नानौता मिल में ₹1.10 करोड़ का हिसाब गड़बड़ाया, शासन को भेजा गया कार्रवाई का पत्र

सहारनपुर जिले की नानौता किसान सहकारी चीनी मिल में पेराई शुरू होने से ठीक पहले बहीखातों की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने मिल से जुड़े किसानों की चिंता बढ़ा दी है। ठेकेदारों के भुगतान से जुड़े लेखा अभिलेखों की जांच में करीब 1.10 करोड़ रुपये की अनियमितता मिली है। मंडलायुक्त ने दोषियों पर कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखा है और पुराने रिकॉर्ड का विशेष ऑडिट कराने की सिफारिश भी की है।
जिस मिल में 1 नवंबर से पेराई शुरू होने की उम्मीद है, उसी के खातों में कटिंग, ओवरराइटिंग और फर्जी प्रविष्टियों के जरिये भुगतान के निशान मिले हैं। समिति ने कहा है कि ऐसी कार्यप्रणाली में दोहरे भुगतान और गबन की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता।
जांच में क्या-क्या मिला
प्रशासनिक जांच समिति ने वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2026-27 तक के उपलब्ध रिकॉर्ड का परीक्षण किया। कॉन्ट्रैक्टर लेजर में 70.95 लाख रुपये और अर्नेस्ट मनी लेजर में 39.33 लाख रुपये से अधिक की अनियमितता मिली। दोनों को जोड़ें तो आंकड़ा करीब 1.10 करोड़ रुपये बैठता है।
गड़बड़ी का तरीका भी रिपोर्ट में दर्ज है। लेजर में ओवरराइटिंग मिली, गलत प्रारंभिक अवशेष दर्ज थे और फर्जी प्रविष्टियों के जरिये भुगतान किया गया था। लेखा प्रविष्टियों की नियमित निगरानी नहीं हुई और प्रविष्टि के बाद सक्षम अधिकारियों से परीक्षण भी नहीं कराया गया। वित्तीय वर्ष समाप्त होने पर ठेकेदारों के खातों में ऋणात्मक अवशेष की समीक्षा भी नहीं हुई, जिससे एक ही भुगतान दो बार होने की गुंजाइश बनती है।
शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंची, तब बनी समिति
यह जांच अचानक शुरू नहीं हुई। मिल में वित्तीय अनियमितता की शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय भेजी गई थी। उसके बाद प्रशासनिक स्तर पर जांच कराई गई। जिलाधिकारी ने अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), उप गन्ना आयुक्त और मुख्य लेखाधिकारी की तीन सदस्यीय समिति बनाई, जिसने अपनी रिपोर्ट सौंप दी।
इससे पहले किसान मजदूर संगठन भी मिल पर भ्रष्टाचार के खुलासे की मांग को लेकर धरना दे चुका था। धरना स्थल पर अधिकारियों ने बताया था कि जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को दे दी गई है और संगठन ने खुलासे के लिए 15 अक्टूबर तक का समय दिया था। अब मंडलायुक्त के पत्र के बाद मामला शासन के पाले में है। मंडलायुक्त डॉ. रूपेश कुमार ने कहा है कि जांच में काफी अनियमितताएं मिली हैं, इसलिए दोषियों पर कार्रवाई के साथ पुराने रिकॉर्ड के विशेष ऑडिट और एसआईटी जांच के लिए भी शासन को लिखा गया है।
वसूली का हिसाब अब भी अधूरा है
