₹74 करोड़ बकाए पर ओसवाल मिल सील: बिजली कटी, 22 अक्टूबर को 180 करोड़ की नीलामी

नवाबगंज, बरेली। गुरुवार की दोपहर ओसवाल चीनी मिल के गेट पर बड़ा हंगामा हुआ। एसडीएम नवाबगंज सचिन यादव के नेतृत्व में राजस्व और गन्ना विभाग की टीम मिल परिसर पहुंची, कर्मचारियों और मजदूरों को बाहर निकाला और मिल के मुख्य गेट पर ताला लगवा दिया। इसके बाद विद्युत निगम के जेई को बुलाकर मिल की बिजली भी कटवा दी गई। अधिकारियों ने साफ कह दिया है: अब इस मिल की नीलामी 22 अक्टूबर को होगी, और उससे मिलने वाली रकम से सबसे पहले किसानों का बकाया चुकाया जाएगा।
मालिक के आवास पर भी ताला, परिवारों को 3 घंटे की मोहलत
कार्रवाई की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस बार प्रशासन ने मिल परिसर में रहने वाले मिल मालिक के आवास को भी सील कर दिया। मिल में काम करने वाले कर्मचारियों और मजदूरों के परिवारों को कहा गया कि तीन घंटे के अंदर अपने आवास खाली कर दें। कार्रवाई के दौरान मिल परिसर में झंडी लगवाकर नीलामी का निशान भी लगा दिया गया, ताकि साफ हो जाए कि अब यह संपत्ति प्रशासन के कब्जे में है।
साथ में एसडीएम ने यह भी साफ कर दिया कि 22 अक्टूबर की नीलामी प्रक्रिया पूरी होने तक बिना प्रशासन की अनुमति के किसी भी व्यक्ति को मिल परिसर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। सुरक्षा के लिए परिसर में पुलिस बल भी तैनात किया जा रहा है। राहत की एक बात यह रखी गई कि मिल परिसर में बने गुरुद्वारे और मंदिर में धार्मिक कार्य चलते रहेंगे, जत्थेदार और पुजारियों को आने-जाने की अनुमति रहेगी। कार्रवाई के दौरान तहसीलदार सतेंद्र कटियार, नायब तहसीलदार शुभम पांडेय और जिला गन्ना अधिकारी भी मौजूद रहे।
74 करोड़ का बकाया कैसे जमा हुआ
औरंगाबाद गांव, नवाबगंज स्थित इस मिल पर गन्ना किसानों का बकाया कोई नया नहीं है। पेराई सत्र 2023-24 में मिल पर करीब 107.12 करोड़ रुपये का गन्ना भुगतान बकाया था। इसमें से लगभग 91.64 करोड़ रुपये का भुगतान मिल ने किया, लेकिन बाकी रकम अटकी रही।
असल झटका अगले सत्र में लगा। 2024-25 के पेराई सत्र में मिल ने किसानों से करीब 39.45 करोड़ रुपये का गन्ना खरीदा, लेकिन इस बार एक भी रुपये का भुगतान नहीं किया। ऐसे में मूल बकाया बढ़ता गया और उस पर ब्याज जुड़ने के बाद कुल आंकड़ा अब लगभग 74 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
पुणे की टीम ने 180 करोड़ का मूल्यांकन किया
नीलामी से पहले यह तय करना जरूरी था कि मिल की असल कीमत कितनी है। इसके लिए करीब दो सप्ताह पहले पुणे (महाराष्ट्र) से तीन सदस्यीय विशेषज्ञ तकनीकी टीम को बरेली बुलाया गया था। टीम ने मिल परिसर और उसकी संपत्तियों का बारीकी से निरीक्षण किया और पूरी मिल की कीमत करीब 180 करोड़ रुपये आंकी।
180 करोड़ के मूल्यांकन वाली मिल से 74 करोड़ का बकाया चुकाना संभव दिखता है, लेकिन बोली कितनी आती है, इसी पर सब कुछ टिका है। नीलामी से जुड़ी और खबर हमने अपने पहले लेख ओसवाल मिल की पूरी बिक्री और 180 करोड़ मूल्यांकन में भी दी थी, जब मूल्यांकन रिपोर्ट आई थी।
कुर्की के बाद भी नहीं मिला पैसा, अब आखिरी रास्ता
यह पहली बार नहीं है जब ओसवाल मिल पर सख्ती हुई हो। बकाया भुगतान को लेकर प्रशासन पिछले तीन वर्षों से मिल प्रबंधन पर दबाव बना रहा था। शासन के निर्देश पर मिल के खिलाफ रिकवरी सर्टिफिकेट जारी हुआ और मिल की भूमि व संपत्तियों की कुर्की की कार्रवाई भी हो चुकी है। स्थिति इतनी खराब हुई कि पिछले पेराई सत्र में इस मिल को गन्ना तक आवंटित नहीं किया गया था।
तमाम नोटिस और कुर्की के बाद भी किसानों के हाथ पैसा नहीं आया। अब मिल को सील करके सीधे नीलामी का रास्ता चुना गया है, ताकि संपत्ति बिकने पर मिलने वाली रकम से बकाया चुकाया जा सके।
किसानों के लिए अब क्या, पैसा कब मिलेगा
प्रशासन का कहना है कि नीलामी से मिलने वाली रकम से सबसे पहले गन्ना किसानों का बकाया चुकाया जाएगा। नवाबगंज के किसानों को सलाह है कि अपने बैंक खाते की केवाईसी और खाते से जुड़ा मोबाइल नंबर अपडेट रखें, ताकि भुगतान में कोई तकनीकी अड़चन न आए। बकाया भुगतान से जुड़ी शिकायत के लिए किसान उत्तर प्रदेश सरकार के टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-121-3203 पर संपर्क कर सकते हैं। अपना गन्ना बकाया और भुगतान की स्थिति आप eGanna ऐप से भी घर बैठे देख सकते हैं।
नवाबगंज के किसानों के लिए यह सीलिंग कार्रवाई उम्मीद की किरण है, लेकिन असल पैसा तभी आएगा जब 22 अक्टूबर की नीलामी ठीक से हो और उससे मिली रकम सही तरीके से किसानों तक पहुंचे।
मुख्य बातें
- 1 अक्टूबर को ओसवाल चीनी मिल (नवाबगंज, बरेली) को सील किया गया; बिजली काटी गई, मालिक के आवास पर भी ताला लगा।
- ब्याज समेत किसानों का बकाया करीब 74 करोड़ रुपये; 2023-24 के 107.12 करोड़ में से 91.64 करोड़ चुकाए गए, 2024-25 का 39.45 करोड़ पूरी तरह बकाया।
- पुणे की विशेषज्ञ टीम ने मिल का मूल्यांकन 180 करोड़ रुपये लगाया; 22 अक्टूबर को नीलामी से मिली रकम से किसानों का बकाया चुकाया जाएगा।
स्रोत: लाइव हिंदुस्तान (1 अक्टूबर 2026), अतुल्य भारत चेतना (1 अक्टूबर 2026), जागेश्वर न्यूज (1 अक्टूबर 2026)
