पेड़ी गन्ना: कटाई के बाद पहले 30 दिन के 5 काम, वरना अगली उपज घट जाएगी

ट्रॉली मिल के लिए निकल गई है। खेत में अब सिर्फ ठूंठ खड़े हैं और कटी पत्तियों का ढेर पड़ा है। थके किसान को लगता है कि इस खेत का काम खत्म हुआ, पर सच उल्टा है। पेड़ी की कहानी कटाई के बाद ही शुरू होती है, और उसके पहले 30 दिन तय कर देते हैं कि अगली बार खेत हरा-भरा होगा या जगह-जगह खाली दिखेगा।
पेड़ी का मतलब है बिना नया बीज लगाए, पुरानी जड़ों से नई फसल लेना। इसमें बीज और जुताई का खर्च बचता है, पर यह बचत तभी काम आती है जब ठूंठ को समय पर संभाला जाए। देर हुई तो फूटाव कमजोर होगा और खाली जगह खरपतवार ले लेगी।
1. सबसे पहले फैसला करें: पेड़ी रखें या तोड़ें
हर खेत की पेड़ी रखने लायक नहीं होती। पिछली फसल स्वस्थ रही हो, पौधों की संख्या अच्छी हो और लाल सड़न या गंभीर रोग का प्रकोप न रहा हो, उसी की पेड़ी रखें। रोगग्रस्त खेत की पेड़ी रखने का मतलब है रोग को अगले साल तक पालना, ऐसे खेत को तोड़कर नई बुवाई करना बेहतर है।
एक सीमा भी याद रखें। आमतौर पर दो से ज्यादा पेड़ी फसलें लेने की सिफारिश नहीं की जाती, क्योंकि हर अगली पेड़ी के साथ रोग और कीट का दबाव बढ़ता है। थकी हुई पेड़ी को खींचने से अच्छा है उसे तोड़ देना।
2. पहले 10 दिन में ठूंठ की सफाई निपटाएं
कटाई जमीन के बराबर होनी चाहिए। ऊपर उठे ठूंठों को तेज हथियार से 4 से 6 सेमी की ऊंचाई तक छांट दें, ताकि नीचे की कलियां फूटें। ऊपर की कली से निकला पौधा कमजोर और उथला रहता है, नीचे की कली वाला गहरी जड़ पकड़ता है और कम गिरता है।
छंटाई के साथ मेड़ के किनारों की सख्त मिट्टी भी तोड़ दें। इसे ऑफ-बारिंग कहते हैं। मिट्टी ढीली होने से नई जड़ों को फैलने की जगह मिलती है और खाद-पानी जड़ों तक पहुंचता है। बड़े खेतों में यह काम भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान के ट्रैक्टर से चलने वाले रैटून प्रबंधन यंत्र से भी हो जाता है, जो एक ही बार में छंटाई, मेड़ तोड़ना और खाद डालना करता है।
कटी हुई पत्तियों को जलाएं नहीं, खेत में ही बिछा दें। यह परत मिट्टी की नमी बचाती है, खरपतवार दबाती है और शुरुआती फूटाव में अर्ली शूट बोरर का दबाव कम करती है। छंटाई के बाद खेत को भरपूर पहली सिंचाई दें, ताकि कलियों को फूटने के लिए नमी मिल जाए।
3. 30 दिन के अंदर खाली जगह भरें
कटाई के बाद जहां पौधे नहीं फूटे, वहां खाली जगह दिखेगी। 45 सेमी से बड़ा कोई भी खाली स्थान भरना जरूरी है, वरना वहां खरपतवार जम जाएगा और वह हिस्सा पूरे साल उपज नहीं देगा।
भरने के लिए सबसे अच्छा तरीका उसी खेत से फूट चुके ठूंठ लेना है। दूसरा तरीका 3 आंख वाले टुकड़े या पॉलीबैग में तैयार पौध लगाना है। भरने वाले पौध की उम्र पेड़ी के बराबर हो, वरना वह पूरी फसल के साथ चल नहीं पाएगा। यह काम छंटाई के 30 दिन के अंदर पूरा कर लें।
4. पेड़ी को पौध फसल से ज्यादा नाइट्रोजन चाहिए
