पलिया मिल ने लिखकर दिया वादा: 7% पेमेंट आज, दीवाली से पहले पूरा 101.83 करोड़

“दीवाली का त्योहार सिर पर है, और घर में पैसा चाहिए। मिल का बकाया कब आएगा?” लखीमपुर खीरी के पलिया क्षेत्र के गन्ना किसानों का यही सवाल बीते कई हफ्तों से हर बैठक और हर चौराहे पर गूंज रहा था। अब इस सवाल का एक लिखित जवाब मिला है।
बजाज हिंदुस्तान लिमटेड शुगर मिल पलिया के प्रशासन ने किसान संगठन के प्रतिनिधिमंडल को लिखकर दिया है कि 1 अक्टूबर 2026 को किसानों के कुल बकाये का 7 प्रतिशत भुगतान कर दिया जाएगा, और पूरा बकाया अक्टूबर माह के अंत तक, यानी दीवाली से पहले, किसानों के बैंक खातों में भेज दिया जाएगा। कुल बकाया राशि 101 करोड़ 83 लाख रुपये बताई गई है।
भारतीय किसान मजदूर यूनिट (सिंघानिया संगठन) के प्रतिनिधिमंडल ने मिल के यूनिट हेड और जीएम से आमने-सामने वार्ता की थी। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, वार्ता के दौरान मिल प्रशासन ने स्वीकार किया कि कुछ तकनीकी कारणों से भुगतान में देरी हुई है। दबाव बढ़ने पर मिल को लिखित आश्वासन देना पड़ा। वार्ता में मौजूद किसान नेताओं में प्रदेश उपाध्यक्ष रमाकांत दीक्षित, प्रदेश संगठन मंत्री नन्द किशोर आर्या, मंडल मीडिया प्रभारी निर्वेंद्र कुमार गुप्ता, निघासन ब्लॉक सचिव सादाब खान, तहसील पलिया अध्यक्ष साहब लाल बौद्ध और ब्लॉक अध्यक्ष लक्ष्मी कांत के नाम सामने आए हैं।
वार्ता में क्या-क्या तय हुआ
भुगतान का शेड्यूल दो हिस्सों में बंटा है:
- 1 अक्टूबर 2026: कुल बकाये का 7 प्रतिशत, यानी लगभग 7 करोड़ 13 लाख रुपये। यह रकम आज किसानों के खातों में भेजी जानी है।
- अक्टूबर के अंत तक: शेष पूरा बकाया, यानी कुल 101.83 करोड़ रुपये का शत-प्रतिशत भुगतान दीवाली से पहले।
यह बकाया पेराई सत्र 2025-26 का बताया जा रहा है। मिल प्रशासन ने कहा है कि भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजा जाएगा, इसलिए किसानों को अपने खाते की केवाईसी और बैंक से जुड़ा मोबाइल नंबर अपडेट रखने की सलाह दी गई है। तकनीकी दिक्कत की वजह से भुगतान अटकना कोई नई बात नहीं है, और इस बार मिल खुद कह रही है कि शेड्यूल में अब कोई और देरी नहीं होगी।
यह बकाया आया कहां से, और पलिया में गुस्सा क्यों बढ़ा था
पलिया चीनी मिल भुगतान को लेकर किसानों की नाराजगी अचानक नहीं भड़की है। बीते पेराई सत्रों में भी यह मिल भुगतान में पिछड़ती रही है। करीब दो साल पहले पलिया सहकारी गन्ना विकास समिति की बैठक में किसानों ने चेतावनी दी थी कि 31 अक्टूबर तक भुगतान न हुआ तो मिल के यूनिट हेड पर एफआईआर दर्ज कराई जाए। उस समय बैठक में चीनी मिल के केन जीएम और गन्ना समिति के अधिकारी भी मौजूद थे।
इसी कड़ी में महज चार दिन पहले, गोला गोकर्णनाथ में हुई सहकारी गन्ना विकास समिति की बैठक में भी बकाये को लेकर हंगामा हुआ था। वहां किसानों ने 15 अक्टूबर तक ब्याज समेत भुगतान की मांग रखी थी और चेतावनी दी थी कि बकाया चुकाए बिना नया पेराई सत्र शुरू नहीं होने देंगे। हिंदुस्तान में छपी उस खबर से साफ है कि लखीमपुर खीरी की बजाज समूह की मिलों पर भुगतान का दबाव लगातार बना हुआ है।
यानी पलिया का लिखित आश्वासन किसानों के लंबे दबाव का नतीजा है, मिल की उदारता का नहीं।
किसान नेताओं की दो-टूक चेतावनी
लिखित आश्वासन मिलने के बाद किसान नेताओं ने फिलहाल आंदोलन टाल दिया है, लेकिन चेतावनी में कोई नरमी नहीं रखी। किसान नेताओं का कहना है कि अगर तय समय में पूरा भुगतान नहीं हुआ तो किसान सड़क पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगे, और उसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन और चीनी मिल प्रबंधन की होगी।
यह चेतावनी सिर्फ दिखावे की नहीं लगती। पलिया क्षेत्र में भुगतान को लेकर पहले भी मिल परिसर में विरोध और बैठकों का दौर चल चुका है। दीवाली से पहले पैसा न मिलने का मतलब है कि किसानों को त्योहार का खर्च उधार लेकर चलाना पड़ेगा, इसलिए इस बार किसान नेता हर तारीख पर नजर रखेंगे।
पैसा खाते में आया या नहीं, ऐसे जांचें
आश्वासन लिखित है, लेकिन किसान के काम की चीज पैसा है। 1 अक्टूबर की 7 प्रतिशत की किस्त पर नजर रखने के लिए ये कदम उठाएं:
- बैंक खाते से जुड़े मोबाइल नंबर पर एसएमएस अलर्ट चालू रखें। पैसे की एंट्री आते ही संदेश मिलेगा।
- खाते की केवाईसी पूरी और मोबाइल नंबर अपडेट रखें। तकनीकी वजह से भुगतान रुकने की सबसे आम वजह यही होती है।
- eGanna ऐप या caneup.in पर अपने सट्टे और भुगतान की स्थिति खुद जांचें।
- भुगतान न आने पर गन्ना समिति के सचिव से लिखित में शिकायत करें। मौखिक शिकायतें रिकॉर्ड में नहीं रहतीं।
सरकारी हेल्पलाइन: टोल-फ्री 1800-121-3203 या 1800-180-5129 पर भुगतान संबंधी जानकारी ली जा सकती है। गन्ना विभाग का एसएमएस शॉर्टकोड 51969 भी सक्रिय है।
मुख्य बातें
- पलिया बजाज मिल ने लिखित में दिया वादा: 1 अक्टूबर को कुल बकाये का 7% (लगभग 7.13 करोड़ रुपये) और अक्टूबर अंत तक पूरा 101.83 करोड़ रुपये किसानों के खातों में।
- यह बकाया पेराई सत्र 2025-26 का है; भुगतान न होने पर किसान नेताओं ने बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।
- किसान अपने बैंक एसएमएस अलर्ट और eGanna पर भुगतान की स्थिति जांचें; केवाईसी और मोबाइल नंबर अपडेट रखें।
स्रोत: स्थानीय वीडियो न्यूज रिपोर्ट (एमकेएस न्यूज, 30 सितंबर 2026), हिन्दुस्तान (लखीमपुर खीरी, 27 सितंबर 2026), चिनीमंडी (पलिया मिल भुगतान विवाद, पूर्व रिपोर्ट)
