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15 अक्टूबर: 50 किमी की हवा गन्ना गिरा सकती है, भारी बारिश का अलर्ट नहीं, करें ये 3 काम

✍️ Aamir Raza · 🗓 14 Oct 2026 · ⏱ 4 मिनट में पढ़ें

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15 अक्टूबर: 50 किमी की हवा गन्ना गिरा सकती है, भारी बारिश का अलर्ट नहीं, करें ये 3 काम

मौसम विभाग की ताजा भविष्यवाणी सुनकर पश्चिमी यूपी के गन्ना किसानों को एक साथ राहत और चिंता दोनों हुई है। राहत इस बात की है कि 14 अक्टूबर को प्रदेश में कहीं भारी बारिश का अलर्ट नहीं है। चिंता इस बात की है कि 15 अक्टूबर को गरज-चमक के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की हवा चल सकती है, और झोंके 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं। गन्ना लंबा पौधा है। उसे गिराने के लिए मूसलाधार बारिश की जरूरत नहीं होती, एक तेज झोंका ही काफी होता है।

14, 15 और 16 अक्टूबर: दिन-वार क्या होगा

14 अक्टूबर, बुधवार को पश्चिमी यूपी के कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और बिजनौर के आसपास बारिश के संकेत ज्यादा हैं। लखनऊ समेत मध्य यूपी और पूर्वी यूपी में इस दिन मौसम शुष्क रहने का अनुमान है। यानी बुधवार को घबराने वाली स्थिति नहीं है, लेकिन आसमान पर नजर रखनी होगी।

15 अक्टूबर, गुरुवार को पश्चिमी यूपी में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवा का अनुमान है। यही वह दिन है जब सबसे ज्यादा सावधानी बरतनी है। हवा की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे रह सकती है और झोंकों में 50 तक जा सकती है। पूर्वी यूपी में इस दिन भी मौसम शुष्क रहने की संभावना है।

16 अक्टूबर को एक नए पश्चिमी विक्षोभ के असर से तराई क्षेत्र और उससे सटे मध्यवर्ती जिलों में कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है। इस दिन भी भारी बारिश की कोई चेतावनी नहीं है। कुल मिलाकर यह तीन दिन का दौर है, कोई लंबा बरसाती सिस्टम नहीं।

गन्ने को नुकसान बारिश से नहीं, हवा और ठहरे पानी से है

किसान अक्सर पूछते हैं कि हल्की बारिश से गन्ने को क्या नुकसान? जवाब यह है कि बारिश अपने आप में कम, उसके बाद की दो चीजें ज्यादा नुकसान करती हैं।

पहली चीज है तेज हवा। पेराई के करीब पहुंचा गन्ना अब काफी लंबा और भारी हो चुका है। तेज झोंका उसे जड़ समेत झुका देता है। एक बार गिरा गन्ना अपने आप सीधा नहीं होता। उसमें नई अनचाही शाखाएं निकलने लगती हैं, जिन्हें वाटर शूट्स कहा जाता है, और गन्ने की क्वालिटी गिर जाती है। बीज के लिए रखे गन्ने को इसका सबसे ज्यादा नुकसान होता है, क्योंकि वही अगली बुवाई का आधार है।

दूसरी चीज है खेत में ठहरा पानी। बारिश रुकने के बाद अगर खेत में पानी दो-तीन दिन तक भरा रहे तो जड़ों को हवा नहीं मिलती। पौधा पीला पड़ने लगता है और निचले हिस्से में सड़न का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए बारिश के बाद सबसे पहला काम खेत से पानी निकालने का है, खाद छिड़कने का नहीं।

आज ही निपटाने वाले 3 काम

गिरे गन्ने को बांधें। बारिश रुकते ही खेत का चक्कर लगाएं। जहां गन्ना गिरा हो, उसे सीधा करके 8-10 पौधों के गुच्छों में बांध दें। बीज वाले गन्ने को सबसे पहले संभालें। बंधा हुआ गन्ना फिर से जड़ पकड़ लेता है और वाटर शूट्स की समस्या कम होती है।

नालियों और मेड़ों को साफ रखें। बारिश से पहले ही खेत की निकासी वाली नालियों से मिट्टी और पत्ते हटा दें। पानी को खेत से बाहर निकलने का रास्ता मिलेगा तो जड़ें बचेंगी। निचले खेतों में यह काम सबसे ज्यादा जरूरी है, क्योंकि वहां पानी सबसे पहले भरता है।

पर्ची और सट्टे के कागज संभालकर रखें। बारिश के मौसम में कागज भीगकर खराब हो जाते हैं। पर्ची, सट्टा और सर्वे की पर्चियां प्लास्टिक की थैली में रखकर सूखी जगह पर रखें। पेराई के समय यही कागज काम आएंगे।

ये गलतियां अब मत करना

गीले खेत में ट्रैक्टर या भारी मशीन चलाने से बचें। गीली मिट्टी दब जाती है और जड़ें टूट जाती हैं। नुकसान बारिश से नहीं, जल्दबाजी से होता है।

गीले खेत में यूरिया डालना भी बेकार है। खाद बह जाएगी और पौधे को कुछ नहीं मिलेगा। खेत सूखने के बाद ही खाद के बारे में सोचें।

गिरे गन्ने को घबराहट में काटकर बेचने की जल्दबाजी भी ठीक नहीं। मिल की पर्ची और कैलेंडर के हिसाब से ही कटाई करें। गिरा गन्ना बंधने के बाद भी काम का रहता है।

पेराई पर क्या असर पड़ेगा

पेराई सत्र सिर पर है, लेकिन इस बारिश से पेराई की तारीख पर सीधा असर पड़ने की कोई खबर नहीं है। हां, इतना जरूर है कि खेत में पानी भरा रहा तो कटाई और ढुलाई में दिक्कत होगी। ट्रॉली फंसेगी, मजदूर कम मिलेंगे, तौल में देरी होगी। इसलिए बारिश के इन तीन दिनों में खेत की निकासी पर ध्यान देना ही पेराई की सबसे अच्छी तैयारी है। मौसम साफ होते ही खेत सूखेगा और काम पटरी पर आ जाएगा।

मुख्य बातें

  • 14 अक्टूबर को भारी बारिश का अलर्ट नहीं है, पश्चिमी यूपी में कहीं-कहीं हल्की बौछारें पड़ सकती हैं।
  • 15 अक्टूबर को सबसे ज्यादा सावधानी बरतें, हवा के झोंके 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं।
  • बारिश के बाद गिरे गन्ने को बांधें, खेत से पानी निकालें और गीले खेत में मशीन या खाद से बचें।

स्रोत: लाइव हिन्दुस्तान (13-14 अक्टूबर 2026), यूपी तक (13 अक्टूबर 2026), किसान तक।

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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