पेड़ी फसल को पौध फसल की तुलना में करीब 25 प्रतिशत ज्यादा नाइट्रोजन चाहिए। पुरानी जड़ों को नया फूटाव देना है और नई कल्लें निकालनी हैं, वह भी बिना उस गोबर की खाद के जो बुवाई के समय मिली थी। नाइट्रोजन में कंजूसी की तो फूटाव पतला होगा और कल्लों की संख्या घट जाएगी।
खाद का कैलेंडर कटाई के दिन से गिनें। 5 से 7 दिन के अंदर नाइट्रोजन की पहली किश्त, 25वें दिन पहली टॉप ड्रेसिंग, 45 से 50वें दिन दूसरी और 70 से 75वें दिन अंतिम किश्त दें। फॉस्फोरस और पोटाश की पहली मात्रा गुड़ाई के साथ मिट्टी में मिला दें। हर खाद के बाद सिंचाई जरूर करें, बिना पानी के खाद जड़ों तक नहीं पहुंचती।
पेड़ी की पत्तियां पीली पड़ने लगें तो यह लोहे की कमी का संकेत हो सकता है। ऐसे में 15वें दिन फेरस सल्फेट 2.5 किलो प्रति हेक्टेयर का छिड़काव किया जाता है और जरूरत पर 15 दिन के अंतर पर दोहराया जाता है। पीलापन बना रहे तो मिट्टी परीक्षण कराकर ही आगे की मात्रा तय करें।
5. गुड़ाई, सिंचाई और कीट पर नजर
20वें दिन पहली गुड़ाई और 40 से 50वें दिन दूसरी गुड़ाई करें। गुड़ाई से खरपतवार निकलता है और मिट्टी में हवा जाती है। 50वें दिन हल्की मिट्टी चढ़ाएं और 90वें दिन पूरी मिट्टी चढ़ा दें, इससे पौधा सीधा खड़ा रहता है और गिरने का खतरा घटता है।
सिंचाई में मिट्टी की नमी बनी रहे, पर पानी खेत में ठहरे नहीं। ठहरा पानी जड़ों को सड़ा देता है और फूटाव रुक जाता है। सर्दी में फूटाव वैसे भी धीमा होता है, इसलिए घबराकर ज्यादा पानी देना भी ठीक नहीं। नमी देखकर सिंचाई करें, कैलेंडर देखकर नहीं।
शुरुआती फूटाव में अर्ली शूट बोरर पर नजर रखें। जिस कोंपल का बीच का पत्ता सूखकर मुरझा जाए, उसे तुरंत निकालकर नष्ट कर दें, वरना कीट अगली कोंपलों तक पहुंच जाएगा।
तीन गलतियां जो पेड़ी बिगाड़ देती हैं
पहली गलती है काम टालना। कटाई के बाद दो-तीन हफ्ते खेत पड़ा रहा तो ठूंठ सूखने लगता है। दूसरी गलती है पत्ती जलाना, जिससे नमी और कीट-नियंत्रण का मुफ्त फायदा निकल जाता है। तीसरी गलती है खाली जगह छोड़ देना और खाद में कंजूसी करना। पेड़ी सस्ती फसल है, मुफ्त की फसल नहीं।
मुख्य बातें
- कटाई के 10 दिन के अंदर ठूंठ की 4 से 6 सेमी तक छंटाई करें, पत्ती जलाने की जगह खेत में बिछाएं और भरपूर पहली सिंचाई दें।
- 45 सेमी से बड़े खाली स्थान 30 दिन के अंदर भरें और पेड़ी को पौध फसल से करीब 25 प्रतिशत ज्यादा नाइट्रोजन किश्तों में दें।
- 20वें और 40 से 50वें दिन गुड़ाई करें, 50वें और 90वें दिन मिट्टी चढ़ाएं, जलभराव से बचें और सूखी कोंपल दिखते ही अर्ली शूट बोरर पर कार्रवाई करें।
स्रोत: तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय एग्रीटेक पोर्टल (गन्ना रैटून प्रबंधन), केरल कृषि विश्वविद्यालय एग्री इन्फोटेक पोर्टल (गन्ना रैटून प्रबंधन), भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान लखनऊ का गन्ना खेती संकलन (रैटून प्रबंधन यंत्र)।