रिपोर्ट का एक हिस्सा वसूली के दावों पर भी सवाल उठाता है। कॉन्ट्रैक्टर लेजर में दर्ज 70.95 लाख रुपये के डेबिट अवशेष के सापेक्ष जांच से पहले 31.10 लाख रुपये की वसूली या समायोजन दर्शाया गया था। मिल प्रबंधन ने बाद में 24.74 लाख रुपये का अतिरिक्त समायोजन अथवा वसूली किए जाने की जानकारी दी। इसके बावजूद 24.01 लाख रुपये की धनराशि समायोजन या वसूली के लिए शेष बताई गई है।
इस शेष राशि में एक ठेकेदार को दिया गया 15.50 लाख रुपये का अग्रिम और पुराने निष्क्रिय खातों के 8.50 लाख रुपये के डेबिट अवशेष भी शामिल हैं। अलग-अलग माध्यमों से किए गए समायोजन की बैंक रिकॉर्ड से पूरी पुष्टि भी नहीं हो सकी है।
पहले की आंतरिक जांच में भी यही संकेत थे
प्रशासनिक जांच शुरू होने से पहले मिल के पूर्व प्रधान प्रबंधक द्वारा मिल की तीन सदस्यीय आंतरिक समिति की रिपोर्ट पेश की गई थी। उस रिपोर्ट में कॉन्ट्रैक्टर लेजर में 31.53 लाख और अर्नेस्ट मनी लेजर में 39.44 लाख रुपये की अनियमित प्रविष्टियों का उल्लेख था। यानी गड़बड़ी का संकेत मिल के अंदर से भी पहले आ चुका था।
संयुक्त जांच में लेखा अनुभाग के कर्मचारियों की कार्यप्रणाली प्रथम दृष्टया संदिग्ध बताई गई है और पूर्व में तैनात मुख्य लेखाकारों की संलिप्तता की भी आशंका जताई गई है। यह जांच समिति की रिपोर्ट है, अंतिम न्यायिक फैसला नहीं। दोष किसका है, यह शासन की कार्रवाई और विशेष ऑडिट के बाद ही तय होगा।
किसान पर इसका क्या असर पड़ेगा
नानौता मिल के लिए सबसे अहम सवाल पेराई का है। जिले की चीनी मिलों की तैयारियों पर आई खबरों के मुताबिक नानौता में 1 नवंबर से पेराई शुरू होने की उम्मीद है। अक्टूबर की शुरुआत में हुई समीक्षा बैठक में बताया गया था कि नानौता मिल का करीब 75.25 प्रतिशत मरम्मत कार्य पूरा हो चुका है। मिल चलने की तैयारी अपने रास्ते पर है, पर उसके खातों की सफाई अब शासन के फैसले पर टिकी है।
किसानों के लिए इसका सीधा मतलब यह है कि मिल के प्रबंधन और भुगतान व्यवस्था पर नजर रखना इस सत्र में और जरूरी हो गया है। पर्ची, तौल और भुगतान की तारीखों का अपना रिकॉर्ड रखें। भुगतान में देरी हो या पर्ची को लेकर दिक्कत आए तो गन्ना समिति और जिला गन्ना अधिकारी के पास शिकायत का रास्ता खुला है। सहकारी मिल किसानों की अपनी संस्था होती है, इसलिए उसके खातों में पारदर्शिता की मांग करना किसानों का हक है, एहसान नहीं।
मुख्य बातें
- नानौता सहकारी चीनी मिल के लेजर में करीब 1.10 करोड़ रुपये की अनियमितता मिली है, जिसमें कॉन्ट्रैक्टर लेजर के 70.95 लाख और अर्नेस्ट मनी लेजर के 39.33 लाख रुपये शामिल हैं।
- मंडलायुक्त ने दोषियों पर कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखा है और पुराने रिकॉर्ड के विशेष ऑडिट व एसआईटी जांच की सिफारिश की है।
- 24.01 लाख रुपये की वसूली अब भी शेष बताई गई है, जबकि नानौता मिल में 1 नवंबर से पेराई शुरू होने की उम्मीद है।
स्रोत: अमर उजाला (26 अक्टूबर 2026), दैनिक जागरण (सहारनपुर चीनी मिल पेराई तैयारी), राइट सिग्नेचर (नानौता मिल धरना रिपोर्ट)
