20 अक्टूबर से पेराई, दाम का फैसला अभी बाकी, पहले ये 5 काम निपटा लें

पश्चिमी यूपी के गन्ना किसानों के लिए इस हफ्ते की सबसे बड़ी खबर पेराई से जुड़ी है। बिजनौर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली और मुरादाबाद की मिलें 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू करने की तैयारी में हैं। पिछले साल के मुकाबले यह शुरुआत करीब 10 दिन पहले होगी। मिलों में बॉयलर पूजा और स्टीम ट्रायल लगभग पूरे हो चुके हैं। अंतिम फैसला मौसम पर टिका है, क्योंकि बारिश या नमी कटाई और ढुलाई दोनों को धीमा कर सकती है।
उत्तर प्रदेश में कुल 122 चीनी मिलें हैं, जिनमें 71 से ज्यादा पश्चिमी यूपी में हैं। इसलिए पेराई की जल्दी शुरुआत का असर सबसे ज्यादा इसी पट्टी पर पड़ेगा। खेत खाली होगा तो गेहूं की बुवाई समय पर होगी, और यही इस साल की जल्दी पेराई का सबसे बड़ा फायदा माना जा रहा है।
दाम का पेंच अभी सुलझा नहीं
पेराई की तारीख करीब आ गई है, पर दाम का पेंच अभी सुलझा नहीं है। केंद्र सरकार ने 2026-27 सत्र के लिए एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय की है। यह दर 10.25 प्रतिशत रिकवरी पर लागू होगी। पिछले सत्र में यह दर 355 रुपये थी, यानी बढ़ोतरी सिर्फ 10 रुपये की हुई है। जिन मिलों की रिकवरी 9.5 प्रतिशत से कम रहती है, वहां के किसानों को कम से कम 338.30 रुपये प्रति क्विंटल मिलेंगे।
उत्तर प्रदेश में पिछले सत्र 2025-26 के लिए एसएपी अगेती किस्म के लिए 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य किस्म के लिए 390 रुपये प्रति क्विंटल था। अनुपयुक्त प्रजाति का दाम 355 रुपये था। 2026-27 के लिए यूपी के नए एसएपी की घोषणा अभी नहीं हुई है। इसका मतलब है कि पेराई की शुरुआत में दाम को लेकर असमंजस बना रहेगा। किसान संगठनों की मांग कहीं ज्यादा है। कई संगठन 500 रुपये प्रति क्विंटल तक के दाम की मांग कर रहे हैं। 22 सितंबर को बिजनौर की महापंचायत में हजारों किसानों ने दाम बढ़ाने, पेराई जल्दी शुरू करने और बकाया पर ब्याज देने की मांग उठाई थी।
चीनी महंगी, गन्ना वहीं का वहीं
दाम की बहस को एक आंकड़ा और हवा देता है। फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार चीनी का औसत खुदरा भाव 55.28 रुपये प्रति किलो तक पहुंचा, जो पिछले साल से करीब 20 प्रतिशत ज्यादा है। आधिकारिक अनुमान है कि पेराई शुरू होने के बाद भाव 52 रुपये किलो तक आ सकता है। किसान का सवाल सीधा है। जब चीनी 20 प्रतिशत महंगी हो गई, तो गन्ने का न्यूनतम दाम सिर्फ 2.81 प्रतिशत क्यों बढ़ा। यही अंतर इस समय चौपालों और महापंचायतों में सबसे ज्यादा सुनाई दे रहा है।
रकबा घटा, संकेत साफ है
एक और आंकड़ा ध्यान देने लायक है। उत्तर प्रदेश में गन्ने का रकबा करीब 47,000 हेक्टेयर घटा है, 28.87 लाख हेक्टेयर से 28.4 लाख हेक्टेयर पर आ गया है। बिजनौर, लखीमपुर और पीलीभीत जैसे बड़े गन्ना जिलों में यह गिरावट दर्ज हुई है। किसानों ने इसकी वजह बढ़ती लागत, मजदूरी और सिंचाई का खर्च, भुगतान में देरी और गन्ने का लंबा फसल चक्र बताया है।
पेराई से पहले ये 5 काम निपटा लें
पेराई शुरू होने से पहले का हफ्ता सबसे अहम होता है। इन 5 कामों को अभी निपटा लें तो बाद में भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी।
1. सर्वे रिकॉर्ड जांच लें। अपने गन्ने के सर्वे का रिकॉर्ड देखें। रकबा और किस्म सही दर्ज है या नहीं, यह अभी जांच लें। सर्वे में गलती रह गई तो पर्ची में अटकाव आएगा और भुगतान भी लटकेगा।
2. बैंक खाता सक्रिय रखें। भुगतान सीधे खाते में आता है। खाता सक्रिय है, आधार से जुड़ा है और लंबे समय से बंद तो नहीं पड़ा, यह जांच लें। पेराई के बीच में खाते की गड़बड़ी पता चली तो पैसा अटक जाएगा।
3. सट्टा और पर्ची का हिसाब समझ लें। अपने सट्टे की स्थिति, क्रय केंद्र का नाम और पर्ची का कैलेंडर पहले से जान लें। क्रय केंद्र कब खुलेगा और आपकी पर्ची कब आएगी, इसकी जानकारी मिल से या समिति से अभी ले लें।
4. तौल पर नजर रखें। पेराई शुरू होने से पहले सभी बाह्य क्रय केंद्रों के डिजिटल कांटों की जांच अनिवार्य की गई है। फिर भी तौल के समय पर्ची लेना न भूलें और वजन अपनी डायरी में नोट करें। यही पर्ची बाद में भुगतान के विवाद में काम आएगी।
5. खाद, पानी और गेहूं की योजना बना लें। जल्दी पेराई का फायदा तभी मिलेगा जब खेत खाली होते ही गेहूं की बुवाई की तैयारी हो। खाद का स्टॉक और नहर के पानी की स्थिति पहले से देख लें, ताकि गन्ना निकलते ही खेत अगली फसल के लिए तैयार हो जाए।
किसान पर इसका क्या असर पड़ेगा
जल्दी पेराई का सीधा फायदा गेहूं की बुवाई को मिलेगा। खेत जल्दी खाली होगा तो गेहूं सही समय पर बोया जाएगा। दूसरी तरफ एक सावधानी भी है। समय से पहले पेराई से गन्ने की रिकवरी पर असर पड़ सकता है, इसलिए कच्चा गन्ना काटने की जल्दबाजी से बचें। दाम का फैसला अभी बाकी है, इसलिए इस सत्र में पर्ची, तौल और भुगतान का रिकॉर्ड और ज्यादा ध्यान से रखें।
मुख्य बातें
- पश्चिमी यूपी की मिलें 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू कर सकती हैं, जो पिछले साल से करीब 10 दिन पहले है।
- एफआरपी 2026-27 के लिए 365 रुपये प्रति क्विंटल तय है, पर यूपी के नए एसएपी की घोषणा अभी बाकी है।
- पेराई से पहले सर्वे रिकॉर्ड, बैंक खाता, सट्टा-पर्ची, तौल और गेहूं की तैयारी जैसे 5 काम अभी निपटा लें।
स्रोत: द टाइम्स ऑफ इंडिया, फाइनेंशियल एक्सप्रेस, द हिंदू
