गन्ने में 2 स्प्रे से यूरिया 25% कम: नैनो खाद का सही तरीका

खेत में यूरिया की बोरी उतारते वक्त कंधे पर जो भार पड़ता है, गन्ना किसान उसे अच्छी तरह जानता है। एक एकड़ में 75 किलो यूरिया। हाथ से बिखेरो, फिर पानी लगाओ, और फिर भी आधी खाद बह जाती है। बिजनौर में कुछ साल पहले गन्ना विभाग और इफको ने मिलकर ड्रोन से नैनो यूरिया का प्रदर्शन कराया था। 10 से 12 किलो के पेलोड वाला ड्रोन दस मिनट में आठ बीघा गन्ने पर छिड़काव करके लौट आया। देखकर कई किसानों के मन में एक ही सवाल आया। इतनी सी बोतल इतनी बड़ी बोरी का काम कैसे कर सकती है?
जवाब पत्तियों में छिपा है। दानेदार यूरिया मिट्टी से होकर पौधे तक पहुंचती है, रास्ते में बहुत कुछ गंवाकर। नैनो यूरिया सीधे पत्ती पर छिड़की जाती है और वहीं से पौधे में समा जाती है। तरीका बदल गया है, बस तरीका सही होना चाहिए।
नैनो यूरिया आखिर है क्या
नैनो यूरिया दानेदार नहीं, तरल खाद है। 500 मिली की छोटी बोतल में आती है। इसे मिट्टी में नहीं मिलाया जाता, पत्तियों पर छिड़का जाता है। पत्ती के सूक्ष्म छेदों से नाइट्रोजन सीधे पौधे में उतरता है, इसलिए न बहने का डर रहता है न हवा में उड़ने का। इफको की आधिकारिक सलाह है कि 2 से 4 मिली नैनो यूरिया प्रति लीटर पानी में घोलकर पत्तियों पर छिड़काव करें।
गन्ने पर हुए एक शोध में 4 मिली प्रति लीटर की दर से छिड़काव आजमाया गया और नतीजा साफ था। 100% फॉस्फोरस और पोटाश के साथ सिर्फ 75% नाइट्रोजन देने पर भी पैदावार उतनी ही आई, जितनी पूरे 100% नाइट्रोजन से आती थी। यानी यूरिया की एक चौथाई बचत, पैदावार में कोई कटौती नहीं।
दो स्प्रे का कैलेंडर: 90 और 180 दिन
गन्ने में नैनो यूरिया के दो छिड़काव ही काफी हैं। पहला छिड़काव बुवाई के 90 दिन बाद, दूसरा 180 दिन बाद। पेड़ी (रैटून) फसल में यही गणित कटाई के बाद गिना जाता है। कटाई के 90 दिन बाद पहला स्प्रे और 180 दिन बाद दूसरा।
एक एकड़ पर करीब 125 लीटर पानी का घोल लगता है। 4 मिली प्रति लीटर के हिसाब से एक एकड़ के एक स्प्रे में करीब आधा लीटर नैनो यूरिया चाहिए। यानी एक स्प्रे में एक बोतल। जो किसान इस अक्टूबर में शरदकालीन बुवाई कर रहे हैं, उनका पहला स्प्रे जनवरी-फरवरी में पड़ेगा, ठीक उस वक्त जब फसल में किल्ले निकल रहे होंगे।
एक बात गांठ बांध लें। यह पूरी यूरिया का विकल्प नहीं है। बुवाई के समय मिट्टी में दी जाने वाली बेसल खाद जारी रहेगी। नैनो स्प्रे उसे पूरक करता है, बदलता नहीं।
नैनो डीएपी: शुरुआती 60 दिनों का काम
यूरिया नाइट्रोजन देता है, लेकिन जड़ों और शुरुआती बढ़वार के लिए फॉस्फोरस चाहिए। यहां नैनो डीएपी काम आता है। गन्ने में इसकी दो तरह की सिफारिश है।
