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नवाबगंज ओसवाल मिल की पूरी बिक्री तय: 70 करोड़ बकाया चुकाने को खरीदार तलाशे जा रहे

✍️ Aamir Raza · 🗓 30 Sep 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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नवाबगंज ओसवाल मिल की पूरी बिक्री तय: 70 करोड़ बकाया चुकाने को खरीदार तलाशे जा रहे

सालों से भुगतान का इंतजार कर रहे नवाबगंज के गन्ना किसानों के लिए बड़ी खबर आई है। अब जिला प्रशासन सिर्फ मिल की जमीन नहीं, पूरी ओसवाल चीनी मिल ही बेचने जा रहा है। पुणे की तकनीकी टीम ने मिल का मूल्यांकन 180 करोड़ रुपये लगाया है और मिल खरीदने वालों की तलाश शुरू हो गई है।

तीन साल से चल रहा यह बकाया मामला अब आखिरी पड़ाव पर दिख रहा है। किसानों का करीब 70 करोड़ रुपये का भुगतान ब्याज समेत अटका पड़ा है। प्रशासन का कहना है कि मिल बिकने के बाद मिलने वाली रकम से सबसे पहले किसानों का बकाया चुकाया जाएगा।

180 करोड़ का मूल्यांकन, अब खरीदार की तलाश

बरेली के जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने उप जिलाधिकारी नवाबगंज सचिन यादव की अध्यक्षता में चीनी मिल की बिक्री के लिए एक कमेटी गठित कर दी है। प्रशासनिक अधिकारी अब मिल के लिए खरीदार तलाश रहे हैं।

वसंत दादा शुगर इंस्टीट्यूट, पुणे (महाराष्ट्र) की तीन सदस्यीय तकनीकी टीम ने मिल का मूल्यांकन 180 करोड़ रुपये किया है। इसी मूल्यांकन के आधार पर बिक्री की पूरी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

जिला गन्ना अधिकारी डीके सैनी का कहना है कि अब चीनी मिल की जमीन की नहीं, पूरी चीनी मिल की बिक्री की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि जल्द ही चीनी मिल बिक जाएगी। यह बात किसानों के लिए इसलिए अहम है क्योंकि पहले सिर्फ जमीन की नीलामी की बात हो रही थी, अब मिल पूरी बिकेगी तो रकम भी ज्यादा मिलेगी।

70 करोड़ बकाया कैसे पहुंचा

कहानी 2023-24 के पेराई सत्र से शुरू होती है। उस साल मिल को गन्ना किसानों का 107.12 करोड़ रुपये बकाया था, जिसमें से मिल प्रबंधन ने 91.64 करोड़ का भुगतान कर दिया। इसके बाद 15.48 करोड़ रुपये बकाया रह गया था।

फिर आया 2024-25 का सत्र। इस सत्र में मिल ने किसानों से 39.45 करोड़ रुपये का गन्ना खरीदा, लेकिन भुगतान एक रुपये का भी नहीं किया। इस तरह बकाया रकम बढ़कर 54.93 करोड़ पहुंच गई, जो अब ब्याज मिलाकर करीब 70 करोड़ रुपये हो चुकी है।

चिनीमंडी की रिपोर्ट के अनुसार, इस बकाये की चपेट में हजारों गन्ना किसान हैं जो करीब दो साल से अपने पैसों का इंतजार कर रहे हैं।

FIR, नोटिस, चीनी जब्ती — पर पैसा नहीं मिला

यह नहीं कि प्रशासन ने कोशिश नहीं की। दैनिक जागरण के मुताबिक, मिल प्रबंधन पर बकाया भुगतान कराने के लिए प्रशासन तीन साल से दबाव बना रहा है, लेकिन मिल प्रबंधन ने एक रुपये का भी भुगतान नहीं किया।

जिला अधिकारियों ने उप आयुक्त, जिलाधिकारी और जिला गन्ना अधिकारी की तरफ से 30 से ज्यादा नोटिस जारी किए। 2 सितंबर 2025 को शासन के निर्देश पर मिल के प्रबंध निदेशक के खिलाफ हाफिजगंज थाने में प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई। इसका भी कोई असर नहीं पड़ा तो आरसी जारी कर चीनी मिल की जमीन कुर्क करा दी गई।

पिछले पेराई सत्र में तो चीनी मिल को गन्ना ही आवंटित नहीं किया गया था। इससे पहले प्रशासन ने मिल के गोदाम से 8,900 क्विंटल चीनी जब्त की थी, जिसे 3.39 करोड़ रुपये में नीलाम करके किसानों को आंशिक भुगतान किया गया था। लेकिन असल बकाया अभी भी बाकी है।

किसानों का धरना और प्रशासन की बैठक

बकाये को लेकर किसान भी लगातार आवाज उठा रहे हैं। कुछ हफ्ते पहले पानी नजर संस्था की अध्यक्ष सुनीता गंगवार के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान नवाबगंज प्रशासन से मिले थे। उन्होंने करीब दो साल से लंबित गन्ना भुगतान को जल्द से जल्द कराने की मांग की थी।

एसडीएम सचिन यादव ने किसानों को बताया था कि मिल की संपत्तियों का मूल्यांकन हो चुका है और मूल्यांकन रिपोर्ट के आधार पर नीलामी की प्रक्रिया नियमानुसार की जाएगी। बैठक में संगठन की तरफ से चेतावनी भी दी गई थी कि अगर नीलामी में अड़चन डाली गई या भुगतान में देरी हुई तो किसान संगठन मिलकर बड़ा आंदोलन छेड़ेंगे।

किसान के लिए इसका मतलब क्या है

सीधी बात यह है: मिल का मूल्यांकन (180 करोड़) बकाया (70 करोड़) से काफी ज्यादा है। अगर मिल अच्छे दाम पर बिकती है तो किसानों का पूरा बकाया एक बार में चुकने की संभावना है।

लेकिन एक बात समझना जरूरी है। बिक्री की प्रक्रिया में समय लग सकता है। खरीदार मिलना, कानूनी प्रक्रिया, फिर पैसों का वितरण — यह सब रातोंरात नहीं होगा। इसलिए किसान अपने गन्ना भुगतान से जुड़े कागजात — पर्ची, तौल की रसीदें, भुगतान के रिकार्ड — संभालकर रखें।

अगर आप भी इस मिल में गन्ना बेच चुके हैं और बकाया बचा है, तो जिला गन्ना कार्यालय से संपर्क में रहें। नीलामी या बिक्री से मिलने वाली रकम का वितरण प्रशासन की निगरानी में होगा, इसलिए किसी बिचौलिये के झांसे में न आएं।

मुख्य बातें

  • नवाबगंज (बरेली) स्थित ओसवाल चीनी मिल का मूल्यांकन 180 करोड़ रुपये — पुणे की वसंत दादा शुगर इंस्टीट्यूट की तीन सदस्यीय टीम ने लगाया।
  • किसानों का करीब 70 करोड़ रुपये (ब्याज सहित) का बकाया — जिलाधिकारी ने एसडीएम नवाबगंज सचिन यादव की अध्यक्षता में बिक्री के लिए कमेटी बनाई।
  • जिला गन्ना अधिकारी के मुताबिक अब सिर्फ जमीन नहीं, पूरी मिल की बिक्री की प्रक्रिया चल रही है; बिक्री की रकम से सबसे पहले किसानों का बकाया चुकाया जाएगा।

स्रोत: दैनिक जागरण (29 सितंबर 2026), चिनीमंडी (ChiniMandi)।

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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