2 नवंबर से नंगलामल मिल की पेराई, खेत जल्दी खाली होगा तो गेहूं की बुआई भी समय पर

मेरठ के गन्ना किसानों को इस बार गेहूं की बुआई के लिए दोहरी खुशखबरी मिली है। माछरा क्षेत्र की नंगलामल शुगर मिल ने पेराई सत्र 2026-27 का शुभारंभ 2 नवंबर से करने की घोषणा की है। मिल समय पर चलेगी तो किसानों के खेत जल्दी खाली होंगे, और गेहूं की बुआई भी देरी के बिना हो सकेगी। यही वह चक्र है जो पश्चिम यूपी के किसान हर साल दोहराते हैं, लेकिन अक्सर पेराई देर से शुरू होने पर गेहूं पिछड़ जाता है।
अमर उजाला की 23 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक मिल प्रबंधन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। गन्ना महाप्रबंधक अभिषेक श्रीवास्तव ने किसानों से समय से गन्ने की कटाई, छिलाई और आपूर्ति सुनिश्चित करने की अपील की है।
2 नवंबर की तारीख कैसे तय हुई
नंगलामल मिल में तैयारियां अक्टूबर के पहले पखवाड़े से ही चल रही हैं। 14 अक्टूबर को मिल के बॉयलर में अग्नि प्रवाहित कर दी गई थी। गन्ना तौल के लिए कांटे लगाने का कार्य भी लगभग पूरा हो चुका है। गन्ना समितियां किसानों का गन्ना सर्वे कराकर और सट्टा प्रदर्शन लगाकर जुड़ी समस्याओं का समाधान कर रही हैं।
नंगलामल मवाना शुगर्स लिमिटेड की इकाई है, जिसका नाम नंगलामल शुगर कॉम्प्लेक्स है। कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज को दी सूचना में बताया था कि पिछले सत्र में इस मिल में 31 अक्टूबर 2025 को पेराई शुरू हुई थी। यानी इस मिल का 2 नवंबर को चेन चलाना कोई अपवाद नहीं, बल्कि इसी समय का नियमित सिलसिला है।
जल्दी पेराई का सीधा फायदा गेहूं को
द टाइम्स ऑफ इंडिया की 28 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मिलें इस बार पिछले साल की तुलना में करीब 10 दिन पहले पेराई शुरू कर रही हैं। बिजनौर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली और मुरादाबाद की कई मिलों में अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में चेन चलने की उम्मीद है।
इसका सीधा फायदा यह है कि किसान अपने खेत समय से खाली कर पाएंगे और गेहूं की बुआई उचित समय पर हो सकेगी। गेहूं की बुआई का सही समय निकल जाने पर पैदावार पर असर पड़ता है, यह हर किसान जानता है। मिल का समय पर चलना और किसान का समय पर गेहूं बोना, दोनों एक ही कड़ी हैं।
30 हजार किसानों से महाप्रबंधक की अपील
गन्ना महाप्रबंधक अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया कि मिल से इस समय लगभग 30 हजार से अधिक किसान जुड़े हुए हैं। किसानों से स्वच्छ और ताजा गन्ने की आपूर्ति करने का आग्रह किया गया है। उनका कहना है कि इससे पेराई कार्य सुचारु रहेगा और किसानों को उपज का बेहतर लाभ मिलेगा।
मिल ने गन्ना खरीद केंद्रों और अन्य संबंधित व्यवस्थाओं को बेहतर बनाया है ताकि किसानों को पर्ची और तौल में कोई असुविधा न हो। किसानों को सलाह है कि गन्ना काटने के बाद उसे ज्यादा दिन खेत में न छोड़ें। कटा गन्ना जितना ज्यादा समय पड़ा रहता है, उसमें सूखापन बढ़ता है और वजन घटता है। इसका सीधा नुकसान किसान के भुगतान पर पड़ता है।
सट्टा-सर्वे और बैंक खाता जांच लें
पेराई शुरू होने से पहले किसानों को दो कागजी काम जरूर निपटा लेने चाहिए। पहला, गन्ना समिति में अपने सर्वे और सट्टे की जानकारी जांच लें। अमर उजाला की 14 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक समितियां सट्टा प्रदर्शन के जरिए किसानों की समस्याओं का समाधान कर रही हैं। अगर आपके खेत का रकबा, किस्म या सट्टा में कोई गड़बड़ी है, तो मिल चलने से पहले ही उसे ठीक करवा लें। बाद में पर्ची रुकने या भुगतान अटकने की शिकायतें इसी से शुरू होती हैं।
दूसरा, बैंक खाता सक्रिय रखें और उसे अपने पहचान दस्तावेजों से जोड़कर रखें। द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में भी किसानों को यही सलाह दी गई है, ताकि भुगतान में देरी न हो।
गन्ना मूल्य पर किसानों की नजर
गन्ना मूल्य को लेकर किसान संगठनों की मांग इस समय जोरों पर है। किसान संगठन मूल्य वृद्धि की मांग कर रहे हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक मिलों की जल्दी पेराई की तैयारियां इन्हीं मांगों के बीच हो रही हैं। नंगलामल मिल के किसान भी इस खबर पर नजर रखेंगे कि मूल्य की घोषणा कब होती है।
फिलहाल मिल की ओर से पर्ची, तौल और खरीद केंद्रों की व्यवस्था बेहतर किए जाने की बात कही गई है। चीनी मिल और किसानों के बीच बेहतर समन्वय से ही पेराई सत्र सफल होता है।
मुख्य बातें
- नंगलामल शुगर मिल (मवाना शुगर्स) में पेराई सत्र 2026-27 की शुरुआत 2 नवंबर से होगी, तैयारियां पूरी।
- करीब 30 हजार किसान जुड़े हैं; बॉयलर में 14 अक्टूबर को अग्नि प्रवाहित, तौल के कांटे लगभग लग चुके।
- समय पर पेराई से खेत जल्दी खाली होंगे और गेहूं की बुआई सही समय पर हो सकेगी; सट्टा-सर्वे और बैंक खाते की जांच पहले ही करा लें।
स्रोत: अमर उजाला, मेरठ (23 अक्टूबर 2026); अमर उजाला, मेरठ (14 अक्टूबर 2026); द टाइम्स ऑफ इंडिया, मेरठ (28 सितंबर 2026); मवाना शुगर्स लिमिटेड की स्टॉक एक्सचेंज सूचना (31 अक्टूबर 2025)।
