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आज से नंगलामल में गन्ना खरीद शुरू: 6 नवंबर से चलेगी मिल, केंद्र पर ये काम पहले करें

✍️ Aamir Raza · 🗓 04 Nov 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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आज से नंगलामल में गन्ना खरीद शुरू: 6 नवंबर से चलेगी मिल, केंद्र पर ये काम पहले करें

मेरठ के माछरा और मुंडाली क्षेत्र के किसानों का इंतजार आज खत्म हो रहा है। नंगलामल चीनी मिल के सभी गन्ना क्रय केंद्रों पर आज, 4 नवंबर से गन्ने की खरीद शुरू हो गई है। मिल में पेराई 6 नवंबर से होगी। गन्ना पहले केंद्रों पर तौला जाएगा, फिर तय कार्यक्रम के हिसाब से मिल में पेराई के लिए जाएगा।

अमर उजाला की 2 नवंबर की खबर के मुताबिक मिल प्रबंधन ने खरीद की सारी तैयारियां पूरी कर ली हैं। गन्ना महाप्रबंधक अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया कि किसानों की सुविधा के लिए क्रय केंद्र पहले चालू किए जा रहे हैं, ताकि पेराई के दिन केंद्र पर भीड़ और अव्यवस्था न हो।

पहले 2 नवंबर थी तारीख, बारिश ने बदला कार्यक्रम

नंगलामल मिल की कहानी इस सत्र में दो बार बदली है। पहले पेराई 2 नवंबर से शुरू होनी थी। फिर 29 और 30 अक्टूबर की लगातार बारिश ने खेतों में जलभराव कर दिया। क्रय केंद्रों पर कीचड़ जमा हो गया। गन्ने की कटाई और छिलाई रुक गई। ऐसे में 2 नवंबर को मिल चलाना मुमकिन नहीं रहा।

30 अक्टूबर की रिपोर्ट में पेराई 5 से 7 नवंबर के बीच शुरू होने की संभावना बताई गई थी। अब तारीख पक्की हो गई है। किसानों के लिए पक्की तारीख ही सबसे बड़ी राहत है, क्योंकि अंदाजे पर कटाई का कार्यक्रम बनाना मुश्किल होता है।

मेरठ की दौराला मिल भी 2 नवंबर की जगह अब 6 नवंबर से चलेगी। मवाना मिल की पेराई भी बारिश से टली थी। पूरे जिले में बारिश ने पेराई कैलेंडर को करीब चार दिन पीछे धकेल दिया था।

केंद्र पर पहुंचने से पहले ये बातें पक्की कर लें

खरीद शुरू होने का मतलब यह नहीं है कि बिना पर्ची के गन्ना लेकर केंद्र पहुंच जाएं। पर्ची ही आपूर्ति की तारीख और मात्रा तय करती है, इसलिए उसी दिन गन्ना ले जाना सबसे सुरक्षित रहता है जिस दिन की पर्ची है।

दूसरी बात छिलाई की है। मिल प्रबंधन ने छिलाई जारी रखने की अपील की है, ताकि तय समय पर आपूर्ति में रुकावट न आए। साफ गन्ना केंद्र पर जल्दी तौला जाता है।

तीसरी बात रास्ते और तौल पर्ची की है। बारिश के बाद कई रास्तों पर अब भी कीचड़ है, इसलिए ट्रॉली भरने से पहले रास्ता देख लें। मिल प्रबंधन ने भरोसा दिया है कि दिन और रात दोनों समय आपूर्ति करने वालों को असुविधा नहीं होगी। तौल के बाद मिलने वाली पर्ची भुगतान का आधार है, उसे फोटो खींचकर फोन में भी रख लें।

मेरठ जिले की तस्वीर: 6 मिलें, 2.22 लाख किसान

दैनिक जागरण की 27 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक मेरठ जिले में छह चीनी मिलें हैं, जिनकी कुल पेराई क्षमता 48,800 टीसीडी है और गन्ना किसानों की संख्या करीब 2.22 लाख है। नंगलामल के क्षेत्र के किसान माछरा, मुंडाली और आसपास के गांवों से जुड़े हैं।

जिले की मिलों का कार्यक्रम देखें तो किनौनी मिल 5 नवंबर से, मोहिउद्दीनपुर मिल 7 नवंबर से और सकौती मिल 4 नवंबर से शुरू होनी थी। यानी नवंबर के पहले हफ्ते में मेरठ की लगभग सभी मिलें चालू हो जाएंगी। इससे खेत जल्दी खाली होंगे और गेहूं की बुवाई समय पर हो सकेगी। गन्ना देर से कटा तो गेहूं की बुवाई पीछे खिसकती है, इसलिए पेराई का समय पर शुरू होना सीधे अगली फसल से जुड़ा है।

भाव का सवाल अब भी खुला है

पेराई शुरू हो रही है, पर भाव की घोषणा अब भी बाकी है। पेराई सत्र 2026-27 के लिए राज्य परामर्शित मूल्य, यानी SAP, अभी घोषित नहीं हुआ है। नवभारत टाइम्स की 30 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक किसान भाव बढ़ाने और पेराई से पहले घोषणा की मांग कर रहे हैं, कुछ संगठनों की मांग 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल तक की है।

इसका सीधा मतलब यह है कि किसान इस समय गन्ना दे रहे हैं और नई दर की घोषणा बाद में होगी। इस सत्र के लिए 10 से 20 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी पर विचार की खबरें भी आई हैं, पर अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है। इसलिए पर्ची और तौल का पूरा हिसाब संभालकर रखना जरूरी है।

केंद्र पर जाने से पहले पर्ची की तारीख, केंद्र का नाम और ट्रॉली की क्षमता तीनों मिला लें। ओवरलोड ट्रॉली रास्ते में भी परेशानी देती है और केंद्र पर भी। कटा गन्ना ज्यादा दिन खेत में पड़ा न रहने दें, सूखने पर वजन घटता है और नुकसान सीधे किसान की जेब से जाता है। शिकायत हो तो केंद्र प्रभारी और गन्ना समिति से लिखित में बात करें, मौखिक शिकायत भूल जाती है, लिखित का जवाब देना पड़ता है।

अगले दो दिन नंगलामल क्षेत्र के किसानों के लिए सबसे अहम हैं। जिसकी पर्ची आ गई है, वह छिलाई और ढुलाई का कार्यक्रम आज ही पक्का कर ले, जिसका नंबर नहीं आया है, वह केंद्र से संपर्क में रहे।

मुख्य बातें

  • नंगलामल चीनी मिल के सभी क्रय केंद्रों पर 4 नवंबर से गन्ने की खरीद शुरू हो गई है, पेराई 6 नवंबर से होगी।
  • बारिश से 2 नवंबर की पेराई टली थी, अब खरीद पहले और पेराई बाद में शुरू करने का कार्यक्रम तय हुआ है।
  • पर्ची की तारीख पर ही गन्ना ले जाएं, साफ और छिला गन्ना लाएं, तौल पर्ची संभालकर रखें।
  • पेराई सत्र 2026-27 के SAP की घोषणा अभी बाकी है, इसलिए पर्ची और तौल का पूरा हिसाब रखना जरूरी है।

स्रोत: अमर उजाला (2 नवंबर और 30 अक्टूबर 2026), दैनिक जागरण (27 अक्टूबर 2026), नवभारत टाइम्स (30 अक्टूबर 2026)।

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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