पेड़ी रखें या नई बुवाई करें? 5 जांच से बचाएं बीज और जुताई का खर्च

कटाई खत्म हुई, ट्रॉली मिल जा चुकी है और खेत में ठूंठ खड़े हैं। अब किसान के सामने एक ही सवाल घूमता है। इस खेत को पेड़ी के लिए रख लूं या तोड़कर नई बुवाई कर दूं। पेड़ी में बीज का खर्च बचता है, जुताई कम होती है और फसल जल्दी खड़ी हो जाती है। नई बुवाई में नई किस्म लगाने का मौका मिलता है, रोगग्रस्त जड़ें खत्म हो जाती हैं और मिट्टी नए सिरे से तैयार हो जाती है। गलत फैसला एक सीजन की मेहनत पर भारी पड़ता है। इसलिए फैसला दुकान पर या पड़ोसी की सलाह पर नहीं, अपने खेत की हालत देखकर करना चाहिए।
नवंबर का महीना इस फैसले के लिए सबसे सही समय है। मुजफ्फरनगर, शामली और बिजनौर जैसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में पेराई शुरू हो चुकी है। नीचे दी गई 5 जांच से फैसला साफ हो जाएगा।
जांच 1: यह कौन सी पेड़ी है
पहली पेड़ी और दूसरी पेड़ी में फर्क होता है। कृषि प्रसार की सामान्य सलाह के अनुसार आमतौर पर दो से ज्यादा पेड़ी लेने की सिफारिश नहीं की जाती। तीसरी या चौथी पेड़ी में जड़ों की ताकत घटती है, गन्ने पतले होने लगते हैं और रोग का दबाव बढ़ता है। अगर यह पहली पेड़ी है और खेत स्वस्थ रहा है तो पेड़ी रखना मजबूत विकल्प है। अगर पहले ही दो पेड़ी ली जा चुकी हैं तो नई बुवाई की ओर झुकना समझदारी है।
जांच 2: खेत में खाली जगह कितनी है
कटाई के बाद खेत में टहलिए और देखिए कि कतारों में कितनी जगह खाली रह गई है। जहां ठूंठ सूख गए हैं या गन्ने उखड़ गए हैं, वहां नई फूट नहीं आएगी। प्रसार सामग्री के अनुसार 45 से 50 सेंटीमीटर से बड़े खाली हिस्सों में गैप फिलिंग की जरूरत होती है। छोटे खाली हिस्से आसपास की फूट से भर जाते हैं। अगर खेत का बड़ा हिस्सा खाली दिख रहा है तो पेड़ी घाटे का सौदा हो सकता है। गैप फिलिंग करनी भी हो तो उसी उम्र के एक आंख वाले बीज या पॉलीबैग पौध से करिए, ताकि नई पौध पुरानी फसल के साथ चल सके।
जांच 3: रोग और कीट की हालत
ठूंठों को ध्यान से देखिए। लाल सड़न वाले गन्नों में अंदर से लाल रंग और खट्टी गंध जैसी पहचान मिलती है। घास जैसी पतली-पतली फूट, जिसे ग्रासी शूट कहते हैं, और काले चाबुक जैसे निकलने वाले स्मट रोग के लक्षण दिखें तो वह खेत पेड़ी के लायक नहीं है। रोगग्रस्त ठूंठ से निकली फसल में रोग आगे भी फैलता है। ऐसे ठूंठों को निकालकर नष्ट कर देना चाहिए। अगर रोग पूरे खेत में फैला हुआ है तो खेत तोड़ना ही सही है। नई बुवाई में रोगमुक्त बीज और नई स्वीकृत किस्म लगाने का मौका मिलता है।
जांच 4: कटाई कैसी हुई है
पेड़ी की सफलता कटाई के तरीके से भी जुड़ी है। जमीन के बराबर या थोड़ा नीचे कटा गन्ना पेड़ी के लिए अच्छा होता है, क्योंकि नीचे की आंखों से मजबूत फूट निकलती है। ऊपर से कटा गन्ना ऊपर की आंखों से कमजोर फूट देता है। तेज औजार से जमीन के ठीक ऊपर के ठूंठ काटिए ताकि नीचे की स्वस्थ आंखें फूट सकें। अगर कटाई में गन्ने उखड़ गए हैं या जड़ें हिल गई हैं तो पेड़ी कमजोर रहेगी। उस हालत में नई बुवाई बेहतर है।