पहली, पौध उपचार। गन्ने के टुकड़ों (सेट्स) या पौध की जड़ों को 3 से 5 मिली प्रति लीटर पानी के घोल में डुबोकर उपचार करें। दूसरी, पत्तियों पर छिड़काव। बुवाई के 45 से 60 दिन बाद, यानी शुरुआती किल्ला निकलने के समय, 2 से 4 मिली प्रति लीटर की दर से छिड़काव करें।
नैनो डीएपी भी 500 मिली की बोतल में आता है और सिर्फ उपचार व छिड़काव के लिए है। मिट्टी में या ड्रिप से देने की सलाह नहीं है।
बोरी बनाम बोतल: वजन और मेहनत का गणित
एक 45 किलो यूरिया की बोरी का बाजार भाव करीब 4,000 रुपये है, हालांकि सब्सिडी के बाद किसान को यह 266 रुपये में मिलती है। फिर भी हर फसल में बोरी ढोना, कंधे पर उठाकर बिखेरना, और बारिश में खाद बह जाने का डर। ये मेहनत और नुकसान अलग हैं।
नैनो यूरिया की 500 मिली बोतल एक एकड़ के एक स्प्रे में पूरी हो जाती है। बोतल कुर्ते की जेब में समा जाती है, बोरी ट्रैक्टर की ट्रॉली में आती है। फर्क सिर्फ वजन का नहीं है, तरीका भी बदला है। खाद अब जमीन से गुजरकर नहीं, सीधे पत्ती तक पहुंचती है।
पांच गलतियां जो स्प्रे बेकार कर देती हैं
- नैनो खाद को किसी भी रसायन या कीटनाशक के साथ मनमाने ढंग से मिलाना। इफको की साफ सलाह है कि इसे बेतरतीब रसायनों के साथ न मिलाएं।
- घोल बनाकर रख देना। पहले से घोलकर रखी दवा असर खो देती है। छिड़काव से ठीक पहले ताजा घोल बनाएं।
- गंदा या खारा पानी इस्तेमाल करना। साफ पानी ही लें।
- छिड़काव के 12 घंटे के भीतर बारिश हो जाए तो स्प्रे दोहराना पड़ता है। मौसम देखकर ही छिड़कें।
- तेज धूप में छिड़काव करना। सुबह या शाम का समय चुनें ताकि पत्तियां घोल को अच्छे से सोख सकें।
कहां से खरीदें
नैनो यूरिया और नैनो डीएपी इफको की सहकारी समितियों (पैक्स), प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्रों और इफको बाजार केंद्रों पर मिलती है। ऑनलाइन iffcobazar.in से भी मंगाया जा सकता है। खरीदते वक्त बोतल पर निर्माता का लेबल और निर्माण तिथि जरूर देख लें।
मुख्य बातें
- गन्ने में नैनो यूरिया के दो छिड़काव (4 मिली प्रति लीटर): बुवाई के 90 और 180 दिन बाद। 25% नाइट्रोजन बचत, पैदावार बराबर।
- नैनो डीएपी शुरुआत में काम आता है: बुवाई के 45 से 60 दिन पर पत्तियों पर 2 से 4 मिली प्रति लीटर छिड़काव, या बुवाई से पहले 3 से 5 मिली प्रति लीटर से पौध उपचार।
- घोल हमेशा ताजा बनाएं, छिड़काव के 12 घंटे में बारिश हो जाए तो स्प्रे दोहराएं। एक एकड़ के एक स्प्रे में करीब 500 मिली बोतल लगती है।
स्रोत: इफको नैनो डीएपी आधिकारिक सलाह (nanodap.in), गन्ने पर नैनो यूरिया शोध (इंटरनेशनल जर्नल ऑफ प्लांट एंड सॉइल साइंस, 2025), बिजनौर ड्रोन प्रदर्शन रिपोर्ट (चिनीमंडी/टाइम्स ऑफ इंडिया)।
