गन्ने पर ₹15,000/एकड़ सब्सिडी की घोषणा: यूपी के किसान के लिए क्या संकेत

गन्ना बोने में एक एकड़ पर कितना खर्च आता है, यह किसान से बेहतर कोई नहीं जानता। बीज, खाद, पानी, मजदूरी और फिर कटाई तक की देखभाल। अगर यही लागत सरकार आधी कर दे या उसका बड़ा हिस्सा संभाल ले, तो किसान की राहत का हिसाब कितना बड़ा होगा? यही सवाल तब और बड़ा हो जाता है, जब पता चले कि एक राज्य ने अपने गन्ना किसानों के लिए ₹15,000 प्रति एकड़ तक की इनपुट सब्सिडी की घोषणा कर दी है।
यह घोषणा ओडिशा से आई है। 25 सितंबर 2026 को भुवनेश्वर में मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने “संबंध” नाम का सहकारी सदस्यता अभियान शुरू किया। इसी मंच से उन्होंने गन्ना किसानों के लिए एक नई योजना का ऐलान किया: “Promotion of Sugarcane Production in Cooperative Sugar Industry Areas”। योजना का मकसद दो है। पहला, बंद पड़ती सहकारी चीनी मिलों को फिर से जिंदा करना। दूसरा, उन मिलों के कमांड एरिया में गन्ना उगाने वाले किसानों की आय बढ़ाना।
बादम्बा और आसिका: ₹15,000 प्रति एकड़ किसे मिलेगा
योजना के पहले चरण में बादम्बा और आसिका सहकारी चीनी मिलों के कमांड एरिया के किसानों को प्रति एकड़ ₹15,000 की इनपुट सब्सिडी मिलेगी। यानी गन्ना बोने, खाद और बाकी खर्च में किसान को सीधी आर्थिक मदद मिलेगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग को निर्देश दिया है कि इन इलाकों में किसानों को ज्यादा चीनी देने वाली किस्मों के बीज मुहैया कराए जाएं, ताकि उपज के साथ किसानों की आमदनी भी बढ़े।
सब्सिडी अकेली नहीं आई। उसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सहकारी समितियों के किसानों को वित्तीय वर्ष 2024-25 का लाभांश (डिविडेंड) बांटने का काम भी शुरू किया। पहले चरण में 322 समितियों के किसान लाभान्वित हुए और आगे करीब 8 लाख किसानों तक इसका विस्तार होगा।
सहकारिता के दम पर पूरी योजना
पूरे अभियान का नाम “संबंध” है और इसका जोर सहकारी समितियों को मजबूत करने पर है। ओडिशा ने देश की अपनी सहकारी नीति 2026 बनाने वाला पहला राज्य बनने का दावा किया है, जो केंद्र की “सहकार से समृद्धि” सोच से प्रेरित है। राज्य की योजना है कि प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS) और लैम्प्स (LAMPCS) को सिर्फ कर्ज देने वाली संस्थाओं से निकालकर बहुउद्देशीय ग्रामीण सेवा केंद्र बनाया जाए।
इन केंद्रों से किसान धान की खरीद (₹3,100 प्रति क्विंटल MSP पर) के साथ-साथ खाद, बीज, कृषि यंत्र, बैंकिंग, फसल बीमा और दूध संग्रह जैसी सुविधाएं एक ही छत के नीचे पा सकेंगे। 300 समितियों को नेशनल PACS सॉफ्टवेयर से जोड़कर ऑनलाइन लेनदेन भी शुरू कर दिया गया है।
यूपी के किसान के लिए क्या संकेत
अब सवाल यूपी के किसान के मन में है: इसका हमसे क्या लेना-देना? पहला संकेत साफ है। ओडिशा की योजना दिखाती है कि सरकारें अब गन्ने को सिर्फ भाव बढ़ाने से नहीं, लागत घटाने की मदद से भी सहारा दे रही हैं। ₹15,000 प्रति एकड़ इनपुट सब्सिडी असल में गन्ने की बुवाई लागत का बड़ा हिस्सा उठाती है। यूपी में पेराई सत्र 2026-27 शुरू होने को है, पश्चिम यूपी के कई जिलों में 15 अक्टूबर तक मिल चलाने के निर्देश हैं, और नया FRP ₹365 प्रति क्विंटल 1 अक्टूबर से लागू हो चुका है। भाव तो घोषित हो गया, लेकिन बुवाई से लेकर पेराई तक की लागत किसान को खुद उठानी पड़ती है। ओडिशा की तरह लागत पर सीधी मदद यूपी के किसानों की सबसे बड़ी मांग में से एक रही है।
दूसरा संकेत सहकारी व्यवस्था का है। ओडिशा में समितियों को मजबूत करके किसान तक मदद पहुंचाने का रास्ता चुना गया है। यूपी में भी गन्ना समितियां पर्ची, सट्टा और भुगतान की धुरी हैं, और हाल ही में सदस्यता की अंतिम तारीख बढ़ाकर 10 अक्टूबर कर दी गई थी। मजबूत समिति का मतलब है समय पर पर्ची, सही भुगतान और योजना का फायदा समय पर किसान तक पहुंचना।
तीसरा संकेत बीज और किस्म का है। ओडिशा ने ज्यादा चीनी वाली किस्मों के बीज बांटने का निर्देश दिया है। यूपी के किसानों के लिए भी सही किस्म का चुनाव इस सत्र में सबसे जरूरी काम है, क्योंकि ज्यादा रिकवरी वाली किस्म से मिल की पेराई भी बेहतर होती है और किसान की पूछ भी बढ़ती है। लाल सड़न जैसी बीमारियों से ग्रस्त इलाकों में नई स्वीकृत किस्मों की ओर बढ़ना अब विकल्प नहीं, जरूरत बन गया है।
यह योजना फिलहाल सिर्फ दो सहकारी मिलों के कमांड एरिया तक सीमित है और इसका असल असर आने वाले सत्रों में दिखेगा। यूपी में 122 चीनी मिलें हैं और यहां की व्यवस्था अलग है। फिर भी यह खबर एक संकेत जरूर है: सरकारें अब गन्ना किसानों की बात करते समय भाव के साथ लागत पर भी ध्यान दे रही हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि यूपी में पेराई सत्र शुरू होने के साथ लागत घटाने के लिए कोई नई घोषणा होती है या नहीं।
मुख्य बातें
- ओडिशा ने बादम्बा और आसिका सहकारी चीनी मिलों के कमांड एरिया में गन्ना किसानों को ₹15,000 प्रति एकड़ इनपुट सब्सिडी देने की योजना शुरू की है।
- “संबंध” अभियान के तहत PACS समितियों को बहुउद्देशीय केंद्र बनाया जाएगा और 322 समितियों के किसानों को 2024-25 का लाभांश मिलना शुरू हुआ है।
- यूपी के लिए संकेत: पेराई सत्र 2026-27 की शुरुआत के बीच लागत घटाने की मदद और सहकारी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में नजर बनी रहेगी।
स्रोत: टाइम्स ऑफ इंडिया (25 सितंबर 2026), कलिंग टीवी, ओडिशा बाइट्स