जांच 5: पानी, पर्ची और किस्म की मांग
आखिरी जांच खेत से बाहर की है। पेड़ी को भी समय पर सिंचाई चाहिए और खाद की जरूरत पौध फसल से ज्यादा होती है। प्रसार सलाह के अनुसार पेड़ी में पौध फसल से करीब 25 प्रतिशत ज्यादा नाइट्रोजन की सिफारिश की जाती है। साथ ही अपनी मिल और समिति की पर्ची व्यवस्था देखिए। जिस किस्म की मांग मिल में है और जिसका सर्वे तथा सट्टा ठीक है, उसी दिशा में फैसला लीजिए। अगर किस्म पुरानी हो चुकी है और मिल उसे कम ले रही है तो नई स्वीकृत किस्म की बुवाई लंबी अवधि में फायदेमंद रहेगी।
अगर पेड़ी रखनी है तो पहले 30 दिन क्या करें
फैसला पेड़ी के पक्ष में हो तो पहले 30 दिन सबसे अहम हैं। कटाई के हफ्ते भर के अंदर ठूंठ की छंटाई करिए। पत्ती और कचरा जलाने के बजाय कतारों के बीच बिछा दीजिए। इससे नमी बनी रहती है और मिट्टी को जैविक पदार्थ भी मिलता है। इसके बाद हल्की सिंचाई दीजिए। खाद की पहली खुराक छंटाई और कतारों की जुताई के बाद मिट्टी में दबाकर दीजिए और बाकी खुराक कटाई के करीब 25वें और 75वें दिन के आसपास बांटकर दीजिए।
अगर खेत तोड़ना है तो नई बुवाई की तैयारी
खेत तोड़ने का फैसला हो तो जल्दबाजी में बीज मत खरीदिए। स्वस्थ, रोगमुक्त और अपने क्षेत्र के लिए स्वीकृत नई किस्म चुनिए। बीज के लिए ऊपर के स्वस्थ हिस्से के गन्ने लीजिए और बीज उपचार जरूर करिए। खेत की तैयारी में मिट्टी पलटने वाली जुताई के बाद पाटा लगाकर जमीन समतल कीजिए। शरदकालीन बुवाई अक्टूबर-नवंबर में और बसंतकालीन बुवाई फरवरी-मार्च में होती है, इसलिए अपने मिल के पर्ची कार्यक्रम के हिसाब से समय चुनिए।
सीधा नियम
तीन में से दो जांच खराब निकलें तो खेत तोड़ दीजिए। मसलन, दूसरी से आगे की पेड़ी हो, रोग फैला हो और खाली जगह ज्यादा हो तो पेड़ी से चिपके रहना समझदारी नहीं है। उल्टा, पहली पेड़ी हो, ठूंठ स्वस्थ हों और पानी तथा पर्ची की व्यवस्था ठीक हो तो पेड़ी रखिए और पहले 30 दिन की देखभाल में कोई कोताही मत कीजिए। जो किसान यह हिसाब कटाई के तुरंत बाद कर लेता है, उसकी अगली फसल भी समय पर खड़ी होती है।
मुख्य बातें
- दो से ज्यादा पेड़ी आमतौर पर फायदेमंद नहीं रहती, पहली पेड़ी स्वस्थ हो तो रखना ठीक है।
- 45 से 50 सेंटीमीटर से बड़े खाली हिस्सों में गैप फिलिंग जरूरी है, ज्यादा खाली खेत तोड़ना बेहतर है।
- लाल सड़न, ग्रासी शूट या स्मट फैला हो तो पेड़ी मत रखिए, नई रोगमुक्त किस्म बोइए।
स्रोत: केरल कृषि विश्वविद्यालय प्रसार पोर्टल का रैटून प्रबंधन खंड, ICRISAT-WWF सतत गन्ना खेती प्रशिक्षण पुस्तिका, उत्तर प्रदेश गन्ना विकास विभाग की सामान्य प्रसार सलाह।
