanna ऐप पर किसान कोड डालकर परची और कैलेंडर की स्थिति रोज़ाना देखें; परची के बिना गन्ना मिल गेट पर अटक सकता है। अपनी गन्ना विकास समिति से भी संपर्क बनाए रखें। साफ-सुथरा गन्ना भेजें, पत्ती और मिट्टी के साथ गया गन्ना तौल में कटौती का कारण बनता है। पर्ची, तौल पर्ची और भुगतान की हर रसीद संभालकर रखें।
मुख्य बातें
- पश्चिमी यूपी की मिलें 20 अक्टूबर से पेराई की तैयारी में, पर असली गन्ना आवक दशहरे के बाद 20-22 अक्टूबर से ही जोर पकड़ेगी।
- सहारनपुर में अक्टूबर में सिर्फ देवबंद (28 अक्टूबर) चलेगी; बाकी मिलें 1 से 15 नवंबर के बीच।
- जल्दी काटा गन्ना वज़न घटाता है; परची-कैलेंडर की तारीख से 1-2 दिन पहले ही कटाई करें। 2026-27 का एसएपी घोषित होना बाकी।
स्रोत: बिज़नेस स्टैंडर्ड हिंदी (15 अक्टूबर 2026), किसान तक (15 अक्टूबर 2026), दैनिक जागरण सहारनपुर (16 अक्टूबर 2026), लाइव हिंदुस्तान (15 अक्टूबर 2026), किसान इंडिया (15 अक्टूबर 2026)
